
✨ रहस्यमयी कहानी: “समय का चक्र” (Part 3) ✨
(Time Travel | Reincarnation | Suspense | Hindi Story)
आरव का गला सूख गया…
उसके कमरे की दीवार पर खड़ी वो काली आकृति… अब सिर्फ अतीत तक सीमित नहीं थी।
वो उसके वर्तमान में आ चुकी थी।
“अब तुम कहीं नहीं भाग सकते…” — उसकी आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।
आरव धीरे-धीरे पीछे हटने लगा—
“तुम… क्या हो?”
कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई…
फिर वो आकृति धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी—
“मैं समय हूँ…”
आरव का दिल धड़कना भूल गया—
“समय…?”
“मैं वो हूँ जो संतुलन बनाए रखता है…”
“और तुमने… उस संतुलन को तोड़ दिया है…”
आरव ने हिम्मत जुटाई—
“मैंने कुछ गलत नहीं किया… मैंने बस खुद को बचाया…”
आकृति की आवाज़ और ठंडी हो गई—
“तुम्हें मरना था…”
“वो तुम्हारा अतीत था… तुम्हारी मृत्यु… वही इस चक्र को पूरा करती थी…”
“लेकिन तुमने उसे बदल दिया…”
**अब आरव समझने लगा था—
उसकी “मौत” ही समय का हिस्सा थी…
और उसने उस नियम को तोड़ दिया था।
“तो अब क्या होगा?” — उसकी आवाज़ कांप रही थी।
आकृति उसके बिल्कुल सामने आकर रुक गई—
“अब… संतुलन वापस लाया जाएगा…”
अचानक… कमरे की सारी चीजें हवा में उठने लगीं।
घड़ी उलटी दिशा में चलने लगी…
किताब के पन्ने अपने आप पलटने लगे…
आरव को लगा जैसे उसका शरीर हल्का हो रहा है…
और अगले ही पल—
वो फिर उसी महल में था।
लेकिन इस बार… सब कुछ अलग था।
युद्ध पहले से ज्यादा भयानक था…
आसमान लाल था… जमीन पर लाशें पड़ी थीं…
और सबसे डरावनी बात—
इस बार… दो “आरव” थे।
एक… जो अभी-अभी वहां आया था…
और दूसरा… जो पहले से वहाँ मौजूद था—
राजकुमार आर्यन।
आरव हैरान रह गया—
“ये… ये कैसे?”
तभी वो काली आकृति आसमान में दिखाई दी—
“तुमने चक्र तोड़ा… अब तुम्हें खुद उसे पूरा करना होगा…”
अब सच्चाई साफ थी—
अगर चक्र पूरा करना है…
तो एक आरव को मरना होगा।
तभी… वो लड़की फिर उसके सामने आई।
इस बार उसकी आंखों में डर था—
“अब सब खत्म हो जाएगा…”
आरव ने पूछा—
“सच बताओ… तुम कौन हो?”
लड़की ने कुछ पल उसे देखा… और फिर धीरे से बोली—
“मैं… तुम्हारा भविष्य हूँ…”
“क्या?” — आरव चौंक गया।
“मैं वही हूँ… जो तुम बनोगे…”
“और अगर तुमने ये चक्र नहीं पूरा किया… तो हम दोनों कभी अस्तित्व में नहीं रहेंगे…”
आरव के दिमाग में सब कुछ घूमने लगा—
- वो अतीत में है…
- उसका एक और रूप वहाँ है…
- और ये लड़की… उसका भविष्य है…
तभी… दूसरा आरव (राजकुमार आर्यन) उसकी तरफ बढ़ा।
“तुम… कौन हो?” — उसने तलवार उठाते हुए पूछा।
आरव चुप था…
क्योंकि वो जानता था—
ये उसका ही दूसरा रूप है।
काली आकृति की आवाज़ फिर गूंजी—
“समय का नियम सरल है…”
“एक जीवन… एक अंत…”
अब फैसला आरव के हाथ में था—
क्या वो खुद को मारकर समय को ठीक करेगा?
या चक्र को तोड़कर सब कुछ खत्म कर देगा?
लड़की (भविष्य) ने उसकी आंखों में देखा—
“जो भी करो… जल्दी करो…”
आरव ने धीरे-धीरे जमीन से तलवार उठाई…
उसके हाथ कांप रहे थे…
और सामने… उसका ही दूसरा रूप खड़ा था।