
✨ रहस्यमयी कहानी: “समय का चक्र” (Part 2) ✨
(Time Travel | Reincarnation | Suspense | Hindi Story)
आरव का दिल अभी भी तेज धड़क रहा था।
उसके हाथ पर बना ताजा घाव… ये साबित कर रहा था कि जो कुछ उसने देखा… वो सिर्फ सपना नहीं था।
“ये कैसे हो सकता है…” — वह खुद से बुदबुदाया।
लाइब्रेरी में सब कुछ सामान्य था… लोग पढ़ रहे थे… पन्ने पलट रहे थे…
लेकिन आरव के लिए… सब कुछ बदल चुका था।
उसने फिर से उस किताब को खोला… “राजकुमार आर्यन” वाला पेज।
इस बार… तस्वीर थोड़ी अलग थी।
पहले जहां एक सीधा खड़ा राजकुमार था… अब उसी तस्वीर में…
उसके सीने में एक तीर लगा हुआ था।
आरव की सांस रुक गई—
“ये… पहले ऐसा नहीं था…”
तभी उसके दिमाग में वही दृश्य फिर से चमका—
तीर… दर्द… अंधेरा…
“मतलब… जो मैं वहाँ करता हूँ… वो यहाँ बदल रहा है?”
अब ये सिर्फ सपना नहीं था…
ये समय का खेल था।
उस रात… आरव ने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
उसने फैसला किया—
“अगर मैं सच में अतीत में जा सकता हूँ… तो मैं उसे बदलूंगा…”
लेकिन सवाल ये था—
कैसे?
उसे अचानक किताब के आखिरी पेज पर कुछ लिखा हुआ दिखा…
“समय एक चक्र है…
जो शुरू होता है… वहीं खत्म होता है…”
और उसके नीचे एक अजीब सा चिन्ह बना था…
वही चिन्ह… जो उसे अपने सपनों में महल की दीवार पर दिखता था।
अगली रात… ठीक 2 बजे…
आरव ने वही चिन्ह अपने कमरे के फर्श पर बना दिया।
दिल तेज धड़क रहा था… हाथ कांप रहे थे…
“अगर ये सच है… तो आज मैं वापस जाऊंगा…”
उसने आंखें बंद कीं…
कुछ सेकंड… कुछ नहीं हुआ…
फिर अचानक—
हवा तेज हो गई… कमरे की लाइट्स टिमटिमाने लगीं…
और उसके चारों तरफ सब कुछ घूमने लगा।
जब उसने आंखें खोली…
वो फिर वहीं था।
पुराना महल… युद्ध का मैदान… तलवार की आवाज़…
लेकिन इस बार… कुछ अलग था।
इस बार… वो जानता था कि आगे क्या होने वाला है।
“तीर…” — उसने खुद से कहा।
उसने तुरंत एक तरफ छलांग लगाई—
और अगले ही पल… एक तीर उसके पास से निकल गया।
“मैंने… मैं बच गया…”
उसके चेहरे पर हैरानी और खुशी दोनों थीं।
तभी… वो लड़की फिर उसके सामने आई।
“तुम बदल रहे हो…” — उसने धीरे से कहा।
आरव ने उसकी आंखों में देखा—
“तुम… कौन हो?”
वो मुस्कुराई—
“मैं… तुम्हारा अतीत हूँ…”
लेकिन तभी…
आसमान अचानक काला हो गया…
हवा ठंडी हो गई… और चारों तरफ अजीब सी खामोशी छा गई।
“ये ठीक नहीं है…” — लड़की की आवाज़ कांप गई।
“तुमने समय को बदल दिया है…”
“और अब… समय तुम्हें ठीक करेगा…”
अचानक… जमीन फटने लगी…
और उसमें से एक काली आकृति बाहर आई।
उसका कोई चेहरा नहीं था… सिर्फ अंधेरा…
“जो चक्र को तोड़ेगा…
वो खुद उसमें फंस जाएगा…” — उसकी आवाज़ गूंजी।
आरव पीछे हट गया—
“ये क्या है?”
लड़की चिल्लाई—
“भागो!!! ये ‘समय का रक्षक’ है…”
वो आकृति तेजी से आरव की तरफ बढ़ी…
और जैसे ही उसने आरव को छूने की कोशिश की—
सब कुछ फिर से घूमने लगा…
आरव अचानक अपने कमरे में वापस था।
लेकिन इस बार… एक बड़ा फर्क था।
कमरे की दीवार पर… वही काली आकृति खड़ी थी।
और उसने धीरे से कहा—
“अब तुम कहीं नहीं भाग सकते…”