अंधेरे का खेल (The Game of Darkness)

𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟗 — “अंधेरा छा गया”

जैसे ही काउंटडाउन खत्म हुआ…

पूरा शहर अचानक अंधेरे में डूब गया।

सर्वर रूम की सारी मशीनें बंद हो गईं।

नीली और लाल लाइटें एक-एक करके बुझने लगीं।


रिया ने घबराकर कहा —

“यह… हो गया…”


सिया की आँखें लैपटॉप की स्क्रीन पर जमी हुई थीं।

उसने धीरे से कहा —

“ब्लैकआउट शुरू हो चुका है…”


आरव ने तुरंत फोन निकाला।

लेकिन फोन में भी कोई सिग्नल नहीं था।


“इंटरनेट… सब बंद है।”


आर्यन ने गंभीर आवाज़ में कहा —

“यही उनका प्लान था।”


ऊपर से अचानक शहर में अफरा-तफरी की आवाज़ें आने लगीं।

लोग चिल्ला रहे थे।

कारों के हॉर्न बज रहे थे।

पूरा शहर अराजकता में डूब चुका था।


और उस अंधेरे में…

खुफिया एजेंसी का चीफ धीरे-धीरे हंस रहा था।


“देखा?”

“यही असली ताकत है।”


आरव ने गुस्से से कहा —

“तुमने पूरे देश को खतरे में डाल दिया!”


चीफ ने शांत आवाज़ में कहा —

“नहीं…”

“मैंने सिर्फ एक नया सिस्टम शुरू किया है।”


अचानक…

सिया के लैपटॉप की स्क्रीन फिर से चमकी।


उसने तेजी से टाइप करना शुरू किया।


“रुको…”

“मुझे कुछ मिल रहा है…”


आर्यन ने पूछा —

“क्या?”


सिया ने स्क्रीन उनकी तरफ घुमा दी।


स्क्रीन पर एक लोकेशन ब्लिंक कर रही थी।


“यह… The Circle का असली सर्वर है।”


रिया ने पूछा —

“कहाँ?”


सिया की आवाज़ धीमी हो गई।


“नेशनल पावर ग्रिड कंट्रोल सेंटर…”


आरव चौंक गया।


“यानी… अगर हम वहाँ पहुँच जाएं…”


सिया ने सिर हिलाया।


“तो हम पूरे देश की बिजली वापस ला सकते हैं।”


लेकिन तभी…


चीफ जोर से हंस पड़ा।


“तुम लोग सच में सोचते हो कि मैं तुम्हें वहाँ जाने दूँगा?”


उसने अपनी बंदूक उठाई।


और उसे सीधे आरव की तरफ तान दिया।


रिया चिल्लाई —

“नहीं!”


लेकिन उसी पल…


अचानक पीछे से एक गोली चली।


धाय!!!


गोली सीधे चीफ के कंधे में लगी।


वह जमीन पर गिर पड़ा।


सबने पीछे मुड़कर देखा।


सीढ़ियों पर एक आदमी खड़ा था।


उसके हाथ में बंदूक थी।


और उसे देखते ही आरव की आंखें फैल गईं।


क्योंकि वह आदमी…


इंस्पेक्टर कबीर सिंह था।


लेकिन इस बार…

वह उनकी तरफ बंदूक ताने नहीं खड़ा था।


बल्कि उनकी मदद कर रहा था।


कबीर ने कहा —


“अगर देश को बचाना है…”

“तो मेरे साथ चलो।”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top