
𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟑 — “खून का रिश्ता”
धुआँ पूरे हॉल में फैल चुका था।
गोलियों की आवाज़ अब भी गूंज रही थी।
आरव ने जैसे ही उस आदमी का चेहरा साफ देखा… उसका दिल जैसे रुक गया।
“आर्यन…?”
उसकी आवाज़ कांप रही थी।
रिया भी हैरान होकर उस आदमी को देखने लगी।
“यह… कैसे हो सकता है?”
क्योंकि आर्यन मेहरा…
आरव का बड़ा भाई…
12 साल पहले रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया था।
और पुलिस ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
लेकिन अब…
वह उनके सामने खड़ा था।
जिंदा।
आर्यन ने जल्दी से कहा —
“आरव, सवाल पूछने का वक्त नहीं है। मेरे पीछे आओ!”
उसने एक साइड दरवाज़ा खोला जो लाइब्रेरी के पीछे के हिस्से में जाता था।
रिया ने घबराकर पूछा —
“क्या हम इस पर भरोसा कर सकते हैं?”
आरव कुछ सेकंड चुप रहा…
फिर बोला —
“अगर यह सच में आर्यन है… तो हमें जाना होगा।”
तीनों तेजी से उस दरवाज़े के अंदर घुस गए।
यह एक पुरानी अंधेरी सुरंग थी।
दीवारों पर नमी थी और छत से पानी टपक रहा था।
दूर कहीं पुलिस सायरन की हल्की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
आरव ने गुस्से से पूछा —
“तुम जिंदा कैसे हो?”
आर्यन चलते-चलते रुक गया।
उसने धीरे से कहा —
“क्योंकि मुझे मरना पड़ा था।”
रिया चौंक गई।
“क्या मतलब?”
आर्यन ने गहरी सांस ली।
“12 साल पहले… पापा ने ‘द सर्कल’ का सच पता लगा लिया था।”
“लेकिन उन्हें पता चल गया कि सर्कल उन्हें मारने वाला है।”
आरव की मुट्ठियाँ भींच गईं।
“तो उन्होंने मुझे छुपा दिया…”
आर्यन ने कहा।
“और दुनिया को यह यकीन दिला दिया कि मैं मर चुका हूँ।”
रिया ने धीरे से पूछा —
“लेकिन क्यों?”
आर्यन की आँखों में गुस्सा चमक उठा।
“क्योंकि मैं सर्कल के अंदर घुस चुका था।”
आरव चौंक गया।
“तुम… उनके लिए काम करते थे?”
आर्यन ने सिर हिलाया।
“नहीं… उनके खिलाफ।”
“मैं अंदर से उनकी हर हरकत का सबूत इकट्ठा कर रहा था।”
अचानक सुरंग के आखिर में एक लोहे का दरवाज़ा दिखा।
आर्यन ने उसे खोला।
तीनों बाहर आ गए।
यह लाइब्रेरी के पीछे का पुराना पार्क था।
रात और भी गहरी हो चुकी थी।
आर्यन ने तेजी से कहा —
“सुनो… हमारे पास बहुत कम वक्त है।”
“आज रात सर्कल एक बड़ा ऑपरेशन करने वाला है।”
आरव ने पूछा —
“कौन सा ऑपरेशन?”
आर्यन कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला —
“अगर वह सफल हो गया…”
“तो पूरे देश में अफरा-तफरी मच जाएगी।”
रिया घबराकर बोली —
“क्या करने वाले हैं वो?”
आर्यन ने धीरे से कहा —
“एक नकली आतंकी हमला…”
“जिसके पीछे असली मकसद है — देश की सबसे बड़ी बैंकिंग सिस्टम को हैक करना।”
आरव की आँखें फैल गईं।
“ताकि अरबों रुपये गायब हो जाएं…”
आर्यन ने कहा।
“और सारा इल्ज़ाम आतंकवादियों पर डाल दिया जाए।”
उसी वक्त…
पीछे से किसी ने ताली बजाई।
टप… टप… टप…
तीनों धीरे-धीरे पीछे मुड़े।
अंधेरे से एक आदमी बाहर आया।
और उसे देखते ही आर्यन का चेहरा सख्त हो गया।
वह इंस्पेक्टर कबीर सिंह था।
लेकिन इस बार…
उसके हाथ में बंदूक थी।
और उसके पीछे कम से कम 15 हथियारबंद लोग खड़े थे।
कबीर मुस्कुराया।
“मैं सोच रहा था… तुम लोग सुरंग का रास्ता ही चुनोगे।”
आरव ने गुस्से से कहा —
“तुम हमें कभी नहीं पकड़ पाओगे।”
कबीर हँस पड़ा।
“आरव…”
“तुम अभी भी समझ नहीं पाए।”
फिर उसने धीरे से कहा —
“इस खेल का असली मोहरा कौन है…”
और उसने बंदूक सीधे आर्यन की तरफ तान दी।
रिया चिल्लाई —
“नहीं!”
लेकिन तभी…
आर्यन अचानक मुस्कुराया।
और बोला —
“तुम हमेशा की तरह देर से पहुंचे, कबीर।”
अगले ही पल…
पूरे पार्क की लाइटें अचानक जल उठीं।
चारों तरफ से पुलिस की गाड़ियों की आवाज़ आने लगी।
सायरन गूंज उठे।
कबीर का चेहरा पहली बार बदल गया।
क्योंकि पूरे पार्क को…
पुलिस ने घेर लिया था।
लेकिन असली झटका अभी बाकी था…
क्योंकि पुलिस की भीड़ में से जो आदमी आगे आया…
उसे देखकर आरव और रिया दोनों सन्न रह गए।
वह देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी का चीफ था।
और वह सीधे आर्यन की तरफ देखकर बोला —
“Agent Aryan… Mission Complete?”