अंधेरे का खेल (The Game of Darkness)

𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟐 — “रहस्य का पहला दरवाज़ा”

लाइब्रेरी की तेज़ सफेद लाइटों ने पूरे हॉल को अचानक चमका दिया।
आरव और रिया की आँखें कुछ पल के लिए चकाचौंध से बंद हो गईं।

जब आरव ने फिर से आँखें खोलीं… तो उसके चारों तरफ कम से कम दस हथियारबंद लोग खड़े थे।

सबके चेहरे काले मास्क से ढके हुए थे।

और उनके बीच… इंस्पेक्टर कबीर सिंह खड़ा था।

वही इंस्पेक्टर… जिसे पूरी दुनिया तीन साल पहले मर चुका मानती थी।

आरव की आवाज़ भारी हो गई।

“यह… यह कैसे हो सकता है?”

कबीर सिंह हल्का सा मुस्कुराया।

“दुनिया में सबसे आसान चीज़ क्या है जानते हो, आरव?”

“किसी को मर चुका साबित करना…”

रिया घबराकर बोली —

“हमें यहाँ क्यों बुलाया है?”

कबीर धीरे-धीरे उनके करीब आया।

उसकी आँखों में एक अजीब सा सुकून था… जैसे सब कुछ पहले से तय हो।

“क्योंकि… खेल शुरू हो चुका है।”

आरव गुस्से से बोला —

“कौन सा खेल?”

कबीर ने ताली बजाई।

तुरंत दो आदमी आगे आए और एक पुराना लोहे का ब्रीफकेस जमीन पर रख दिया।

कबीर ने कहा —

“तुम्हारे पिता ने भी यही सवाल पूछा था… ठीक 10 साल पहले।”

यह सुनते ही आरव का खून खौल उठा।

“मेरे पिता की मौत के बारे में तुम्हें क्या पता है?”

कबीर की मुस्कान और गहरी हो गई।

“सब कुछ।”

उसने धीरे से ब्रीफकेस खोला।

अंदर एक पुरानी फाइल थी… और एक फोटो।

कबीर ने फोटो उठाकर आरव की तरफ फेंक दी।

आरव ने जैसे ही फोटो देखी… उसकी सांस अटक गई।

वो फोटो 20 साल पुरानी थी।

उसमें पाँच लोग खड़े थे।

उनमें से एक उसके पिता थे।

लेकिन बाकी चार चेहरों को देखकर आरव का दिमाग सुन्न हो गया।

क्योंकि उनमें से एक…

इंस्पेक्टर कबीर सिंह था।

और बाकी तीन लोग…

देश के तीन सबसे बड़े और ताकतवर बिजनेसमैन थे।

रिया धीरे से बोली —

“ये… ‘द सर्कल’ है।”

आरव ने चौंककर उसकी तरफ देखा।

“द सर्कल?”

रिया ने धीरे से सिर हिलाया।

“एक सीक्रेट सोसाइटी… जो पिछले 25 साल से देश की सबसे बड़ी घटनाओं को कंट्रोल कर रही है।”

कबीर ने ताली बजाई।

“इम्प्रेसिव, रिया।”

“तुमने काफी जल्दी सब कुछ समझ लिया।”

आरव ने गुस्से से कहा —

“तो तुम लोगों ने मेरे पिता को क्यों मारा?”

कुछ सेकंड के लिए हॉल में खामोशी छा गई।

फिर कबीर ने धीरे से कहा —

“क्योंकि… उन्होंने नियम तोड़ दिया था।”

“उन्होंने सर्कल को एक्सपोज़ करने की कोशिश की थी।”

आरव के हाथ कांपने लगे।

“और अब…”

कबीर ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा —

“तुम भी वही करने वाले हो।”

रिया अचानक घबरा गई।

“आरव… हमें यहाँ से निकलना होगा।”

लेकिन तभी…

कबीर ने अपनी घड़ी देखी।

और बोला —

“देर हो चुकी है।”

अचानक पूरे हॉल की लाइट्स झपकने लगीं।

फिर…

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

कुछ सेकंड बाद…

एक जोरदार धमाका हुआ।

धुआँ पूरे हॉल में भर गया।

किसी ने चिल्लाया —

“सिक्योरिटी! कोई अंदर घुस आया है!”

गोलियों की आवाज़ गूंजने लगी।

धड़ाम! धड़ाम!

आरव ने रिया का हाथ पकड़ा और चिल्लाया —

“भागो!”

दोनों धुएँ के बीच दौड़ने लगे।

अचानक किसी ने पीछे से आवाज़ लगाई —

“आरव!”

वो आवाज़…

किसी जानी-पहचानी लग रही थी।

आरव ने पीछे मुड़कर देखा।

धुएँ के बीच एक आदमी खड़ा था।

और जैसे ही धुआँ थोड़ा साफ हुआ…

आरव का दिल फिर से रुक गया।

क्योंकि वो आदमी…

उसका बड़ा भाई था।

आर्यन मेहरा।

जो 12 साल पहले गायब हो गया था।

और जिसे पूरी दुनिया… मर चुका मानती थी।

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