खोई हुई यादें – एक रहस्यमयी सस्पेंस थ्रिलर कहानी | Psychological Mystery Novel

𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟓 — “वेयरहाउस 17”

रात गहरी हो चुकी थी।

सड़कें लगभग खाली थीं।

सिया की कार शहर के पुराने इंडस्ट्रियल एरिया की तरफ बढ़ रही थी।


अर्जुन खिड़की से बाहर देख रहा था।

हर गुजरती हुई स्ट्रीट लाइट के साथ उसके दिमाग में अजीब-अजीब तस्वीरें चमक रही थीं।


एक अंधेरा कमरा…

खून की गंध…

और किसी की दर्द भरी चीख।


अर्जुन ने अपना सिर पकड़ लिया।


“मुझे… यह जगह याद आने लगी है…”


सिया ने उसकी तरफ देखा।


“अच्छा है।”

“क्योंकि हमें सच जानने के लिए तुम्हारी यादों की जरूरत पड़ेगी।”


कुछ मिनट बाद कार एक पुराने इलाके में पहुंच गई।


चारों तरफ जंग लगे गोदाम खड़े थे।

टूटी हुई खिड़कियाँ…

और अंधेरा।


सिया ने कार रोकी।


सामने एक बड़ा सा जंग लगा बोर्ड था।


WAREHOUSE 17


अर्जुन का दिल अचानक तेज धड़कने लगा।


“यही है…”


दोनों कार से उतरे।


हवा में अजीब सी ठंडक थी।


वेयरहाउस का बड़ा लोहे का दरवाज़ा आधा खुला हुआ था।


सिया ने धीरे से कहा—


“तैयार हो?”


अर्जुन ने सिर हिलाया।


दोनों धीरे-धीरे अंदर चले गए।


अंदर पूरी तरह अंधेरा था।


सिया ने टॉर्च ऑन की।


टॉर्च की रोशनी जैसे ही फर्श पर पड़ी…


अर्जुन अचानक रुक गया।


फर्श पर सूखे खून के निशान थे।


उसके हाथ कांपने लगे।


“यही… वही जगह है…”


अचानक उसके दिमाग में फिर से एक याद चमकी।


तीन आदमी…

बंदूकें…

और जोरदार गोलीबारी।


अर्जुन चिल्लाया—


“नीचे झुको!”


लेकिन जब उसने आँखें खोलीं…

वहाँ कोई नहीं था।


सिर्फ खामोशी।


सिया ने पूछा—


“क्या हुआ?”


अर्जुन ने भारी सांस लेते हुए कहा—


“यहाँ गोलीबारी हुई थी।”


“और… यहाँ तीन लोग मरे थे।”


सिया ने चारों तरफ टॉर्च घुमाई।


तभी रोशनी एक दीवार पर पड़ी।


और दोनों अचानक सख्त हो गए।


दीवार पर खून से एक शब्द लिखा था—


SHADOW


अर्जुन धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।


“यही… वही निशान है…”


लेकिन तभी—


वेयरहाउस के अंदर कहीं से ताली बजने की आवाज आई।


CLAP… CLAP… CLAP…


दोनों ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।


अंधेरे में से एक आदमी धीरे-धीरे बाहर आया।


उसके हाथ में बंदूक थी।


और उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान।


“अच्छा हुआ तुम लोग वापस आ गए।”


अर्जुन की सांस रुक गई।


क्योंकि वह आदमी…


शहर का सबसे खतरनाक पुलिस इंस्पेक्टर था।


INSPECTOR RATHORE


राठौर मुस्कुराया और बोला—


“आखिरकार… सीरियल किलर अपने क्राइम सीन पर लौट ही आया।”


सिया ने गुस्से से कहा—


“अर्जुन कातिल नहीं है!”


राठौर की मुस्कान और गहरी हो गई।


“सच?”


फिर उसने बंदूक सीधे अर्जुन की तरफ तान दी।


और धीरे से कहा—


“तो फिर बताओ…”


“उस रात यहाँ मरे हुए तीन लोग कौन थे?”


अर्जुन का दिल रुक सा गया।


क्योंकि अचानक…


उसे सब याद आ गया।


और वह सच्चाई…

बहुत खतरनाक थी।

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