
𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟒 — “Project Shadow”
कार तेज़ी से सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी।
बारिश अब भी हो रही थी।
कार के शीशे पर पानी की बूंदें लगातार गिर रही थीं।
अर्जुन चुप बैठा था।
उसका दिमाग पूरी तरह उलझ चुका था।
“यह सब क्या है?”
उसने आखिरकार सिया से पूछा।
“Project Shadow क्या है?”
सिया कुछ सेकंड तक चुप रही।
फिर उसने कार एक सुनसान जगह पर रोक दी।
चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था।
सिया ने धीरे से कहा—
“Project Shadow… एक सीक्रेट सरकारी मिशन था।”
“जिसका मकसद था—
शहर में हो रहे सीरियल मर्डर के पीछे के असली इंसान को पकड़ना।”
अर्जुन ने घबराकर पूछा—
“और तुम कह रही हो कि… वह कातिल मैं हूँ?”
सिया ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“अगर तुम कातिल होते… तो मैं तुम्हारी मदद नहीं कर रही होती।”
अर्जुन थोड़ा शांत हुआ।
“तो सच क्या है?”
सिया ने गहरी सांस ली।
“तीन महीने पहले…”
“शहर में पाँच लोगों की हत्या हुई थी।”
“हर मर्डर बिल्कुल एक जैसा था।”
“और हर जगह एक ही नाम लिखा मिलता था—”
SHADOW
अर्जुन ध्यान से सुन रहा था।
“सरकार को शक था कि यह कोई बहुत खतरनाक सीरियल किलर है।”
“इसलिए Project Shadow शुरू किया गया।”
“और उस मिशन में दो लोग चुने गए थे।”
अर्जुन ने पूछा—
“कौन?”
सिया ने उसकी तरफ देखा।
“मैं… और तुम।”
अर्जुन का दिल फिर से तेज धड़कने लगा।
“लेकिन… मुझे कुछ भी याद क्यों नहीं?”
सिया का चेहरा गंभीर हो गया।
“क्योंकि उस मिशन में कुछ बहुत गलत हो गया था।”
अर्जुन ने पूछा—
“क्या?”
सिया कुछ बोलने ही वाली थी कि अचानक—
दूर से पुलिस सायरन की आवाज आने लगी।
वह आवाज तेजी से पास आ रही थी।
सिया तुरंत चौकन्नी हो गई।
“उन्होंने हमें ट्रैक कर लिया।”
अर्जुन घबरा गया।
“अब क्या करें?”
सिया ने जल्दी से कार स्टार्ट की।
“अब हमें उस जगह जाना होगा…”
अर्जुन ने पूछा—
“कौन सी जगह?”
सिया ने गंभीर आवाज में कहा—
“वही जगह जहाँ तुम्हारी यादें खोई थीं।”
अर्जुन ने हैरानी से पूछा—
“कहाँ?”
सिया ने सड़क की तरफ देखते हुए कहा—
“पुराना वेयरहाउस नंबर 17।”
और उसी पल…
अर्जुन के दिमाग में एक और तेज झटका लगा।
अचानक उसे एक और तस्वीर दिखाई दी—
एक अंधेरा वेयरहाउस…
दीवारों पर खून…
और जमीन पर पड़े तीन लोग।
और उनके बीच…
खड़ा था अर्जुन।
उसके हाथ खून से भरे हुए थे।
अर्जुन ने डर से आँखें खोल दीं।
“सिया…”
“मैं उस जगह को जानता हूँ।”
सिया ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
अर्जुन की आवाज कांप रही थी।
“क्योंकि… शायद वहीं—
सबकी मौत हुई थी।”
कार अंधेरे हाईवे पर तेजी से आगे बढ़ रही थी।
और सच…
धीरे-धीरे सामने आने वाला था।