
𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟑 — “पहली याद”
अस्पताल की पार्किंग में हल्की बारिश हो रही थी।
अर्जुन मल्होत्रा तेजी से भाग रहा था।
उसका दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि उसे खुद उसकी आवाज सुनाई दे रही थी।
पीछे से पुलिस की आवाजें आ रही थीं।
“वह यहीं कहीं है!”
“पार्किंग चेक करो!”
अर्जुन जल्दी से एक खड़ी हुई कार के पीछे छिप गया।
उसकी सांस तेज चल रही थी।
“मैं… आखिर हूँ कौन?”
उसके दिमाग में बार-बार वही शब्द घूम रहे थे—
SERIAL MURDER SUSPECT
अचानक…
उसके सिर में तेज दर्द उठा।
“आह!”
उसकी आँखों के सामने अचानक कुछ तस्वीरें चमकने लगीं।
एक अंधेरा कमरा…
फर्श पर खून…
और जमीन पर पड़ा एक आदमी…
अर्जुन के हाथ में चाकू था।
“नहीं…!”
अर्जुन ने घबराकर आँखें खोल दीं।
उसका पूरा शरीर कांप रहा था।
“क्या… यह सच था?”
तभी उसके पीछे से एक आवाज आई—
“अगर तुम यहीं रुके रहे… तो पुलिस तुम्हें पकड़ लेगी।”
अर्जुन तुरंत पीछे मुड़ा।
उसके सामने एक लड़की खड़ी थी।
लगभग 25 साल की।
काले बाल…
और आँखों में अजीब सा आत्मविश्वास।
अर्जुन ने घबराकर पूछा—
“तुम… कौन हो?”
लड़की हल्का सा मुस्कुराई।
“मेरा नाम सिया है।”
“और अगर तुम जिंदा रहना चाहते हो…”
“तो मेरे साथ चलो।”
अर्जुन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे।
लेकिन तभी पार्किंग में पुलिस की टॉर्च की रोशनी घूमने लगी।
“वह यहाँ है!”
सिया ने जल्दी से अर्जुन का हाथ पकड़ा।
“चलो!”
दोनों तेजी से पार्किंग के पीछे की गली की तरफ दौड़ पड़े।
कुछ मिनट बाद…
वे एक सुनसान सड़क पर खड़ी कार तक पहुंचे।
सिया ने कार का दरवाज़ा खोला।
“बैठो।”
अर्जुन कार में बैठ गया।
कार तेजी से सड़क पर दौड़ने लगी।
कुछ देर तक दोनों चुप रहे।
फिर अर्जुन ने धीरे से पूछा—
“तुम मुझे कैसे जानती हो?”
सिया ने उसकी तरफ देखा।
और जो उसने कहा…
उससे अर्जुन की दुनिया हिल गई।
“क्योंकि…”
“तीन महीने पहले… हम दोनों एक साथ काम करते थे।”
अर्जुन चौंक गया।
“किस काम में?”
सिया की आवाज अचानक गंभीर हो गई।
“एक सीक्रेट मिशन में…”
“जिसका नाम था—
PROJECT SHADOW.”
अर्जुन का दिल फिर से तेज धड़कने लगा।
लेकिन असली झटका अभी बाकी था।
सिया ने धीरे से कहा—
“और उस मिशन में…”
“हम एक सीरियल किलर को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।”
अर्जुन ने पूछा—
“कौन?”
सिया की आँखें सीधे उसकी आँखों में थीं।
“तुम।”
कार के अंदर सन्नाटा छा गया।
और अर्जुन मल्होत्रा को पहली बार एहसास हुआ—
शायद…
वह खुद अपने ही अतीत का सबसे बड़ा रहस्य था।