
𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟐 — “शक की शुरुआत”
कमरे में सन्नाटा था।
डॉक्टर की आँखें फाइल पर जमी हुई थीं।
और अर्जुन मल्होत्रा बिस्तर पर बैठा उसे देख रहा था।
“क्या हुआ…?”
अर्जुन ने धीरे से पूछा।
डॉक्टर ने धीरे-धीरे फाइल बंद कर दी।
उसके चेहरे पर अब वही मुस्कान नहीं थी।
“मुझे अभी कुछ कॉल करने हैं…”
डॉक्टर ने जल्दी से कहा।
अर्जुन को यह अजीब लगा।
“किसे कॉल?”
लेकिन डॉक्टर ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह जल्दी से कमरे से बाहर निकल गया।
दरवाज़ा बंद होते ही कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया।
अर्जुन का दिल तेज धड़क रहा था।
उसके दिमाग में बार-बार वही शब्द गूंज रहे थे—
SERIAL MURDER SUSPECT
“नहीं…”
उसने धीरे से खुद से कहा।
“यह सच नहीं हो सकता…”
उसी समय कमरे के बाहर से हल्की आवाजें आने लगीं।
अर्जुन ने ध्यान से सुना।
डॉक्टर फोन पर बात कर रहा था।
“हाँ… मरीज जाग गया है।”
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर डॉक्टर ने धीरे से कहा—
“हाँ… वही आदमी।”
“अर्जुन मल्होत्रा।”
अर्जुन के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
डॉक्टर की आवाज फिर आई—
“पुलिस को तुरंत भेजिए।”
अर्जुन का दिल जोर से धड़कने लगा।
“पुलिस…?”
उसे अचानक दीवार पर लिखा संदेश याद आया—
“किसी पर भरोसा मत करना।”
उसने तुरंत कमरे के चारों तरफ देखा।
तभी उसकी नजर बेड के पास रखी टेबल पर गई।
वहाँ एक छोटा सा कागज रखा था।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा और कागज उठाया।
कागज पर सिर्फ तीन शब्द लिखे थे—
“भाग जाओ अभी।”
अर्जुन का दिल और तेज धड़कने लगा।
“यह किसने लिखा?”
तभी उसे बाहर से भारी कदमों की आवाज सुनाई दी।
कोई लोग कॉरिडोर में तेजी से आ रहे थे।
और फिर…
उसे साफ सुनाई दिया—
“पुलिस!”
अर्जुन की सांस रुक गई।
अगर पुलिस उसे पकड़ लेती…
तो शायद उसे कभी सच पता ही नहीं चलता।
तभी उसकी नजर कमरे की खिड़की पर गई।
तीसरी मंजिल।
नीचे अस्पताल की पार्किंग थी।
उसने एक पल के लिए सोचा…
फिर अचानक बिस्तर से उठ गया।
कॉरिडोर में कदमों की आवाज और तेज हो गई।
दरवाज़े का हैंडल घूमने लगा।
और उसी पल…
अर्जुन खिड़की की तरफ दौड़ पड़ा।
दरवाज़ा खुला।
लेकिन तब तक…
कमरा खाली था।
खिड़की खुली थी।
और अर्जुन मल्होत्रा…
गायब हो चुका था।