𝐅𝐈𝐍𝐀𝐋 𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟏𝟐 — “आखिरी सच”
BOOOOM!!!
भयानक विस्फोट ने पूरे इलाके को हिला दिया।
वेयरहाउस 17 के नीचे बना सीक्रेट बेस आग की लपटों में घिर चुका था।
चारों तरफ धुआँ और मलबा फैल गया था।
कुछ देर तक सब कुछ शांत रहा।
फिर अचानक…
मलबे के बीच हलचल हुई।
एक हाथ बाहर निकला।
वह अर्जुन का था।
अर्जुन धीरे-धीरे मलबे से बाहर आया।
उसके चेहरे पर चोटें थीं लेकिन वह जिंदा था।
उसने तुरंत इधर-उधर देखा।
“सिया!”
कुछ सेकंड बाद पास के मलबे से सिया भी बाहर निकली।
अर्जुन ने राहत की सांस ली।
“तुम ठीक हो?”
सिया ने सिर हिलाया।
“हां… शायद।”
दोनों ने पीछे मुड़कर देखा।
जहाँ कभी सीक्रेट बेस था…
अब वहाँ सिर्फ जलता हुआ मलबा था।
सिया धीरे से बोली—
“तो… सब खत्म हो गया?”
अर्जुन कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला—
“शायद।”
लेकिन उसी पल…
अर्जुन की जेब में रखा फोन अचानक बज उठा।
दोनों चौंक गए।
अर्जुन ने फोन निकाला।
स्क्रीन पर एक अनजान नंबर था।
उसने कॉल उठाई।
फोन के दूसरी तरफ से एक जानी-पहचानी आवाज आई।
डॉ. करण।
सिया का चेहरा सफेद पड़ गया।
“यह कैसे हो सकता है…?”
फोन से आवाज आई—
“तुम सच में सोचते थे कि मुझे इतनी आसानी से खत्म कर दोगे?”
अर्जुन गुस्से से बोला—
“तुम कहाँ हो?”
डॉ. करण हँसा।
“बहुत दूर… और बहुत सुरक्षित।”
फिर उसने कहा—
“Project Shadow एक बेस से नहीं चलता।”
“यह एक नेटवर्क है।”
“और अब… तुम उसका हिस्सा हो।”
अर्जुन चौंक गया।
“क्या मतलब?”
फोन से आवाज आई—
“तुम्हारी Neural Chip भले ही बंद हो गई हो…”
“लेकिन तुम्हारे दिमाग में जो ट्रेनिंग है…”
“वह हमेशा रहेगी।”
“तुम अब दुनिया के सबसे खतरनाक एजेंट हो।”
अर्जुन की मुट्ठियाँ कस गईं।
“मैं तुम्हें ढूंढ लूंगा।”
डॉ. करण शांत आवाज में बोला—
“शायद…”
“लेकिन तब तक… खेल जारी रहेगा।”
कॉल कट हो गया।
चारों तरफ फिर से सन्नाटा छा गया।
सिया ने धीरे से पूछा—
“अब क्या?”
अर्जुन ने दूर जलते हुए मलबे की तरफ देखा।
फिर उसकी आँखों में दृढ़ता आ गई।
“अब… हम Project Shadow को हमेशा के लिए खत्म करेंगे।”
और उसी पल…
कहानी खत्म नहीं हुई।
बल्कि एक नई लड़ाई शुरू हो चुकी थी।