𝐏𝐀𝐑𝐓 𝟗 — “मास्टरमाइंड”
सीक्रेट बेस की लाइटें अचानक तेज हो गईं।
कमरे के बीच में लगी बड़ी स्क्रीन चमकने लगी।
अर्जुन और सिया दोनों स्क्रीन को घूर रहे थे।
स्क्रीन पर बैठे आदमी का चेहरा अभी भी अंधेरे में छिपा हुआ था।
वह धीरे से बोला—
“Welcome back, Agent Shadow.”
सिया गुस्से से बोली—
“तुम कौन हो?”
स्क्रीन पर बैठा आदमी हल्का सा हंसा।
“मैं वह हूँ… जिसने यह पूरा खेल बनाया है।”
अर्जुन की मुट्ठियाँ कस गईं।
“Project Shadow का मास्टरमाइंड…”
“तुम हो।”
स्क्रीन पर बैठे आदमी ने धीरे-धीरे अपना चेहरा रोशनी में लाया।
और अगले ही पल…
अर्जुन की आँखें चौड़ी हो गईं।
“नहीं…!”
सिया ने हैरानी से पूछा—
“तुम उसे जानते हो?”
अर्जुन की आवाज काँप रही थी।
“यह… मेरे गुरु हैं।”
स्क्रीन पर दिख रहा आदमी था—
डॉ. करण मल्होत्रा।
वह वही वैज्ञानिक था जिसने कभी अर्जुन को ट्रेन किया था।
डॉ. करण मुस्कुराया।
“तुम हमेशा से मेरे सबसे अच्छे एजेंट थे।”
“लेकिन तुमने मेरा मिशन छोड़ दिया।”
सिया गुस्से से बोली—
“मिशन?”
“लोगों को किलर बनाना तुम्हारा मिशन है?”
डॉ. करण शांत आवाज में बोला—
“यह दुनिया कमजोर लोगों के लिए नहीं बनी।”
“मैं एक ऐसी सेना बना रहा हूँ… जो दुनिया को कंट्रोल कर सके।”
अर्जुन चिल्लाया—
“तुम पागल हो!”
डॉ. करण की मुस्कान गायब हो गई।
“नहीं अर्जुन…”
“मैं भविष्य बना रहा हूँ।”
तभी अचानक कमरे में अलार्म बजने लगा।
लाल लाइटें चमकने लगीं।
सिया ने घबराकर पूछा—
“यह क्या हो रहा है?”
डॉ. करण ने कहा—
“तुम बहुत अंदर आ चुके हो।”
“अब तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ा जा सकता।”
अचानक कमरे के चारों तरफ दीवारें खुलने लगीं।
और अंदर से कई नकाब पहने लोग बाहर आने लगे।
उनके हाथों में बंदूकें थीं।
सिया ने धीरे से कहा—
“Shadow एजेंट…”
अर्जुन समझ गया।
यह Project Shadow के असली सैनिक थे।
डॉ. करण स्क्रीन से बोला—
“Agent Shadow…”
“देखते हैं तुम अपने ही जैसे लोगों से कैसे लड़ते हो।”
अर्जुन ने गहरी सांस ली।
फिर सिया की तरफ देखा।
“तैयार हो?”
सिया ने बंदूक कसकर पकड़ी।
“हमेशा।”
और अगले ही पल…
पूरे बेस में गोलियों की आवाज गूंज उठी।