भाग 5 — खामोश मोहब्बत (अंतिम भाग)
अध्याय 16 – अधूरा समय
सिया की बीमारी का सच जानने के बाद अर्जुन की जिंदगी बदल गई।
अब उसे हर पल की कीमत समझ आने लगी थी।
सिया के पास शायद बहुत कम समय था।
लेकिन अर्जुन ने फैसला कर लिया था कि वह हर पल को खूबसूरत बनाएगा।
वे दोनों अक्सर साथ घूमने लगे।
कभी पार्क में बैठकर बातें करते,
कभी शहर की सड़कों पर लंबी सैर करते,
और कभी बस खामोशी से एक-दूसरे को देखते रहते।
सिया अक्सर मुस्कुराती थी, लेकिन उसकी आँखों में कहीं न कहीं दर्द छुपा रहता था।
अध्याय 17 – आखिरी ख्वाहिश
एक शाम दोनों उसी नदी के किनारे बैठे थे जहाँ वे पहले भी कई बार मिल चुके थे।
सूरज धीरे-धीरे डूब रहा था।
सिया ने अचानक कहा —
“अर्जुन… अगर मैं तुमसे एक आखिरी ख्वाहिश मांगूँ तो क्या तुम उसे पूरा करोगे?”
अर्जुन ने बिना सोचे जवाब दिया —
“तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करूंगा।”
सिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा —
“मैं चाहती हूँ कि जब मैं इस दुनिया से जाऊँ… तो तुम रोना मत।”
अर्जुन की आँखें भर आईं।
“यह ख्वाहिश पूरी करना सबसे मुश्किल है।”
अध्याय 18 – विदाई का दिन
कुछ हफ्तों बाद सिया की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई।
उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
अर्जुन लगातार उसके साथ था।
एक रात सिया ने धीरे से अर्जुन का हाथ पकड़ा।
उसकी आवाज बहुत कमजोर हो चुकी थी।
“अर्जुन…”
अर्जुन झुककर बोला —
“हाँ सिया…”
सिया ने मुस्कुराने की कोशिश की।
“तुमसे मिलना मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी थी।”
अर्जुन की आँखों से आँसू बहने लगे।
अध्याय 19 – खामोश अलविदा
अगली सुबह अस्पताल के कमरे में गहरी खामोशी थी।
मशीनों की हल्की आवाज आ रही थी।
सिया ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं।
उसने आखिरी बार अर्जुन की तरफ देखा।
उसकी आँखों में सुकून था।
उसने बहुत धीरे से कहा —
“अर्जुन… खुश रहना।”
और फिर…
उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।
अर्जुन वहीं खड़ा रह गया।
उसका दिल जैसे टूटकर बिखर गया था।
अंतिम अध्याय – यादों में जिंदा प्यार
कुछ महीनों बाद…
अर्जुन फिर उसी कैफे में बैठा था जहाँ उसकी और सिया की पहली मुलाकात हुई थी।
उसके सामने वही टेबल थी… वही कुर्सी…
लेकिन सिया अब वहाँ नहीं थी।
अर्जुन ने धीरे से अपनी डायरी खोली।
उसने उसमें एक कहानी लिखना शुरू किया।
उस कहानी का नाम था —
“खामोश मोहब्बत”
क्योंकि कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो खत्म नहीं होते…
वे बस यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं।