भाग 3 — दिल का सच

अध्याय 8 – टूटता हुआ पल
सिया की बात सुनकर अर्जुन कुछ पल तक चुप रह गया।
उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या कहे।
कैफे में चारों तरफ लोगों की हल्की आवाजें आ रही थीं, लेकिन अर्जुन को सब कुछ जैसे सुनाई देना बंद हो गया था।
उसने धीरे से पूछा —
“तुम… जा रही हो?”
सिया ने हल्का सा सिर झुका लिया।
“हाँ… बहुत जल्द।”
अर्जुन की आँखों में उदासी आ गई।
“लेकिन क्यों?”
सिया ने कुछ पल चुप रहकर जवाब दिया —
“कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे रास्तों पर ले जाती है जहाँ हम रुक नहीं सकते।”
अध्याय 9 – अनकहा दर्द
अर्जुन को सिया की बातों में कुछ छुपा हुआ महसूस हो रहा था।
उसे लग रहा था कि सिया उससे पूरी सच्चाई नहीं बता रही।
उसने धीरे से कहा —
“सिया… अगर कोई परेशानी है तो मुझे बता सकती हो।”
सिया ने मुस्कुराने की कोशिश की।
“कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें बताने से ज्यादा छुपाना आसान होता है।”
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा।
उसे पहली बार सिया की आँखों में उदासी दिखाई दी।
अध्याय 10 – यादगार दिन
सिया ने अचानक माहौल बदलने की कोशिश की।
“अर्जुन… अगर मैं सच में चली गई तो क्या तुम मुझे याद रखोगे?”
अर्जुन हल्का सा मुस्कुराया।
“कुछ लोग याद रखने के लिए नहीं… भूल न पाने के लिए मिलते हैं।”
सिया की आँखों में चमक आ गई।
उसने कहा —
“तो चलो… आज का दिन यादगार बनाते हैं।”
उस दिन दोनों पूरे शहर में घूमे।
कभी पार्क में बैठे,
कभी सड़क किनारे चाय पी,
और कभी बिना वजह हंसते रहे।
लेकिन दोनों जानते थे कि यह दिन शायद उनके साथ बिताया हुआ आखिरी दिन हो सकता है।
अध्याय 11 – छुपा हुआ सच
शाम को जब वे दोनों नदी के किनारे बैठे थे तो सिया अचानक चुप हो गई।
अर्जुन ने पूछा —
“क्या हुआ?”
सिया ने धीरे से कहा —
“अगर मैं तुम्हें एक सच बताऊँ… तो क्या तुम मुझसे नाराज़ हो जाओगे?”
अर्जुन ने तुरंत कहा —
“नहीं।”
सिया ने गहरी सांस ली।
“अर्जुन… मैं इस शहर को इसलिए छोड़ रही हूँ क्योंकि…”
वह अचानक रुक गई।
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
भाग 3 का अंत (सबसे बड़ा ट्विस्ट)
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद सिया ने धीरे से कहा —
“क्योंकि मेरी शादी तय हो चुकी है।”
यह सुनकर अर्जुन का दिल जैसे एक पल के लिए रुक गया।
उसके पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे।
सिया ने आँसू पोंछते हुए कहा —
“मेरे परिवार ने यह फैसला लिया है… और मैं उन्हें मना नहीं कर सकती।”
अर्जुन चुपचाप सामने बहती नदी को देखता रहा।
उसके दिल में हजारों भावनाएँ थीं।
लेकिन उसने बस इतना कहा —
“अगर यही तुम्हारी खुशी है… तो मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं।”
सिया की आँखों से आँसू बहने लगे।
क्योंकि वह जानती थी…
कि यह सच पूरी कहानी नहीं था।
और उसका असली राज अभी भी अर्जुन से छुपा हुआ था।