भाग 2 — सिया का रहस्य

अध्याय 4 – फिर से मुलाकात
अगले दिन अर्जुन उसी कैफे में फिर आया।
वह खुद भी नहीं समझ पा रहा था कि वह यहाँ क्यों आया है।
शायद उसे उम्मीद थी कि सिया फिर से मिल जाएगी।
कैफे में वही हल्की सी संगीत की धुन चल रही थी।
अर्जुन अपनी पसंदीदा सीट पर बैठ गया और किताब खोल ली।
लेकिन उसका ध्यान किताब में नहीं था।
उसकी नजर बार-बार दरवाजे की तरफ जा रही थी।
कुछ देर बाद…
कैफे का दरवाजा खुला।
अर्जुन ने सिर उठाकर देखा।
और वह मुस्कुरा दिया।
सिया फिर से वहाँ खड़ी थी।
अध्याय 5 – अजीब सी दोस्ती
सिया ने अर्जुन को देखते ही हाथ हिलाया और उसके पास आकर बैठ गई।
“लगता है आप सच में किताबों से बहुत प्यार करते हैं।”
अर्जुन हल्का सा मुस्कुराया।
“और आपको लोगों से बात करना बहुत पसंद है।”
सिया हंस पड़ी।
“शायद… क्योंकि हर इंसान की एक कहानी होती है।”
धीरे-धीरे दोनों के बीच बातें बढ़ने लगीं।
कभी वे घंटों कैफे में बैठकर बातें करते,
कभी बारिश में टहलते,
और कभी शहर की सड़कों पर लंबी सैर करते।
कुछ ही दिनों में उनकी अजीब सी दोस्ती हो गई।
अर्जुन को अब सिया के साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा था।
अध्याय 6 – अधूरी सच्चाई
एक शाम दोनों पार्क में बैठे थे।
हवा हल्की-हल्की चल रही थी।
अर्जुन ने अचानक पूछा —
“सिया… तुम हमेशा इतनी खुश कैसे रहती हो?”
सिया कुछ पल के लिए चुप हो गई।
उसने आसमान की तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराई।
“क्योंकि जिंदगी बहुत छोटी है।”
अर्जुन ने हैरानी से पूछा —
“मतलब?”
सिया ने धीरे से कहा —
“अगर हमें पता हो कि हमारे पास समय कम है… तो हम हर पल को ज्यादा खूबसूरती से जीते हैं।”
अर्जुन को उसकी बात थोड़ी अजीब लगी।
लेकिन उसने ज्यादा सवाल नहीं किया।
अध्याय 7 – अर्जुन की भावना
दिन बीतते गए।
अर्जुन को धीरे-धीरे महसूस होने लगा कि वह सिया के बिना अब अधूरा महसूस करता है।
उसकी मुस्कान, उसकी बातें… सब कुछ अर्जुन के दिल में बस गया था।
एक दिन उसने तय किया कि वह सिया को अपने दिल की बात बताएगा।
उसने सिया को उसी कैफे में बुलाया जहाँ वे पहली बार मिले थे।
अर्जुन थोड़ा घबराया हुआ था।
भाग 2 का अंत (बड़ा रहस्य)
जब सिया कैफे में आई तो अर्जुन ने गहरी सांस ली और कहा —
“सिया… मुझे लगता है कि मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ।”
सिया अचानक चुप हो गई।
उसके चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।
कुछ पल बाद उसने धीरे से कहा —
“अर्जुन… काश तुम यह बात पहले कहते।”
अर्जुन हैरान हो गया।
“क्यों?”
सिया की आँखें थोड़ी नम हो गईं।
उसने धीमी आवाज़ में कहा —
“क्योंकि… मैं जल्द ही इस शहर को छोड़कर जा रही हूँ।”
अर्जुन चौंक गया।
“कहाँ?”
सिया ने जवाब दिया —
“बहुत दूर… शायद हमेशा के लिए।”
और यही वह पल था जब अर्जुन को महसूस हुआ कि…
उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी शायद शुरू होने से पहले ही खत्म होने वाली है।