कमरा नंबर 307 – Best Suspense Thriller Novel in Hindi

PART 3: आईने में खड़ा सच

आर्यन की साँसें तेज हो चुकी थीं।

उसकी आँखें आईने पर जमी हुई थीं।

आईने में जो दिख रहा था… वो नामुमकिन था।

वो खुद था।

लेकिन वैसा नहीं जैसा वो अभी था।

आईने में खड़ा आर्यन… खून से लथपथ था।

उसका चेहरा फटा हुआ था।

उसकी आँखें काली थीं।

और वो… मुस्कुरा रहा था।


आर्यन ने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।

कमरा खाली था।

कोई नहीं।

फिर उसने वापस आईने में देखा।

वो अब भी वहीं था।

आईने वाला आर्यन।

उसने अपना हाथ उठाया।

लेकिन असली आर्यन ने हाथ नहीं उठाया था।


आर्यन का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

उसने डरते हुए कहा—

“तुम… कौन हो?”


आईने वाला आर्यन मुस्कुराया।

और उसके होंठ हिले।

लेकिन आवाज कमरे में नहीं…

सीधे आर्यन के दिमाग में गूंजी।

“मैं… तुम हूँ।”


कमरे की लाइट अचानक झपकने लगी।

ON… OFF… ON… OFF…

और फिर…

पूरी तरह बंद हो गई।


अब कमरे में सिर्फ अंधेरा था।

और आर्यन की साँसों की आवाज।


अचानक…

उसके पीछे किसी के चलने की आवाज आई।

टक…

टक…

टक…


कोई उसके पीछे था।

लेकिन वो हिम्मत नहीं कर पा रहा था पीछे मुड़ने की।


फिर…

एक ठंडा हाथ उसके कंधे पर पड़ा।


आर्यन का पूरा शरीर जम गया।

उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।

कोई नहीं।


लेकिन…

आईने में…

वो चीज अब उसके बिल्कुल पीछे खड़ी थी।


वो वही था।

खून से भरा हुआ आर्यन।


उसने धीरे से आर्यन के कान के पास आकर कहा—

“तुम यहाँ पहले भी आ चुके हो…”


आर्यन की आँखें फैल गईं।

“नहीं… ये झूठ है…”


आईने वाला आर्यन मुस्कुराया।

“17 अक्टूबर… रात 2:17…”

“याद है?”


अचानक…

आर्यन के दिमाग में images flash होने लगीं।


वो इसी कमरे में खड़ा था।

बारिश हो रही थी।

वो चिल्ला रहा था।

दरवाजा पीट रहा था।

“मुझे बाहर जाने दो!”


और फिर…

कोई उसके पीछे खड़ा था।


एक परछाईं।


उसने आर्यन को पकड़ा।

और…

उसका गला दबा दिया।


आर्यन ने चीखने की कोशिश की।

लेकिन आवाज नहीं निकली।


और फिर…

सब अंधेरा हो गया।


आर्यन अचानक जमीन पर गिर गया।

वो जोर-जोर से साँस ले रहा था।

“ये… ये सपना है…”

“ये सच नहीं है…”


लेकिन तभी…

डायरी अपने आप खुली।


उसमें नई लाइन लिखी हुई थी।


“Death Time Remaining: 2 hours 11 minutes”


आर्यन के हाथ कांपने लगे।


तभी…

दरवाजे पर किसी ने धीरे से knock किया।


टक…


टक…


टक…


और बाहर से वही बूढ़े आदमी की आवाज आई—


“दरवाजा मत खोलना…”


“क्योंकि… इस बार वो तुम्हें लेने आया है…”


कमरे की लाइट अचानक ON हो गई।


और आईने में…

अब आर्यन अकेला नहीं था।


उसके पीछे…

कोई और खड़ा था।


जिसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।


PART 4 में पता चलेगा:

• वो परछाईं कौन है
• डायरी में आर्यन का नाम कैसे आया
• और सबसे बड़ा सच — क्या आर्यन पहले ही मर चुका है?

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