
PART 1: बंद दरवाजा
भोपाल शहर।
रात के 11:46 बजे।
बारिश लगातार हो रही थी।
सड़क पर सिर्फ एक आदमी चल रहा था—आर्यन।
उसके हाथ में एक पुराना कागज था।
उस पर लिखा था—
Hotel Shivratna
Room No. 307
आर्यन ने होटल के सामने खड़े होकर ऊपर देखा।
होटल पुराना था।
जैसे सालों से किसी ने उसे छुआ तक नहीं।
कुछ खिड़कियाँ टूटी हुई थीं।
कुछ दरवाजे आधे खुले थे।
और सबसे ऊपर…
तीसरी मंजिल पर एक खिड़की खुली थी।
Room 307।
आर्यन धीरे-धीरे अंदर गया।
Reception पर एक बूढ़ा आदमी बैठा था।
उसकी आँखें अजीब थीं।
जैसे वो आर्यन का इंतजार कर रहा हो।
बूढ़ा आदमी बोला—
“तुम आ गए…”
आर्यन रुक गया।
“आप मुझे जानते हैं?”
बूढ़ा मुस्कुराया।
“Room 307 के लिए आए हो न?”
आर्यन के हाथ से कागज गिर गया।
“आपको कैसे पता?”
बूढ़ा धीरे से बोला—
“क्योंकि… Room 307 हर 10 साल में किसी को बुलाता है।”
आर्यन के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
उसने पूछा—
“उस कमरे में क्या है?”
बूढ़ा कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला—
“मौत।”
कुछ सेकंड तक सन्नाटा।
फिर बूढ़ा चाबी निकालकर आर्यन को देने लगा।
लेकिन अचानक…
उसका हाथ रुक गया।
उसने आर्यन की आँखों में देखते हुए पूछा—
“तुम्हें सच में अंदर जाना है?”
आर्यन ने बिना सोचे कहा—
“हाँ।”
बूढ़ा मुस्कुराया।
“फिर याद रखना…”
“अंदर जाने के बाद… वापस आने वाले बहुत कम होते हैं।”