
PART – 4
महल की दीवारें कांप रही थीं…
जैसे समय खुद इस फैसले का इंतज़ार कर रहा हो।
आर्यन… एक तरफ ‘शून्य’ (उसका अंधेरा रूप)…
दूसरी तरफ वो लड़की… जिसकी सच्चाई अब सामने आ चुकी थी।
“तो… क्या सोच लिया?” — शून्य ने मुस्कुराते हुए पूछा।
आर्यन ने उसकी आंखों में देखा—
वही चेहरा… वही आवाज़… लेकिन अंदर सिर्फ अंधेरा।
“अगर मैं तुम्हारे साथ जुड़ जाऊं…” — आर्यन ने धीरे से कहा —
“तो क्या होगा?”
शून्य की मुस्कान और गहरी हो गई—
“तो हम… सब कुछ बन जाएंगे…”
“ना कोई दुनिया बचेगी… ना कोई नियम…”
“सिर्फ हम… और अनंत शक्ति…”
आर्यन ने एक पल के लिए आंखें बंद कीं…
उसके दिमाग में सब कुछ घूमने लगा—
- उसकी असली दुनिया…
- उसका कमरा… वो दरवाज़ा…
- और ये लड़की… जिसने उसे यहाँ लाया…
फिर उसने आंखें खोलीं…
“और अगर मैं दरवाज़ा बंद कर दूं?”
शून्य कुछ सेकंड चुप रहा… फिर बोला—
“तो मैं… खत्म हो जाऊंगा…”
“और तुम भी…”
लड़की चिल्लाई—
“मत सुनो इसकी बात! यही सच है!”
“अगर दरवाज़ा बंद हुआ… तो ये सब खत्म हो जाएगा…”
आर्यन ने उसकी तरफ देखा—
“और तुम?”
लड़की कुछ पल चुप रही…
फिर धीरे से बोली—
“मैं… भी…”
आर्यन के दिल में जैसे कुछ टूट गया।
“तो मतलब… जो भी रास्ता चुनूं…”
“मैं सब कुछ खो दूंगा…”
शून्य हंसा—
“नहीं…”
“मेरे साथ आओ… तो तुम सब कुछ पाओगे…”
महल की छत से अजीब सी काली ऊर्जा नीचे गिरने लगी…
आर्यन के हाथ कांप रहे थे…
लेकिन इस बार… उसके चेहरे पर डर नहीं था।
बस… एक गहरी शांति थी।
वो धीरे-धीरे आगे बढ़ा…
सीधे… शून्य की तरफ।
लड़की की आंखें फैल गईं—
“नहीं… आर्यन… ऐसा मत करो…”
शून्य मुस्कुराया—
“सही फैसला…”
आर्यन उसके बिल्कुल सामने आकर रुक गया।
कुछ सेकंड… दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर…
आर्यन ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
शून्य ने भी अपना हाथ आगे किया…
जैसे ही दोनों के हाथ मिलने वाले थे—
अचानक—
आर्यन ने अपना हाथ घुमाया…
और शून्य के सीने में जोर से धक्का दे दिया!
“ये क्या—?” — शून्य चिल्लाया।
उसी पल… आर्यन दौड़कर महल के अंदर बने उस बड़े दरवाज़े की तरफ भागा।
वो असली दरवाज़ा… जो दोनों दुनियाओं को जोड़ता था।
लड़की समझ गई—
“तुम… दरवाज़ा बंद करने जा रहे हो…”
आर्यन ने पीछे मुड़कर उसे देखा—
उसकी आंखों में एक हल्की मुस्कान थी।
“कभी-कभी… सही रास्ता वही होता है… जिसमें सब कुछ खोना पड़े…”
“लेकिन… कम से कम… दुनिया बच जाती है…”
लड़की की आंखों से आंसू बहने लगे—
“नहीं… मैं तुम्हें खो नहीं सकती…”
आर्यन रुका नहीं…
वो दरवाज़े तक पहुंच गया।
पीछे से… शून्य गुस्से में चिल्लाया—
“तुम ये नहीं कर सकते!!!”
पूरी दुनिया कांपने लगी…
आर्यन ने दरवाज़े के हैंडल को पकड़ा…
और आखिरी बार पीछे देखा—
लड़की… रो रही थी।
शून्य… उसकी तरफ बढ़ रहा था।
आर्यन ने आंखें बंद कीं…
“शायद… यही अंत है…”
और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया।
धड़ाम!!!
एक तेज रोशनी फैली…
और अगले ही पल—
सब कुछ गायब हो गया।
ना महल…
ना दुनिया…
ना शून्य…
बस… एक सन्नाटा।