
भाग 5 — यादों का प्यार (अंतिम भाग)
अध्याय 20 – नई सुबह
ऑपरेशन के बाद अस्पताल का कमरा शांत था।
मीरा बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी आँखें धीरे-धीरे खुल रही थीं।
डॉक्टर और नर्स उसके आसपास खड़े थे।
कुछ पल बाद मीरा ने धीरे से पूछा —
“मैं… कहाँ हूँ?”
डॉक्टर ने मुस्कुराकर कहा —
“तुम अस्पताल में हो। तुम्हारा ऑपरेशन हुआ है।”
मीरा ने सिर हल्का सा हिलाया।
लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी उलझन थी।
उसे सब कुछ समझ नहीं आ रहा था।
अध्याय 21 – भूली हुई पहचान
कुछ देर बाद आरव को कमरे में आने की अनुमति मिली।
उसका दिल बहुत तेज धड़क रहा था।
वह धीरे-धीरे कमरे में आया।
उसने मीरा को देखा।
वह ठीक थी… जिंदा थी।
लेकिन असली सवाल अभी बाकी था।
आरव धीरे से उसके पास गया।
“मीरा…”
मीरा ने उसकी तरफ देखा।
कुछ सेकंड तक वह बस उसे देखती रही।
फिर उसने धीरे से पूछा —
“आप… कौन हैं?”
यह सुनकर आरव के दिल पर जैसे किसी ने भारी पत्थर रख दिया।
उसकी आँखें भर आईं।
लेकिन उसने खुद को संभालते हुए मुस्कुराने की कोशिश की।
“मैं… तुम्हारा दोस्त हूँ।”
अध्याय 22 – यादों की कोशिश
अगले कई दिनों तक आरव रोज अस्पताल आता रहा।
वह मीरा को उनकी पुरानी बातें याद दिलाने की कोशिश करता।
कभी कॉलेज की तस्वीरें दिखाता,
कभी कैंटीन की बातें करता,
कभी उनकी पहली मुलाकात की कहानी सुनाता।
लेकिन मीरा को कुछ भी याद नहीं आ रहा था।
वह बस चुपचाप सुनती रहती।
और हर बार वही सवाल पूछती —
“क्या हम सच में इतने अच्छे दोस्त थे?”
आरव बस मुस्कुरा देता।
“हाँ… बहुत अच्छे।”
अध्याय 23 – अधूरा प्यार
कुछ हफ्तों बाद मीरा अस्पताल से घर आ गई।
वह धीरे-धीरे अपनी नई जिंदगी शुरू कर रही थी।
लेकिन आरव के लिए सब कुछ बदल चुका था।
वह रोज मीरा से मिलने आता था।
लेकिन अब वह पहले जैसा नहीं था।
मीरा उसे सिर्फ एक दोस्त समझती थी।
उसे यह भी नहीं पता था कि आरव उससे कितना प्यार करता है।
एक दिन मीरा ने अचानक पूछा —
“आरव… तुम मेरे लिए इतना सब क्यों करते हो?”
आरव कुछ पल चुप रहा।
फिर मुस्कुराकर बोला —
“क्योंकि दोस्ती में इतना तो बनता है।”
उसने अपने दिल का सच छुपा लिया।
अध्याय 24 – एक चमत्कार
एक शाम आरव और मीरा कॉलेज के उसी झील के पास बैठे थे।
जहाँ कभी उनकी जिंदगी बदल गई थी।
सूरज फिर से डूब रहा था।
हवा धीरे-धीरे चल रही थी।
मीरा अचानक चुप हो गई।
वह झील को देख रही थी।
फिर उसने धीरे से कहा —
“अजीब बात है…”
आरव ने पूछा —
“क्या?”
मीरा ने उसकी तरफ देखा और कहा —
“मुझे नहीं पता क्यों… लेकिन जब मैं तुम्हारे साथ होती हूँ तो दिल बहुत शांत महसूस करता है।”
आरव मुस्कुरा दिया।
लेकिन उसकी आँखों में हल्की नमी थी।
अंतिम अध्याय – यादों से भी मजबूत प्यार
कुछ देर बाद मीरा ने धीरे से कहा —
“मुझे लगता है कि हमारी कहानी पहले भी कहीं शुरू हुई थी।”
आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा —
“शायद…”
मीरा ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा —
“क्या हम फिर से दोस्त बन सकते हैं?”
आरव ने धीरे से कहा —
“दोस्ती तो पहले से ही है।”
दोनों झील के किनारे बैठे सूरज को डूबते हुए देख रहे थे।
मीरा को भले ही अपनी पुरानी यादें याद नहीं थीं…
लेकिन उसके दिल को फिर भी आरव की तरफ खिंचाव महसूस हो रहा था।
कभी-कभी प्यार यादों से नहीं…
दिल से जुड़ा होता है।
और शायद…
उनकी प्रेम कहानी फिर से शुरू होने वाली थी।