भाग 3 — प्यार की परीक्षा

अध्याय 10 – अस्पताल की रात
मीरा अचानक जमीन पर गिर गई।
आरव के होश उड़ गए।
“मीरा! मीरा… आँखें खोलो!”
लेकिन मीरा बेहोश थी।
आरव ने तुरंत उसे संभाला और जल्दी-जल्दी अस्पताल की ओर निकल पड़ा।
उसका दिल बहुत तेज धड़क रहा था।
उसके दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी —
“मीरा को कुछ नहीं होना चाहिए।”
कुछ ही देर में वे अस्पताल पहुँच गए।
डॉक्टरों ने तुरंत मीरा को इमरजेंसी वार्ड में ले लिया।
आरव बाहर खड़ा था।
उसके हाथ कांप रहे थे।
और उसकी आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।
अध्याय 11 – डर और इंतजार
अस्पताल की वह रात आरव की जिंदगी की सबसे लंबी रात बन गई।
वह लगातार इमरजेंसी रूम के बाहर बैठा था।
घड़ी की सुइयाँ धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं।
हर मिनट उसे एक घंटे जैसा लग रहा था।
कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आए।
आरव तुरंत उनके पास गया।
“डॉक्टर… मीरा कैसी है?”
डॉक्टर ने गंभीर आवाज़ में कहा —
“उसे ब्रेन ट्यूमर है… और आज उसका दर्द काफी बढ़ गया था।”
“अभी वह खतरे से बाहर है, लेकिन उसे आराम की बहुत जरूरत है।”
आरव ने राहत की सांस ली।
लेकिन उसके दिल में एक नई चिंता पैदा हो गई।
अध्याय 12 – सच्चे प्यार का फैसला
अगले दिन जब मीरा को होश आया तो उसने देखा कि आरव उसके पास बैठा हुआ था।
उसकी आँखों में रात भर की थकान साफ दिखाई दे रही थी।
मीरा ने धीरे से कहा —
“आरव… तुम यहाँ?”
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“हाँ… और कहीं जाता भी कहाँ?”
मीरा ने उदास होकर कहा —
“मैंने तुम्हें सब सच इसलिए बताया था ताकि तुम मुझसे दूर हो जाओ।”
“लेकिन तुम फिर भी यहीं हो…”
आरव ने शांत आवाज़ में कहा —
“क्योंकि मैं तुमसे दूर जाना नहीं चाहता।”
मीरा की आँखें भर आईं।
“आरव… मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है।”
“मैं नहीं चाहती कि तुम मेरे साथ अपना भविष्य खराब करो।”
आरव ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और कहा —
“भविष्य का फैसला डर से नहीं, दिल से किया जाता है।”
अध्याय 13 – एक नई उम्मीद
कुछ दिनों बाद मीरा अस्पताल से घर आ गई।
आरव लगभग हर दिन उससे मिलने आता था।
कभी किताबें लाता,
कभी चॉकलेट,
और कभी बस उसके साथ बैठकर बातें करता।
धीरे-धीरे मीरा की जिंदगी में फिर से मुस्कान लौटने लगी।
लेकिन उसके दिल में अभी भी एक डर था।
वह डर था —
कहीं उसकी वजह से आरव को दर्द न सहना पड़े।
अध्याय 14 – एक नया सपना
एक दिन आरव ने मीरा से पूछा —
“तुम्हारा सबसे बड़ा सपना क्या है?”
मीरा ने मुस्कुराकर कहा —
“एक दिन मैं अपना खुद का उपन्यास लिखना चाहती हूँ।”
आरव ने तुरंत कहा —
“तो लिखो।”
मीरा ने उदास होकर कहा —
“मुझे नहीं पता मेरे पास कितना समय है…”
आरव ने उसकी बात बीच में ही रोक दी।
“समय कितना है यह मत सोचो… बस इतना सोचो कि अभी समय है।”
उस दिन मीरा ने फिर से लिखना शुरू किया।
भाग 3 का अंत (नया ट्विस्ट)
कुछ हफ्ते बाद एक दिन डॉक्टर ने मीरा को अस्पताल बुलाया।
जाँच के बाद डॉक्टर ने कहा —
“मीरा… हमें तुम्हारे ट्यूमर का ऑपरेशन करना पड़ेगा।”
मीरा डर गई।
“क्या यह बहुत खतरनाक है?”
डॉक्टर ने गंभीर होकर कहा —
“ऑपरेशन मुश्किल है… लेकिन यही एक उम्मीद है।”
मीरा की आँखों में डर था।
लेकिन तभी आरव ने उसका हाथ पकड़कर कहा —
“तुम अकेली नहीं हो।”
मीरा ने धीरे से पूछा —
“अगर ऑपरेशन में मुझे कुछ हो गया तो?”
आरव ने बिना एक पल सोचे जवाब दिया —
“तो भी मैं तुम्हें हमेशा प्यार करता रहूँगा।”
मीरा की आँखों से आँसू बहने लगे।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होने वाली थी।
क्योंकि…
ऑपरेशन से पहले डॉक्टर ने एक ऐसी बात बताई जिसने सब कुछ बदल दिया।