अध्याय 25 – “अंतिम क्लाइमेक्स”
इंडियन नेशनल वॉल्ट के अंदर सन्नाटा छा गया था।
सायरन अब भी बज रहा था… लेकिन अब किसी को उसकी परवाह नहीं थी।
क्योंकि इस पल में सिर्फ दो लोग आमने-सामने खड़े थे।
आरव… और विक्टर ग्रे।
आरव की बंदूक सीधे विक्टर की तरफ तनी हुई थी।
विक्टर धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
उसके चेहरे पर अब भी हल्की मुस्कान थी।
“तो… आखिरकार कहानी यहाँ खत्म होती है?”
आरव की आवाज़ शांत थी।
“कहानी नहीं… तुम्हारा खेल खत्म होता है।”
विक्टर हल्का सा हँसा।
“तुम अभी भी वही हो, आरव।”
“हम दोनों साथ होते तो दुनिया बदल सकते थे।”
आरव ने धीरे से सिर हिलाया।
“दुनिया बदलने और दुनिया को अपने कब्जे में लेने में फर्क होता है।”
विक्टर की आँखों में गुस्सा चमक उठा।
“तुम हमेशा कमजोर रहे हो!”
अचानक…
विक्टर बिजली की तरह आगे झपटा।
उसने आरव को धक्का दिया और बंदूक दूर गिर गई।
दोनों फिर से जमीन पर गिर पड़े।
धड़ाम!
विक्टर ने आरव के ऊपर बैठकर उसे दबा लिया।
“तुमने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी!”
उसने मुक्का मारा।
ठक!
लेकिन अगले ही पल…
आरव ने उसकी कलाई पकड़ ली।
और जोर से उसे पलट दिया।
अब विक्टर जमीन पर था।
आरव खड़ा हुआ…
और उसकी गर्दन पकड़ ली।
कुछ सेकंड के लिए दोनों की आँखें मिलीं।
विक्टर धीरे से बोला —
“अगर मुझे मारोगे… तो तुम भी वही बन जाओगे जो मैं हूँ।”
कमरे में खामोशी छा गई।
आरव ने उसकी तरफ देखा।
फिर धीरे से उसका गला छोड़ दिया।
विक्टर हैरान रह गया।
आरव ने शांत स्वर में कहा —
“यही फर्क है तुममें और मुझमें।”
तभी…
पीछे से एजेंट आर्यन आगे आया।
उसने हथकड़ी निकाली और विक्टर के हाथों में डाल दी।
“विक्टर ग्रे…”
“तुम्हें अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है।”
विक्टर ने आखिरी बार आरव की तरफ देखा।
“ये खत्म नहीं हुआ है…”
आरव ने जवाब दिया —
“हाँ… लेकिन तुम्हारे लिए जरूर खत्म हो गया है।”
कुछ देर बाद…
सरकारी एजेंसियों की टीम वॉल्ट में पहुँच चुकी थी।
ब्लैक सिंडिकेट के सभी लोग पकड़े जा चुके थे।
बाहर सुबह की पहली रोशनी फैल रही थी।
आरव वॉल्ट के बाहर खड़ा आसमान की तरफ देख रहा था।
कबीर उसके पास आया।
“तो अब क्या?”
आरव ने हल्की मुस्कान दी।
“अब… मैं वापस वही जिंदगी जीऊँगा जो मैं चाहता हूँ।”
आर्यन भी पास आया।
“अगर दुनिया को फिर कभी तुम्हारी जरूरत पड़ी…”
आरव ने जवाब दिया —
“तो मैं फिर आ जाऊँगा।”
फिर वह धीरे-धीरे वहाँ से चला गया।
एक बार फिर…
दुनिया को बचाने वाला आदमी…
भीड़ में एक साधारण इंसान बनकर खो गया।
लेकिन एक बात साफ थी —
जब भी अंधेरा बढ़ेगा…
आरव फिर वापस आएगा।