छुपी हुई विरासत – एक रहस्यमयी आदमी की कहानी

अध्याय 22 – “दोगुना खेल”

वॉल्ट के अंदर लाल अलार्म लाइट चमक रही थी।

स्क्रीन पर विक्टर ग्रे की मुस्कान और चौड़ी हो गई।


“तुम्हें लगता है तुम अभी भी खेल में हो, आरव?”


आरव शांत खड़ा था।

उसके चेहरे पर डर की जगह एक अजीब सा आत्मविश्वास था।


कबीर धीरे से फुसफुसाया —

“तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो?”


आरव ने धीमे स्वर में कहा —

“क्योंकि यही मैं चाहता था।”


स्क्रीन पर विक्टर की भौंह सिकुड़ गई।


“क्या मतलब?”


आरव धीरे-धीरे कांच के चैंबर के पास गया।


फिर उसने उंगली से फाइल की तरफ इशारा किया।


“तुम सोच रहे हो कि यही असली फाइल है।”


कमरे में सन्नाटा छा गया।


कबीर ने हैरानी से पूछा —

“क्या?”


आरव हल्का सा मुस्कुराया।


“लेकिन असली ‘प्रोजेक्ट शैडो’ यहाँ है ही नहीं।”


विक्टर का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।


“तुम झूठ बोल रहे हो।”


तभी एजेंट आर्यन आगे बढ़ा।


उसने ठंडी आवाज़ में कहा —

“नहीं… वो सच बोल रहा है।”


विक्टर की आँखें सिकुड़ गईं।


“आर्यन…?”


आर्यन बोला —


“सरकार को पहले से पता था कि तुम इस फाइल के पीछे हो।”


“इसलिए हमने असली फाइल कहीं और शिफ्ट कर दी।”


कबीर अब भी समझ नहीं पा रहा था।


“मतलब… हम यहाँ क्यों आए?”


आरव ने धीरे से जवाब दिया —


“क्योंकि हमें विक्टर को बाहर लाना था।”


स्क्रीन पर विक्टर की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।


“तो तुम दोनों… मिलकर काम कर रहे थे?”


आरव ने शांत स्वर में कहा —


“हाँ।”


“लेकिन सिर्फ आज से नहीं…”


“काफी समय से।”


विक्टर की आँखों में गुस्सा चमक उठा।


“तो वो लड़की…?”


आरव की आवाज़ ठंडी हो गई।


“वो भी सुरक्षित है।”


“तुमने जिसे पकड़ा था… वो असली लड़की नहीं थी।”


कबीर की आँखें फैल गईं।


“मतलब…?”


आरव ने कहा —


“सरकार की एक अंडरकवर एजेंट।”


अब विक्टर सच में गुस्से में था।


“तुमने मुझे बेवकूफ बनाया।”


आर्यन ने कहा —


“नहीं, विक्टर।”


“हमने बस तुम्हें वही दिखाया… जो तुम देखना चाहते थे।”


कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन पर सन्नाटा रहा।


फिर अचानक…

विक्टर हँसने लगा।


धीरे-धीरे… फिर जोर से।


“तुम दोनों अभी भी वही गलती कर रहे हो।”


आरव की आँखें सिकुड़ गईं।


“कौन सी गलती?”


विक्टर की मुस्कान वापस आ गई।


“तुम सोचते हो कि खेल खत्म हो गया…”


“लेकिन असली चाल तो मैंने अभी चली है।”


अचानक…

वॉल्ट की दीवारों में जोर का धमाका हुआ।


धड़ाम!!


कमरे की एक पूरी दीवार टूट गई।


और धुएँ के बीच…

काले कपड़ों में हथियारबंद लोग अंदर घुस आए।


कम से कम 30 लोग।


ब्लैक सिंडिकेट।


विक्टर की आवाज़ स्पीकर पर गूंजी —


“तुमने मुझे बाहर निकालने का प्लान बनाया था…”


“लेकिन तुम भूल गए…”


“मैं कभी अकेला नहीं खेलता।”


आरव ने गहरी सांस ली।


क्योंकि अब…

खेल सच में शुरू हो चुका था।


और अगले कुछ मिनट तय करने वाले थे…

कि कौन जिंदा बाहर निकलेगा।

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