अध्याय 21 – “वॉल्ट का दिल”
इंडियन नेशनल वॉल्ट के अंदर गहराई में एक लंबा गलियारा था।
तीनों धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे — आरव, कबीर और एजेंट आर्यन।
हर कदम के साथ सुरक्षा और भी कड़ी होती जा रही थी।
गलियारे की दीवारों पर लाल लेज़र लाइनों का जाल फैला हुआ था।
कबीर ने धीरे से कहा —
“ये ट्रिप-लेज़र हैं… अगर एक भी लाइन छू गई तो पूरा सिस्टम लॉकडाउन में चला जाएगा।”
आर्यन आगे बढ़ा।
उसने अपने हाथ की घड़ी से एक छोटा सा डिवाइस निकाला।
कुछ सेकंड बाद…
लेज़र धीरे-धीरे बंद होने लगे।
कबीर ने हैरानी से कहा —
“सरकारी एजेंट होने का फायदा…”
आर्यन शांत स्वर में बोला —
“और तुम्हारे जैसे हैकर्स से निपटने की तैयारी।”
कुछ मिनट बाद…
तीनों एक विशाल स्टील के दरवाजे के सामने खड़े थे।
यह था —
वॉल्ट का मुख्य दरवाजा।
दरवाजे पर तीन अलग-अलग लॉक लगे थे।
रेटिना स्कैन।
फिंगरप्रिंट।
और कोड।
आर्यन ने बिना हिचकिचाए अपना हाथ आगे बढ़ाया।
पहले फिंगरप्रिंट।
फिर रेटिना स्कैन।
मशीन से आवाज आई —
ACCESS GRANTED
लेकिन तीसरा लॉक अभी भी बाकी था।
कबीर मुस्कुराया।
“अब मेरी बारी।”
उसने तेजी से कीबोर्ड जैसे छोटे डिवाइस पर कोड डालना शुरू किया।
कुछ सेकंड बाद…
दरवाजा धीरे-धीरे खुलने लगा।
और उसके पीछे जो था…
वह किसी खजाने से कम नहीं था।
अंदर सैकड़ों लॉकर्स थे।
सोने की ईंटें…
गुप्त फाइलें…
और हाई-टेक सर्वर।
कमरे के बीचों-बीच एक कांच का चैंबर था।
आर्यन ने उसकी तरफ इशारा किया।
“वही है।”
“प्रोजेक्ट शैडो की फाइल।”
आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
लेकिन जैसे ही वह चैंबर के पास पहुँचा…
अचानक पूरे कमरे की लाइट लाल हो गई।
ALERT! ALERT!
कबीर चौंक गया।
“ये क्या—?”
अचानक कमरे की दीवार पर लगे बड़े स्क्रीन चालू हो गए।
और स्क्रीन पर एक चेहरा दिखाई दिया।
विक्टर ग्रे।
वह मुस्कुरा रहा था।
“वाह…”
“तुम तीनों ने उम्मीद से भी जल्दी काम कर दिया।”
आरव की आँखें ठंडी हो गईं।
“तुम यहाँ कैसे—?”
विक्टर हँसा।
“तुम सच में सोचते हो कि ये पूरा प्लान तुम्हारा था?”
फिर उसने धीरे से कहा —
“नहीं, आरव…”
“ये सब… मेरा प्लान था।”
कबीर घबरा गया।
“मतलब?”
विक्टर बोला —
“तुम्हें यहाँ लाने के लिए मुझे बस एक चारा चाहिए था।”
“और वो लड़की… वही चारा थी।”
आरव की मुट्ठियाँ कस गईं।
“अगर उसे कुछ हुआ—”
विक्टर ने बीच में ही रोक दिया।
“वो जिंदा है।”
“लेकिन अभी…”
उसने स्क्रीन पर एक बटन दबाया।
अचानक कांच का चैंबर खुल गया।
और उसके अंदर की फाइल धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी।
विक्टर मुस्कुराया।
“धन्यवाद, आरव।”
“तुमने मेरे लिए दुनिया की सबसे सुरक्षित तिजोरी खोल दी।”
आरव समझ गया।
यह सब… शुरू से ही जाल था।
लेकिन तभी…
आरव के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
विक्टर ने भौंह सिकोड़ ली।
“तुम हँस क्यों रहे हो?”
आरव ने धीरे से कहा —
“क्योंकि… असली खेल अभी शुरू हुआ है।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
और अगले ही पल…
कुछ ऐसा होने वाला था जो विक्टर ने भी नहीं सोचा था।