छुपी हुई विरासत – एक रहस्यमयी आदमी की कहानी

अध्याय 18 – “सबसे सुरक्षित किला”

अगली सुबह।

दिल्ली के एक पुराने गोदाम के अंदर कंप्यूटर स्क्रीन की हल्की नीली रोशनी चमक रही थी।

टेबल पर नक्शे फैले हुए थे।

और स्क्रीन पर एक इमारत का 3D मॉडल घूम रहा था।


इंडियन नेशनल वॉल्ट।


कबीर कुर्सी पर बैठा तेजी से कीबोर्ड चला रहा था।

आरव उसके पीछे खड़ा था।


कबीर बोला —

“ठीक है… अब ध्यान से सुनो।”


उसने स्क्रीन पर एक लाल बिंदु दिखाया।


“यह है वॉल्ट का मुख्य प्रवेश द्वार।”

“यहाँ से घुसने की कोशिश करोगे तो 5 सेकंड में गोली मार दी जाएगी।”


आरव शांत खड़ा रहा।


कबीर ने दूसरा बिंदु दिखाया।


“यहाँ लेज़र सिक्योरिटी है… इतनी संवेदनशील कि हवा भी हिले तो अलार्म बज जाता है।”


फिर उसने तीसरी जगह पर क्लिक किया।


“और यहाँ… बायोमेट्रिक लॉक।”

“फिंगरप्रिंट, रेटिना स्कैन और DNA वेरिफिकेशन।”


आरव ने धीरे से पूछा —

“तो रास्ता कहाँ है?”


कबीर मुस्कुराया।


“यहीं मजा आता है।”


उसने स्क्रीन पर इमारत के नीचे की तरफ ज़ूम किया।


“यहाँ नीचे एक पुरानी मेंटेनेंस टनल है।”


आरव ने ध्यान से देखा।


“लेकिन ये तो बंद होगी।”


कबीर ने सिर हिलाया।


“सरकारी रिकॉर्ड में हाँ।”

“लेकिन असल में… नहीं।”


आरव ने पूछा —

“मतलब?”


कबीर बोला —


“मतलब… यही हमारा रास्ता है।”


आरव कुछ सेकंड सोचता रहा।


फिर उसने पूछा —


“और एजेंट आर्यन?”


कबीर की मुस्कान हल्की सी कम हो गई।


“वही असली समस्या है।”


“क्योंकि वो आदमी मशीन से भी ज्यादा तेज़ सोचता है।”


तभी…

कबीर का कंप्यूटर अचानक बीप करने लगा।


स्क्रीन पर एक नया विंडो खुला।


कबीर का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।


आरव ने पूछा —

“क्या हुआ?”


कबीर धीरे से बोला —


“मुसीबत।”


“बहुत बड़ी मुसीबत।”


आरव स्क्रीन के पास आया।


और जो उसने देखा…

उससे उसकी आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं।


स्क्रीन पर वॉल्ट की लाइव सिक्योरिटी फीड चल रही थी।


और वहाँ…

एक आदमी खड़ा था।


काले सूट में… बिल्कुल शांत।


वो कैमरे की तरफ देख रहा था।


जैसे उसे पता हो कि कोई उसे देख रहा है।


फिर उसने हल्की सी मुस्कान दी।


कबीर फुसफुसाया —


“एजेंट आर्यन।”


अचानक…

स्क्रीन पर एक नया मैसेज फ्लैश हुआ।


UNKNOWN ACCESS DETECTED


फिर एक और लाइन आई —


“HELLO KABIR.”


कबीर का चेहरा सफेद पड़ गया।


“ये… असंभव है।”


आरव ने धीरे से पूछा —


“क्या हुआ?”


कबीर ने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।


“वो हमें देख रहा है।”


“और उसे पता चल गया है… कि हम आने वाले हैं।”


कमरे में खामोशी छा गई।


क्योंकि अब खेल और भी खतरनाक हो चुका था।


अब यह सिर्फ चोरी नहीं थी…

यह एक जाल बन चुका था।


और शायद…

इस जाल में फँसने वाले खुद आरव और कबीर थे।

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