अध्याय 15 – “आयरन ब्रिज का जाल”
अगली रात…
दिल्ली के पुराने इंडस्ट्रियल इलाके में एक टूटा-फूटा पुल खड़ा था — “आयरन ब्रिज।”
रात के ठीक 10 बजे।
चारों तरफ सन्नाटा था।
न कोई गाड़ी… न कोई इंसान।
सिर्फ ठंडी हवा और लोहे के पुल की चरमराहट।
आरव धीरे-धीरे उस पुल पर चलता हुआ आगे बढ़ रहा था।
उसकी चाल बिल्कुल शांत थी…
लेकिन उसकी आँखें हर कोने को देख रही थीं।
उसे पता था —
यह सिर्फ मुलाकात नहीं है।
यह एक जाल है।
तभी…
पुल के बीचों-बीच एक आदमी अंधेरे से बाहर आया।
लंबा कद… काला कोट… और चेहरे पर हल्की मुस्कान।
विक्टर ग्रे।
कई सालों बाद…
दोनों आमने-सामने खड़े थे।
विक्टर ने ताली बजाई।
“वाह… आरव।”
“तुम बिल्कुल नहीं बदले।”
आरव शांत खड़ा रहा।
“तुम बदल गए हो।”
विक्टर हँस पड़ा।
“हाँ… क्योंकि मैंने वो किया जो तुम नहीं कर पाए।”
“मैंने ताकत को अपनाया।”
आरव की नजरें उसके पीछे घूमीं।
उसे साफ दिखाई दे रहा था —
पुल के चारों तरफ छुपे हुए स्नाइपर्स।
कम से कम…
बीस बंदूकें उस पर तनी हुई थीं।
विक्टर मुस्कुराया।
“तुम अभी भी सब देख लेते हो… है ना?”
आरव ने शांत स्वर में कहा —
“अगर मुझे मारना ही था… तो बुलाने की क्या जरूरत थी?”
विक्टर थोड़ा पास आया।
“क्योंकि मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता।”
“मैं तुम्हें वापस चाहता हूँ।”
आरव की भौंह हल्की सी उठी।
“वापस?”
विक्टर बोला —
“हम दोनों मिलकर दुनिया को कंट्रोल कर सकते हैं।”
“सरकारें… एजेंसियाँ… अंडरवर्ल्ड…”
“सब हमारे नीचे होंगे।”
कुछ सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
फिर आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“तुम अभी भी वही सपना देख रहे हो, विक्टर।”
“और तुम अभी भी वही गलती कर रहे हो।”
विक्टर की मुस्कान धीरे-धीरे गायब होने लगी।
“तो तुम्हारा जवाब… ना है?”
आरव ने सीधा कहा —
“हमेशा से था।”
अचानक…
विक्टर ने उंगली चटकाई।
और अगले ही पल…
पुल के चारों तरफ से दर्जनों लोग बाहर आ गए।
हर किसी के हाथ में हथियार था।
विक्टर ठंडी आवाज़ में बोला —
“मुझे उम्मीद थी कि तुम यही कहोगे।”
“इसलिए… मैंने प्लान B तैयार रखा है।”
आरव बिल्कुल नहीं घबराया।
उसने बस एक सवाल पूछा —
“तुमने उसे कहाँ रखा है?”
विक्टर की आँखों में चमक आ गई।
“तो तुम्हें पता है…”
आरव की आवाज़ अचानक बहुत खतरनाक हो गई।
“अगर उसे कुछ हुआ…”
“तो इस बार मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ूँगा।”
विक्टर हँस पड़ा।
“शांत रहो, आरव।”
“वो अभी जिंदा है।”
“लेकिन कब तक… ये तुम्हारे ऊपर निर्भर करता है।”
आरव की मुट्ठी कस गई।
विक्टर धीरे से बोला —
“अगर उसे बचाना है…”
“तो तुम्हें मेरे लिए एक काम करना होगा।”
आरव ने ठंडे स्वर में पूछा —
“क्या?”
विक्टर मुस्कुराया।
“एक चोरी।”
“दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह से।”
“इंडियन नेशनल वॉल्ट।”
यह सुनते ही…
आरव की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
क्योंकि उसे पता था —
वह जगह लगभग असंभव थी।
और यही कारण था…
कि विक्टर ने उसे चुना था।
रात और गहरी हो गई।
और खेल अब और भी खतरनाक होने वाला था।