अध्याय 14 – “पुराना साथी, नया दुश्मन”
छत पर गिरा हुआ आदमी अभी भी काँप रहा था।
उसके मुँह से निकला नाम — “विक्टर ग्रे”…
जैसे ही आरव ने सुना, उसके चेहरे पर एक पल के लिए गुस्से की हल्की झलक आई।
लेकिन अगले ही सेकंड वो फिर से शांत हो गया।
लड़की ने धीरे से पूछा —
“तुम सच में उसे जानते हो?”
आरव कुछ पल तक चुप रहा।
फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा —
“सिर्फ जानता नहीं…”
“कभी हम एक ही टीम में थे।”
लड़की हैरान रह गई।
“क्या मतलब?”
आरव ने छत के किनारे की तरफ देखते हुए कहा —
“कभी हम दोनों दुनिया के सबसे खतरनाक मिशन साथ में करते थे।”
“कोई भी सिस्टम, कोई भी दुश्मन… हमें रोक नहीं सकता था।”
“लेकिन एक दिन…”
“विक्टर बदल गया।”
लड़की ध्यान से सुन रही थी।
आरव की आवाज़ अब थोड़ी भारी हो गई थी।
“उसे ताकत चाहिए थी… बहुत ज्यादा ताकत।”
“और उस ताकत के लिए उसने हर हद पार कर दी।”
लड़की ने पूछा —
“और तब?”
आरव ने धीरे से जवाब दिया —
“तब मुझे उसे रोकना पड़ा।”
“क्या तुमने उसे मार दिया था?”
आरव ने सिर हिलाया।
“नहीं… मैंने उसे जिंदा छोड़ दिया था।”
“क्योंकि वो कभी मेरा दोस्त था।”
छत पर कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई।
तभी नीचे सड़क से पुलिस सायरन की आवाज़ आने लगी।
वो आदमी डरकर बोला —
“तुम समझ नहीं रहे… विक्टर अब बहुत बड़ा बन चुका है।”
“ब्लैक सिंडिकेट सिर्फ एक छोटा हिस्सा है।”
“उसके पास… पूरी अंडरवर्ल्ड की ताकत है।”
आरव ने उसकी आँखों में देखा।
फिर शांत स्वर में बोला —
“ताकत…?”
“ताकत तो मैंने भी बहुत पहले छोड़ दी थी।”
वो आदमी डरते हुए बोला —
“लेकिन अगर विक्टर को पता चल गया कि तुम वापस आ गए हो…”
“तो वो पूरी दुनिया को तुम्हारे खिलाफ कर देगा।”
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“तो कर लेने दो।”
तभी…
उसका फोन वाइब्रेट हुआ।
स्क्रीन पर एक अनजान नंबर फ्लैश हो रहा था।
आरव ने कॉल उठाई।
फोन के दूसरी तरफ से एक ठंडी आवाज़ आई —
“हैलो… आरव।”
आरव की आँखें सिकुड़ गईं।
“बहुत साल हो गए… दोस्त।”
आरव धीरे से बोला —
“विक्टर।”
फोन के दूसरी तरफ हल्की हँसी गूँजी।
“मैं सोच रहा था… तुम कब वापस आओगे।”
“और अब जब तुम आ ही गए हो…”
“तो खेल फिर से शुरू होगा।”
आरव ने ठंडे स्वर में कहा —
“इस बार खेल नहीं होगा, विक्टर।”
“इस बार अंत होगा।”
विक्टर हँस पड़ा।
“अंत…?”
“तुम अभी भी वही गलती कर रहे हो, आरव।”
“तुम सोचते हो कि तुम अकेले हो…”
“लेकिन तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं कि इस बार मेरे साथ कौन है।”
आरव चुप रहा।
विक्टर की आवाज़ और गहरी हो गई।
“अगर सच जानना है…”
“तो कल रात 10 बजे… पुराना आयरन ब्रिज।”
“वहीं मिलते हैं।”
और कॉल कट गया।
लड़की ने तुरंत पूछा —
“क्या हुआ?”
आरव ने फोन जेब में रखा।
उसकी आँखों में अब वही पुरानी खतरनाक चमक वापस आ चुकी थी।
वो धीरे से बोला —
“कल… असली खेल शुरू होगा।”
हवा और तेज़ चलने लगी।
और दिल्ली की रात एक नए तूफान की तैयारी कर रही थी।