अध्याय 13 – “पहली असली टक्कर”
छत पर सन्नाटा छा गया था।
दस हथियारबंद आदमी आरव और उस लड़की को घेर चुके थे।
उनके हाथों में बंदूकें थीं… और आँखों में घमंड।
उनका लीडर आगे बढ़ा और बोला —
“आखिरकार… महान आरव सिंह हमारे सामने खड़ा है।”
आरव बिल्कुल शांत खड़ा था।
उसके चेहरे पर डर का नाम तक नहीं था।
लड़की धीरे से फुसफुसाई —
“तुम पागल हो क्या? ये लोग दस हैं… और सबके पास हथियार हैं।”
आरव ने बिना उसकी तरफ देखे कहा —
“तुम पीछे हट जाओ।”
“ये लोग मेरे लिए आए हैं।”
लीडर ने हँसते हुए कहा —
“देखा… अभी भी इसे अपने आप पर कितना भरोसा है।”
फिर उसने बंदूक उठाई और सीधा आरव पर तान दी।
“लेकिन आज ये भरोसा टूटने वाला है।”
तभी…
एक गोली चली।
धड़ाम!!
लेकिन गोली आरव को नहीं लगी।
क्योंकि गोली चलने से पहले ही…
आरव वहाँ से गायब हो चुका था।
अगले ही सेकंड…
धप्प!!
एक आदमी जमीन पर गिर चुका था।
दूसरा कुछ समझ पाता उससे पहले…
आरव की कोहनी उसके चेहरे पर पड़ी।
धड़ाम!!
तीसरा आदमी पीछे से हमला करने दौड़ा…
लेकिन आरव ने उसकी कलाई पकड़कर उसे हवा में घुमा दिया।
वह सीधे छत पर जा गिरा।
सब कुछ इतना तेज़ हो रहा था कि किसी को समझ ही नहीं आ रहा था।
लड़की हैरानी से सब देख रही थी।
उसने धीरे से कहा —
“ये… इंसान है भी या नहीं?”
अब सिर्फ चार आदमी बचे थे।
उनका लीडर गुस्से से चिल्लाया —
“सब मिलकर हमला करो!”
चारों आदमी एक साथ आरव की तरफ दौड़े।
लेकिन अगले कुछ सेकंड में…
छत पर सिर्फ गिरने की आवाज़ें गूंज रही थीं।
धड़ाम… धप्प… ठक!!
कुछ ही पल बाद…
सभी आदमी जमीन पर पड़े कराह रहे थे।
और आरव उनके बीच खड़ा था।
बिल्कुल शांत।
लीडर आखिरी आदमी था जो अभी भी खड़ा था।
उसके हाथ काँप रहे थे।
उसने धीरे से पूछा —
“त… तुम आखिर हो कौन?”
आरव उसकी तरफ धीरे-धीरे बढ़ा।
फिर उसके सामने रुक गया।
उसकी आवाज़ ठंडी थी —
“मैं वही हूँ… जिसे तुम्हारा संगठन सालों से ढूंढ रहा है।”
“और वही… जिससे तुम्हारा संगठन सबसे ज्यादा डरता है।”
लीडर की आँखों में डर साफ दिखने लगा।
आरव ने उसका कॉलर पकड़ लिया।
“अब सच बताओ।”
“ब्लैक सिंडिकेट का असली बॉस कौन है?”
आदमी कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर डरते हुए बोला —
“अगर मैंने बता दिया… तो वो मुझे मार देगा।”
आरव की पकड़ और मजबूत हो गई।
“अगर नहीं बताया… तो अभी मैं मार दूँगा।”
आदमी का चेहरा पीला पड़ गया।
उसने काँपते हुए कहा —
“उसका नाम… विक्टर है।”
“विक्टर ग्रे।”
ये नाम सुनते ही…
आरव की आँखों में एक अजीब सा बदलाव आया।
जैसे कोई पुराना जख्म फिर से खुल गया हो।
वह धीरे से बुदबुदाया —
“तो… वो अभी भी जिंदा है।”
लड़की ने हैरानी से पूछा —
“तुम उसे जानते हो?”
आरव ने आसमान की तरफ देखा।
फिर धीरे से बोला —
“जानता ही नहीं…”
“कभी वो मेरा सबसे बड़ा साथी था।”
“और अब… सबसे बड़ा दुश्मन।”
छत पर हवा तेज़ चलने लगी।
और कहानी अब एक नए मोड़ की तरफ बढ़ रही थी।