अध्याय 12 – “छाया का पीछा”
रात गहरा चुकी थी।
दिल्ली की सड़कें अभी भी जाग रही थीं, लेकिन आरव के कमरे में अजीब सी खामोशी थी।
टेबल पर वही कागज पड़ा था —
“WELCOME BACK, HEIR.”
आरव कुर्सी पर बैठा उसे घूर रहा था।
“Heir… यानी वारिस…”
उसने धीरे से कहा।
“मतलब… उन्हें सब पता है।”
तभी…
उसकी नजर खिड़की पर गई।
सामने वाली बिल्डिंग की छत पर कोई खड़ा था।
एक काली परछाई।
कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर वह परछाई अचानक मुड़ी… और भागने लगी।
आरव तुरंत खड़ा हो गया।
“तो सच में… कोई मुझे देख रहा है।”
वह बिना देर किए कमरे से बाहर निकल गया।
कुछ ही मिनटों में…
आरव होटल की सीढ़ियाँ उतरकर सड़क पर पहुँच चुका था।
उसने सामने वाली बिल्डिंग की तरफ देखा।
फिर तेज़ कदमों से उसकी तरफ बढ़ गया।
सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उसके कदम बिल्कुल शांत थे।
जैसे वह हर आवाज़ को सुन सकता हो।
छत पर पहुँचते ही…
वह परछाई फिर दिखाई दी।
लेकिन इस बार वह भाग नहीं रही थी।
वह खड़ी थी… जैसे आरव का इंतज़ार कर रही हो।
आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
“कौन हो तुम?”
परछाई ने धीरे से अपना चेहरा रोशनी में किया।
और आरव की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
वह वही लड़की थी… जिसने उसे लिफाफा दिया था।
आरव ने पूछा —
“तुम मेरा पीछा क्यों कर रही हो?”
लड़की कुछ सेकंड चुप रही।
फिर बोली —
“क्योंकि अगर मैं नहीं करती… तो तुम शायद आज रात जिंदा नहीं रहते।”
आरव की भौंहें सिकुड़ गईं।
“मतलब?”
लड़की ने नीचे सड़क की तरफ इशारा किया।
आरव ने नीचे देखा।
सड़क पर तीन काली कारें आकर रुकी थीं।
उनमें से कई आदमी उतर रहे थे।
सभी के हाथों में हथियार थे।
लड़की बोली —
“ब्लैक सिंडिकेट।”
“उन्हें पता चल गया है कि तुम यहाँ हो।”
आरव कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर उसने हल्की सी मुस्कान दी।
“अच्छा है… मुझे भी उनसे मिलने की जल्दी थी।”
लड़की ने हैरानी से उसे देखा।
“तुम समझ नहीं रहे… वो लोग तुम्हें मारने आए हैं।”
आरव धीरे से बोला —
“और शायद उन्हें पता नहीं… कि वो किससे लड़ने आए हैं।”
नीचे से कदमों की आवाज़ आने लगी।
कोई लोग बिल्डिंग के अंदर घुस चुके थे।
लड़की ने जल्दी से कहा —
“हमें यहाँ से निकलना होगा!”
लेकिन आरव वहीं खड़ा रहा।
उसने अपनी मुट्ठियाँ हल्की सी कस लीं।
उसकी आँखों में अब वही पुरानी ठंडक लौट आई थी।
“नहीं…”
आरव बोला।
“इस बार मैं नहीं भागूँगा।”
“आज… उन्हें पता चल जाएगा कि असली शिकार कौन है।”
तभी छत का दरवाज़ा जोर से खुला।
धड़ाम!!
करीब दस हथियारबंद आदमी छत पर आ चुके थे।
उनका लीडर आगे बढ़ा और हँसते हुए बोला —
“आखिर मिल ही गए… आरव सिंह।”
“आज तुम्हारी कहानी खत्म हो जाएगी।”
आरव ने धीरे से उसकी तरफ देखा।
फिर शांत आवाज़ में बोला —
“तुम्हें एक बात पता होनी चाहिए…”
“कहानी मेरी नहीं…”
“तुम्हारी खत्म होने वाली है।”