छुपा हुआ अमीरज़ादा (विरासत की जंग) – A Suspense Thriller Hindi Novel

PART 8: गेस्ट हाउस का नाम

संजीव की मौत के बाद सब कुछ और उलझ गया था।

पुलिस आई। बयान हुए।

लेकिन सच्चाई… अभी भी अधूरी थी।


उस रात आरमान सो नहीं पाया।

संजीव के आखिरी शब्द उसके दिमाग में गूंज रहे थे—

“साइलेंट पार्टनर… तुम्हारे बहुत करीब है…”


करीब?

कितना करीब?


पुराना गेस्ट हाउस

हवेली के पीछे, घने पेड़ों के बीच एक पुराना गेस्ट हाउस था।

सालों से बंद।

कोई वहाँ नहीं जाता था।


रात के 1:15 बजे।

आरमान अकेले वहाँ पहुँचा।


दरवाज़ा धक्का देते ही चरमराया।


अंदर धूल की मोटी परत थी।

फर्श पर जाले।

खिड़की से आती बिजली की चमक।


कमरे के कोने में एक पुरानी अलमारी खड़ी थी।


उसे खोलने में थोड़ा जोर लगा।


अंदर फाइलों का ढेर था।


लेकिन सबसे नीचे… एक काली फाइल अलग रखी थी।


उस पर लिखा था—

“Confidential Partnership Agreement”


आरमान का दिल तेज धड़कने लगा।


उसने फाइल खोली।


पहला पन्ना—


राजवीर मल्होत्रा का साइन।


दूसरा साइन…


नाम पढ़ते ही उसकी सांस रुक गई।


“सिया मल्होत्रा”


कमरा जैसे घूम गया।


“नहीं… ये नहीं हो सकता…”


सिया?


वही सिया जो उसकी मदद कर रही थी?


वही सिया जिसने डायरी दिखाई?


क्या ये सब एक जाल था?


फ्लैशबैक

उसे याद आया—

  • डायरी सिया को कैसे मिली?
  • तहखाने की चाबी उसके पास क्यों थी?
  • और हर बार सही समय पर वही क्यों आती थी?

तभी पीछे से आवाज आई—


“मुझे पता था… तुम यहाँ आओगे।”


आरमान ने धीरे से पलटकर देखा।


दरवाज़े पर सिया खड़ी थी।


उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।

डर भी नहीं।

सिर्फ शांति।


“तो ये सच है?” आरमान की आवाज टूट रही थी।


सिया अंदर आई।


“हाँ… मैं साइलेंट पार्टनर हूँ।”


सन्नाटा।


“लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है।”


आरमान ने गुस्से से कहा—


“मेरे पिता की मौत में तुम्हारा हाथ था?”


सिया की आँखों में पहली बार दर्द उभरा।


“मैंने ट्रिगर नहीं दबाया।”


“लेकिन अगर मैं चाहती… तो शायद वो जिंदा होते।”


आरमान समझ नहीं पा रहा था।


“मतलब साफ बोलो!”


सिया की आवाज भारी हो गई।


“राजवीर अंकल ने मुझे पार्टनर इसलिए बनाया था… क्योंकि मैं इस परिवार पर भरोसा नहीं करती थी।”


“वो जानते थे कि विक्रम और करण लालच में अंधे हो सकते हैं।”


“उन्होंने मुझे secretly 30% शेयर दिए थे… ताकि अगर कुछ हो जाए… तो कंपनी गलत हाथों में न जाए।”


आरमान ने फाइल फिर देखी।


डॉक्यूमेंट की तारीख… मौत से सिर्फ तीन दिन पहले की थी।


“तो तुमने मुझे बचाया क्यों?”


सिया ने उसकी आँखों में देखा।


“क्योंकि राजवीर अंकल का असली वारिस तुम हो।”


“और मैं नहीं चाहती थी कि तुम्हें भी उसी तरह खत्म कर दिया जाए।”


“तो असली मास्टरमाइंड कौन है?”


सिया ने धीरे से कहा—


“वो जिसने हमें बचपन से सिखाया… कि ताकत ही सब कुछ है।”


आरमान का दिल जैसे डूब गया।


“विक्रम?”


सिया ने सिर हिलाया।


“नहीं।”


“माँ।”


कमरा एक पल को जम गया।


“माँ?”


“हाँ। करण की माँ… और विक्रम की पत्नी।”


“वो बाहर से शांत लगती हैं…”


“लेकिन कंपनी के हर बड़े फैसले में उनकी सलाह होती है।”


“और संजीव उन्हीं के संपर्क में था।”


आरमान की दुनिया फिर हिल गई।


क्या ये और बड़ा खेल है?


क्या असली मास्टरमाइंड अब सामने आने वाली है?


PART 9 में:

• करण की माँ की असली सच्चाई
• क्या विक्रम भी अनजान है?
• और क्या आरमान अब खुलकर वार करेगा?

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