छुपा हुआ अमीरज़ादा (विरासत की जंग) – A Suspense Thriller Hindi Novel

PART 5: सामना

लोहे का दरवाज़ा बाहर से जोर से हिला।

धड़ाम!


विक्रम की भारी आवाज गूंजी—

“आखिरी बार कह रहा हूँ… बाहर आ जाओ।”


सिया के हाथ काँप रहे थे।

“वो हमें मार देगा…”


आरमान की आँखों में अब डर कम और गुस्सा ज्यादा था।


“नहीं। आज कोई नहीं मरेगा।”


उसने रिकॉर्डिंग डिवाइस जेब में और गहराई से छुपा लिया।


अचानक दरवाज़ा जोर से खुला।


विक्रम अंदर आया।

उसके पीछे करण खड़ा था।


दोनों की नजरें सीधी आरमान पर।


“तहखाने में क्या ढूँढ रहे थे?” विक्रम ने धीमे लेकिन खतरनाक लहजे में पूछा।


आरमान ने सीधा जवाब दिया—

“सच।”


कुछ सेकंड की खामोशी।


फिर विक्रम हल्का सा मुस्कुराया।


“सच?”


वो धीरे-धीरे आगे बढ़ा।


“सच ये है कि तुम्हारे पिता कमजोर थे।”


“उन्हें बिज़नेस चलाना नहीं आता था।”


“और उन्हें लोगों पर भरोसा करने की बीमारी थी।”


आरमान की मुट्ठियाँ भींच गईं।


“और आपको?”


विक्रम की आँखों में चमक आई।


“मुझे सिर्फ ताकत पर भरोसा है।”


करण ने बीच में कहा—

“हम तुम्हें यहाँ रहने दे रहे हैं, ये बहुत है।”


“ज्यादा सवाल मत पूछो।”


सिया अचानक बोल पड़ी—

“डर किस बात का है? अगर सब साफ है तो?”


करण ने उसे घूरा।


“तुम चुप रहो।”


विक्रम अब बिल्कुल पास आ चुका था।


“सुनो आरमान…”


“ये हवेली सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं है।”


“यहाँ हर दीवार के पीछे एक कहानी दबी है।”


“और कुछ कहानियाँ अगर बाहर आ जाएँ… तो बहुत खून बहता है।”


कमरे की हवा भारी हो गई।


आरमान ने पहली बार सीधा वार किया—


“पापा की मौत accident नहीं थी।”


विक्रम की पलकें एक पल को रुकीं।


बस एक पल।


लेकिन वही पल काफी था।


करण ने तुरंत बात संभाली—

“तुम्हें किसने भड़काया?”


“डायरी मिली?” विक्रम ने अचानक पूछा।


सिया का दिल जैसे रुक गया।


आरमान ने चेहरा सपाट रखा।


“कौन सी डायरी?”


विक्रम ने कुछ सेकंड उसे घूरा।


फिर मुस्कुराया।


“अच्छा है… तुम समझदार हो।”


वो मुड़ा और जाने लगा।


लेकिन जाते-जाते उसने कहा—


“फैक्ट्री मत जाना।”


“वहाँ बहुत पुराने हादसे दफन हैं।”


दरवाज़ा बंद हो गया।


सन्नाटा

कुछ सेकंड तक कोई नहीं बोला।


फिर सिया ने फुसफुसाया—

“उसे डायरी के बारे में कैसे पता?”


आरमान की आँखें सिकुड़ गईं।


“क्योंकि कोई हमें देख रहा है।”


“इस घर में कोई है… जो दोनों तरफ खेल रहा है।”


उसी रात


आरमान अपने कमरे में अकेला बैठा था।


उसने रिकॉर्डिंग फिर चलाई।


इस बार उसे कुछ अजीब सुनाई दिया।


रिकॉर्डिंग के पीछे हल्की सी दूसरी आवाज थी।


जैसे कोई और भी कमरे में मौजूद था।


और उस आवाज ने एक नाम लिया था…


“करण…”


आरमान की सांस अटक गई।


क्या करण भी उस रात वहाँ था?


या… विक्रम किसी और को बचा रहा है?


अचानक

मोबाइल पर एक unknown नंबर से मैसेज आया।


“अगर सच जानना है… तो कल रात 12 बजे फैक्ट्री आओ। अकेले।”


साथ में एक फोटो थी।


उस फोटो में… राजवीर मल्होत्रा जमीन पर गिरे हुए थे।


और उनके पीछे एक धुंधली परछाई खड़ी थी।


PART 6 में:

• क्या आरमान फैक्ट्री जाएगा?
• मैसेज किसने भेजा?
• क्या करण सच में शामिल है… या असली मास्टरमाइंड कोई और है?

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