छुपा हुआ अमीरज़ादा (विरासत की जंग) – A Suspense Thriller Hindi Novel

PART 17: आख़िरी सच

कमरे में खामोशी जमी हुई थी।

शालिनी दरवाज़े के पास खड़ी थी।

आरमान और अद्वैत उसके सामने।


“हाँ… मैंने जहर दिया।”

उसकी आवाज़ ठंडी थी।


आरमान की आँखों में आँसू आ गए।

“क्यों… माँ?”


शालिनी ने धीरे-धीरे सच खोलना शुरू किया।


“20 साल पहले… तुम्हारे पिता ने मुझसे शादी की।”

“लेकिन उनका दिल कभी मेरा नहीं था।”


“वो किसी और से प्यार करते थे…”


“अद्वैत की माँ से।”


कमरा जैसे जम गया।


अद्वैत की मुट्ठियाँ भींच गईं।


“मेरी माँ को उन्होंने छुपाकर रखा।”

“समाज के डर से… नाम के डर से… इमेज के डर से।”


“और जब बात बाहर आने लगी…”


“उन्हें विदेश भेज दिया गया।”


“वहीं उनकी मौत हुई।”


आरमान स्तब्ध था।


“तो आपने बदला लिया?”


शालिनी की आँखों में पहली बार दर्द दिखा।


“मैंने सिर्फ वो छीना… जो मुझे कभी मिला ही नहीं।”


अद्वैत अचानक बोला—


“लेकिन आपने मुझे क्यों इस्तेमाल किया?”


“AR Holdings… पैसा… ये सब?”


शालिनी की आवाज भारी हो गई।


“क्योंकि मुझे पता था… राजवीर तुम्हें अपना असली वारिस बनाना चाहते थे।”


“और अगर तुम सामने आते… तो आरमान सब खो देता।”


कमरे में बिजली सी कौंधी।


“तो आपने दोनों बेटों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया?”


“हाँ।”


“ताकि साम्राज्य टूटे… और उसे महसूस हो… जो मैंने सहा।”


तभी सिया ने धीमे स्वर में कहा—


“लेकिन राजवीर ने डायरी में लिखा था… असली खतरा घर के अंदर है।”


शालिनी हल्का सा मुस्कुराई।


“उन्हें आखिर में सब समझ आ गया था।”


“लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”


अचानक अद्वैत ने एक और सच सामने रखा।


“आप झूठ बोल रही हैं।”


“जहर आपने दिया… लेकिन प्लान आपका नहीं था।”


शालिनी की आँखें फैल गईं।


“क्या मतलब?”


अद्वैत ने फाइल आगे बढ़ाई।


“ये बैंक ट्रांसफर आपके अकाउंट में नहीं… विक्रम के अकाउंट में गए थे।”


कमरा सन्न रह गया।


“विक्रम ने आपको उकसाया।”


“आपके दर्द को हथियार बनाया।”


“और पूरा खेल खुद कंट्रोल करता रहा।”


आरमान के पैरों तले जमीन खिसक गई।


“तो असली मास्टरमाइंड…”


“विक्रम।”


उसी पल दरवाज़े के बाहर ताली की आवाज गूंजी।


विक्रम अंदर आया।


चेहरे पर धीमी मुस्कान।


“ब्रावो… आखिर सच तक पहुँच ही गए।”


“हाँ… मैंने ही ये खेल रचा।”


“राजवीर ने मुझे हमेशा परछाई में रखा।”

“मैंने साम्राज्य खड़ा किया… लेकिन नाम उनका था।”


“इसलिए मैंने तय किया… अगर ताज मुझे नहीं मिलेगा… तो कोई और भी चैन से नहीं बैठेगा।”


कमरे में तूफान खड़ा हो गया।


आरमान ने गुस्से में कहा—

“तुमने पापा को मरवा दिया!”


विक्रम ठंडी आवाज में बोला—

“नहीं… मैंने सिर्फ हालात बनाए।”

“जहर तो घर के अंदर से ही आया था।”


सबकी नजरें शालिनी पर टिक गईं।


अब फैसला सामने था।

  • शालिनी अपराधी थी… लेकिन मोहरा भी।
  • विक्रम असली खिलाड़ी था।
  • अद्वैत और आरमान— दो भाई, दो वारिस।

विक्रम ने आखिरी वार किया—


“पुलिस को बुला लो।”

“लेकिन याद रखना… अगर मैं गिरा… तो ये साम्राज्य भी साथ गिरेगा।”


कमरे में सन्नाटा।


क्या आरमान बदला चुनेगा?

या परिवार बचाएगा?


PART 18 (FINAL PART) में:

तय होगा —
मल्होत्रा साम्राज्य बचेगा या जलेगा।
और असली “छुपा हुआ अमीरज़ादा” कौन बनेगा।

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