छुपा हुआ अमीरज़ादा (विरासत की जंग) – A Suspense Thriller Hindi Novel

PART 16: अद्वैत की एंट्री

अगली सुबह।

मल्होत्रा ग्रुप का मुख्य कार्यालय।

बाहर मीडिया का शोर।

अंदर… सन्नाटा।


आरमान पूरी रात नहीं सोया था।

एक ही नाम उसके दिमाग में गूंज रहा था— अद्वैत।


क्या सच में उसका एक सौतेला भाई है?


सुबह 11:00 बजे


रिसेप्शन से कॉल आया।


“सर… कोई आपसे मिलने आया है।”


नाम पूछा तो उसने सिर्फ इतना कहा—


“उसे कह दो… अद्वैत आया है।”


आरमान का दिल जैसे रुक गया।


दरवाज़ा खुला।


अंदर एक लंबा, आत्मविश्वासी युवक आया।

सूट परफेक्ट।
चेहरे पर हल्की मुस्कान।


लेकिन उसकी आँखें…


वो बिल्कुल राजवीर जैसी थीं।


“हैलो… भाई।”


कमरे में सन्नाटा छा गया।


सिया ने धीरे से कहा—
“ये… सच है।”


अद्वैत ने कुर्सी खींची और बैठ गया।


“डरने की जरूरत नहीं है।”

“मैं तुम्हारा सब कुछ लेने नहीं आया।”


आरमान गुस्से से बोला—
“तो किसलिए आए हो?”


अद्वैत ने टेबल पर एक फाइल रखी।


उस पर लिखा था— AR HOLDINGS.


“ये कंपनी मेरे नाम पर है।”

“लेकिन इसे बनाया पापा ने था।”


आरमान ने दाँत भींचे।


“क्यों?”


अद्वैत ने गहरी सांस ली।


“क्योंकि वो तुम्हें बचाना चाहते थे।”


कमरा जैसे जम गया।


“800 करोड़ का नुकसान…”

“वो असली नुकसान नहीं था।”


“वो पैसा ट्रांसफर किया गया था… ताकि कोई और उसे हड़प न सके।”


“कौन?”


अद्वैत ने सीधे जवाब नहीं दिया।


उसने एक रिकॉर्डिंग प्ले की।


राजवीर की आवाज थी।


“अगर मेरे साथ कुछ होता है… तो समझना कि मैं अकेला नहीं था।”
“जिसे तुम परिवार समझते हो… वही सबसे बड़ा खतरा है।”


आरमान का दिल जोर से धड़कने लगा।


“तुम कहना क्या चाहते हो?”


अद्वैत ने धीरे से कहा—


“विक्रम सिर्फ मोहरा है।”


“असली खिलाड़ी… माँ है।”


कमरे में जैसे बम फट गया।


“क्या बकवास है!”


“शालिनी मल्होत्रा ने पापा को जहर दिया।”


सिया पीछे हट गई।


“नहीं… ये सच नहीं हो सकता…”


अद्वैत की आवाज ठंडी थी।


“उनके अकाउंट में पिछले साल 300 करोड़ ट्रांसफर हुए।”


“और वही पैसा AR Holdings के जरिए घुमाया गया।”


आरमान की आँखें नम हो गईं।


“माँ ऐसा नहीं कर सकती…”


अद्वैत ने कहा—


“तुम उन्हें सिर्फ माँ के रूप में जानते हो।”

“मैं उन्हें उस औरत के रूप में जानता हूँ… जिसे राजवीर ने कभी पूरा प्यार नहीं दिया।”


तभी दरवाज़ा खुला।


शालिनी खड़ी थी।


उसके चेहरे पर आंसू नहीं थे।


सिर्फ ठंडा सच।


“तो आखिर तुम दोनों मिल ही गए।”


कमरे में सन्नाटा।


“हाँ… मैंने जहर दिया।”


आरमान की दुनिया टूट गई।


“लेकिन कारण तुम सोच भी नहीं सकते।”


“तुम्हारे पिता ने पहले धोखा दिया था।”


“और मैं सिर्फ अपना हक ले रही थी।”


हवा भारी हो गई।


अब खेल खुलकर सामने है।

  • अद्वैत सच बोल रहा है या चाल चल रहा है?
  • क्या शालिनी अकेली है?
  • क्या राजवीर सच में निर्दोष थे?

PART 17 में:

शालिनी का पूरा सच सामने आएगा।
और तय होगा — कौन वारिस बनेगा, और कौन खत्म होगा।

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