छुपा हुआ अमीरज़ादा (विरासत की जंग) – A Suspense Thriller Hindi Novel

PART 15: असली चेहरा

रात 10:30 बजे।

मल्होत्रा हवेली की छत पर तेज़ हवा चल रही थी।

आसमान में काले बादल थे।


आरमान और सिया वहीं खड़े थे।

और उनके सामने… नैना।


उसकी आँखों में डर नहीं था।

सिर्फ आग थी।


“तुम जानना चाहते हो मैं कौन हूँ?”
नैना ने धीमे लेकिन ठंडे स्वर में कहा।


“तो सुनो।”


20 साल पहले…


एक छोटी कंपनी थी — “सिंह इंफ्राटेक।”

उसके मालिक थे — रुद्र के पिता।


लेकिन उस कंपनी में एक और साइलेंट पार्टनर था।


राजवीर मल्होत्रा।


और…


नैना के पिता।


आरमान स्तब्ध रह गया।


“मेरे पिता ने तुम्हारे पिता पर भरोसा किया।”

“लेकिन जब घाटा हुआ…”

“तो सारा दोष उनके सिर मढ़ दिया गया।”


सिया ने बीच में कहा—

“लेकिन रिकॉर्ड तो कुछ और कहते हैं।”


नैना हँसी।


“रिकॉर्ड वही कहते हैं जो ताकतवर लोग चाहते हैं।”


नैना ने एक फाइल आगे बढ़ाई।


उसमें पुराने एग्रीमेंट पेपर्स थे।


और एक साइन…


राजवीर मल्होत्रा का।


लेकिन उसके नीचे एक और साइन था।


“आर. मल्होत्रा”


आरमान की सांस अटक गई।


“ये… मेरा साइन नहीं है।”


नैना आगे झुकी।


“नहीं।”

“ये तुम्हारे दादा का है।”


सच का दूसरा चेहरा


नैना ने कहा—

“तुम्हारा परिवार शुरू से निर्दोष नहीं था।”


“तुम्हारे दादा ने पहले सौदा किया।”

“तुम्हारे पिता ने उसे छुपाया।”

“और तुम…”


“तुम उस खेल का वारिस हो।”


आरमान की आँखों में गुस्सा उभर आया।


“तो तुमने मेरे पिता को जहर दिया?”


नैना चुप रही।


फिर बोली—


“मैंने सिर्फ खेल शुरू किया।”


“जहर…”


“किसी और ने दिया।”


सिया चौंक गई।


“कौन?”


नैना ने धीरे से कहा—


“वो… जिसे तुम सबसे ज्यादा भरोसेमंद मानते हो।”


हवा और तेज़ चलने लगी।


आरमान के दिमाग में एक ही चेहरा घूम रहा था।


विक्रम।


लेकिन…


क्या सच इतना सीधा हो सकता है?


नैना ने आखिरी वार किया—


“AR Holdings मेरी नहीं है।”


“वो तुम्हारे पिता ने खुद बनाई थी।”


“और उसमें असली डायरेक्टर…”


“तुम नहीं हो।”


आरमान का दिल तेज़ धड़कने लगा।


“तो कौन?”


नैना की आँखों में एक अजीब चमक आई।


“तुम्हारा सौतेला भाई।”


जैसे आसमान फट गया हो।


“क्या?”


सिया पीछे हट गई।


“राजवीर मल्होत्रा का एक और बेटा था।”


“जिसे दुनिया नहीं जानती।”


“वही है असली… छुपा हुआ अमीरज़ादा।”


कमरे में सन्नाटा छा गया।


आरमान के पैरों तले जमीन खिसक गई।


“उसका नाम…”


नैना ने फुसफुसाया—


“अद्वैत।”


और वो मुड़कर चली गई।


🔥 अब कहानी पूरी तरह बदल चुकी है।

  • राजवीर का एक और बेटा है।
  • AR Holdings उसके नाम पर है।
  • नैना बदला चाहती है, लेकिन हत्यारी शायद नहीं है।
  • विक्रम अब भी शक के घेरे में है।

PART 16 में:

अद्वैत की एंट्री होगी।
और पता चलेगा कि असली खेल किसने रचा।
क्या भाई बनेंगे दुश्मन?

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