PART 14: डायरी का रहस्य
संजीव की मौत के बाद सब कुछ और उलझ गया था।
पुलिस ने विक्रम को पूछताछ के लिए बुलाया।
लेकिन…
विक्रम अजीब तरह से शांत था।
“अगर मैं मास्टरमाइंड होता… तो यहाँ खड़ा नहीं होता।”
उसकी आवाज में डर नहीं था।
बल्कि…
चुनौती थी।
उसी रात – हवेली
आरमान अपने पिता का पुराना कमरा टटोल रहा था।
उसे यकीन था—
राजवीर ने कुछ और छोड़ा है।
दीवार के पास पुरानी बुकशेल्फ।
जब उसने एक खास किताब खींची—
टक।
दीवार हल्की सी खिसकी।
पीछे…
एक छोटा सा गुप्त कमरा।
अंदर सिर्फ एक मेज़।
और उस पर—
पुरानी चमड़े की डायरी।
आरमान के हाथ काँप गए।
उसने डायरी खोली।
पहला पन्ना
“अगर ये डायरी तुम्हें मिले… तो समझना कि सच्चाई अब सामने आने का समय है।”
दूसरा पन्ना
“विक्रम मेरा दुश्मन नहीं है।”
आरमान ठिठक गया।
तीसरा पन्ना
“असली खतरा उस इंसान से है… जो हमारे घर के बहुत करीब है।”
दिल की धड़कन तेज़।
चौथा पन्ना
“20 साल पहले मैंने एक सौदा किया था।”
“मैंने अपने परिवार को बचाने के लिए… एक और परिवार की कुर्बानी दी।”
आरमान के माथे पर पसीना आ गया।
पाँचवाँ पन्ना
“उस सौदे में एक और नाम था…”
पन्ना फटा हुआ था।
जैसे किसी ने जानबूझकर हटाया हो।
तभी सिया अंदर आई।
“कुछ मिला?”
आरमान ने डायरी आगे बढ़ाई।
सिया ने आखिरी पन्ना देखा।
डायरी के पीछे कवर के अंदर…
हल्की सी उभरी हुई स्याही।
जब उसने टॉर्च की रोशनी डाली—
एक नाम उभरा।
“नैना।”
आरमान की सांस रुक गई।
नैना?
वो नाम उसने पहले सुना था।
कहाँ?
FLASHBACK
राजवीर के अंतिम संस्कार में…
एक औरत दूर खड़ी थी।
काले कपड़ों में।
आँखों में अजीब सी चमक।
सिया ने धीरे से कहा—
“वो कंपनी की HR हेड है।”
उसी वक्त
आरमान का फोन बजा।
अनजान नंबर।
उसने उठाया।
दूसरी तरफ एक महिला की आवाज।
“तुम्हारे पिता ने जो शुरू किया था… उसे खत्म करने का समय आ गया है।”
आरमान का दिल जम गया।
“कौन?”
हल्की हँसी।
“नैना।”
कॉल कट।
अब तस्वीर बदल चुकी है।
- विक्रम शायद दोषी नहीं।
- संजीव मोहरा था।
- AR Holdings के पीछे कोई और है।
- नैना… 20 साल पुराने सौदे से जुड़ी है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—
नैना मल्होत्रा परिवार से इतनी नफरत क्यों करती है?
PART 15 में:
नैना का असली चेहरा सामने आएगा।
20 साल पुराना सौदा खुलकर सामने आएगा।
और आरमान को पता चलेगा कि “छुपा हुआ अमीरज़ादा” असल में कौन है।