छुपा हुआ अमीरज़ादा (विरासत की जंग) – A Suspense Thriller Hindi Novel

PART 12: पोस्टमार्टम रिपोर्ट

शाम 7:40 बजे।

बोर्ड मीटिंग खत्म हो चुकी थी।

लेकिन असली तूफान अब शुरू होने वाला था।


आरमान के हाथ में एक नई फाइल थी।


पोस्टमार्टम रिपोर्ट।


जिसे अब तक “हार्ट अटैक” कहकर बंद कर दिया गया था।


सिया ने धीरे से कहा—

“अगर इसमें कुछ और निकला… तो पूरी कहानी बदल जाएगी।”


रिपोर्ट खोली गई।


पहला पेज।

Cause of Death: Cardiac Arrest.


दूसरा पेज।


एक छोटी सी लाइन।


“टॉक्सिक सब्सटेंस के हल्के अंश पाए गए।”


आरमान का दिल बैठ गया।


“टॉक्सिक?”


सिया ने पन्ना पलटा।


रिपोर्ट में लिखा था—


“ज़हर की मात्रा कम थी, लेकिन नियमित दी जाए तो घातक हो सकती है।”


मतलब…


राजवीर की मौत प्राकृतिक नहीं थी।


उन्हें धीरे-धीरे मारा गया।


कमरे में खामोशी छा गई।


किसने?


आरमान ने याद किया—

  • दवाई कौन देता था?
  • खाना कौन बनाता था?
  • कौन रोज उनके साथ बैठता था?

शालिनी।


लेकिन… क्या वो सच में ऐसा कर सकती थी?


तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।


इंस्पेक्टर अजय मेहरा अंदर आए।


“हमें भी यही रिपोर्ट मिली है।”


“और हमने हवेली के किचन से कुछ सैंपल भी लिए हैं।”


आरमान की साँस अटक गई।


“क्या मिला?”


इंस्पेक्टर ने सीधे जवाब नहीं दिया।


उन्होंने एक फोटो टेबल पर रखी।


वो फोटो थी—


राजवीर के दवाई के डिब्बे की।


जिस पर फिंगरप्रिंट साफ दिख रहे थे।


लेकिन वो फिंगरप्रिंट शालिनी के नहीं थे।


वो थे—


संजीव गुप्ता।


कंपनी का पुराना मैनेजर।


जो पिछले 25 साल से मल्होत्रा परिवार के साथ था।


कमरे में सन्नाटा छा गया।


“संजीव?” सिया ने फुसफुसाया।


इंस्पेक्टर बोले—


“संजीव पिछले दो दिनों से गायब है।”


“और उसके बैंक अकाउंट में हाल ही में 200 करोड़ ट्रांसफर हुए हैं।”


आरमान की आँखें फैल गईं।


“200 करोड़?”


“बाकी 600 करोड़?”


इंस्पेक्टर ने गंभीर आवाज में कहा—


“यही तो सवाल है।”


“800 करोड़ का नुकसान… और 200 करोड़ संजीव के पास।”


“बाकी पैसा कहाँ गया?”


अचानक सिया को कुछ याद आया।


“रुको…”


“कंपनी के इंटरनल सर्वर में एक शेल कंपनी थी।”


“नाम था — AR Holdings.”


आरमान चौंक गया।


“AR?”


उसके दिमाग में बिजली कौंधी।


“AR… मतलब Armaan Rajveer?”


क्या उसके नाम से कोई कंपनी चल रही थी?


और उसे पता भी नहीं था?


विक्रम अचानक कमरे में आया।


उसके हाथ में एक और फाइल थी।


“मुझे भी कुछ मिला है।”


“AR Holdings… उसके डायरेक्टर का नाम…”


वो रुका।


कमरे में सबकी धड़कनें तेज हो गईं।


“आरमान मल्होत्रा।”


आरमान के हाथ से फाइल गिर गई।


“ये… ये झूठ है…”


“मैंने कभी…”


इंस्पेक्टर ने गंभीर आवाज में कहा—


“कागज़ों में तुम डायरेक्टर हो।”


“और उसी कंपनी में 600 करोड़ ट्रांसफर हुए हैं।”


कमरा घूमने लगा।


क्या कोई उसे फंसा रहा था?


या…


क्या सच में उसे अपने अतीत की कुछ याद नहीं?


तभी सिया ने धीरे से कहा—


“आरमान…”


“तुम पिछले साल 6 महीने विदेश में थे…”


“और उस दौरान…”


“तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था।”


आरमान की आँखें फैल गईं।


उसे धुंधली याद आई—


हॉस्पिटल।

ब्लैंक पीरियड।


क्या उसी दौरान किसी ने उसके नाम का इस्तेमाल किया?


या…


क्या उसे कुछ याद नहीं… क्योंकि वो खुद इसमें शामिल था?


🔥 अब कहानी और खतरनाक मोड़ पर है।

  • संजीव गायब है।
  • 200 करोड़ उसके पास हैं।
  • 600 करोड़ आरमान के नाम वाली कंपनी में।
  • राजवीर की मौत ज़हर से हुई।
  • और आरमान खुद शक के घेरे में है।

PART 13 में:

संजीव का ठिकाना मिलेगा।
और आरमान के एक्सीडेंट की सच्चाई सामने आएगी।
क्या वो शिकार है… या खिलाड़ी?

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