PART 11: बोर्डरूम का युद्ध
सुबह 9:55 बजे।
मल्होत्रा ग्रुप का हेड ऑफिस।
शीशे की इमारत के बाहर मीडिया की भीड़ थी।
अंदर बोर्डरूम में 14 लोग बैठे थे।
- सीनियर शेयरहोल्डर्स
- लीगल एडवाइज़र
- ऑडिटर
- और परिवार
आरमान दरवाज़ा खोलकर अंदर आया।
सिया उसके पीछे थी।
विक्रम पहले से मौजूद था।
शालिनी शांत बैठी थी।
कमरे में तनाव घुला हुआ था।
मीटिंग शुरू
कंपनी के सीएफओ ने रिपोर्ट पढ़नी शुरू की।
“पिछले छह महीनों में कंपनी को 800 करोड़ का नुकसान हुआ है।”
कमरे में फुसफुसाहट शुरू हो गई।
आरमान ने फाइल टेबल पर रखी।
“ये नुकसान accident नहीं है।”
“ये प्लान किया गया है।”
सबकी नजरें उसकी तरफ उठ गईं।
सबूत
आरमान ने स्क्रीन ऑन की।
पेन ड्राइव वाला वीडियो चलाया।
राजवीर की आवाज गूंजी—
“मेरी कंपनी में एक साइलेंट पार्टनर है… जिसे दुनिया नहीं जानती।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
एक बुज़ुर्ग शेयरहोल्डर ने पूछा—
“कौन?”
आरमान ने स्क्रीन पर एक नाम फ्लैश किया।
“रुद्र प्रताप सिंह”
कमरे में हलचल मच गई।
सिया ने कहा—
“20 साल पहले मल्होत्रा ग्रुप ने जिस स्टार्टअप को डुबोया था… वो रुद्र के पिता की कंपनी थी।”
“उसके बाद उनके परिवार की बर्बादी हुई।”
“और अब…”
“रुद्र वापस आया है।”
दरवाज़ा फिर खुला।
धीरे-धीरे अंदर आया एक शख्स।
सूट पहने। शांत। आत्मविश्वासी।
“मुझे बुलाया गया?”
वो था — रुद्र प्रताप सिंह।
उसकी आँखों में नफरत थी।
“राजवीर मल्होत्रा ने मेरे पिता को जेल भेजा था।”
“उन्होंने सच्चाई छुपाई।”
“और आज मैं सिर्फ हिसाब बराबर कर रहा हूँ।”
विक्रम अचानक बोला—
“झूठ।”
सब चौंक गए।
विक्रम ने टेबल पर एक फाइल फेंकी।
“ये असली ऑडिट रिपोर्ट है।”
“राजवीर ने तुम्हारे पिता को नहीं… बचाया था।”
रुद्र का चेहरा बदल गया।
“क्या मतलब?”
विक्रम ने कहा—
“तुम्हारे पिता ने खुद कंपनी के फंड्स मिसयूज़ किए थे।”
“राजवीर ने केस दबाया… ताकि तुम्हारा परिवार बर्बाद न हो।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
रुद्र के हाथ काँपने लगे।
“नहीं… ये झूठ है…”
सिया ने स्क्रीन पर बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड दिखाए।
सबूत साफ था।
लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती।
अचानक लीगल एडवाइज़र खड़ा हुआ।
“अगर ये सच है… तो एक सवाल बाकी है।”
“800 करोड़ का नुकसान किसने करवाया?”
कमरे में फिर खामोशी।
सबकी नजरें एक-दूसरे पर।
आरमान धीरे से बोला—
“अगर रुद्र मोहरा था…”
“तो असली खिलाड़ी कौन है?”
तभी…
स्क्रीन खुद-ब-खुद ऑन हो गई।
एक नया वीडियो चला।
वीडियो में राजवीर और…
विक्रम साथ बैठे थे।
और राजवीर कह रहे थे—
“अगर मेरे साथ कुछ होता है… तो समझना कि खतरा बाहर से नहीं… अंदर से है।”
विक्रम का चेहरा सख्त हो गया।
कमरे में सांसें रुक गईं।
क्या विक्रम…?
या कोई और… जो अभी तक सामने नहीं आया?
🔥 अब खेल और गहरा हो चुका है।
- रुद्र शायद मोहरा था।
- विक्रम पर शक गहरा गया है।
- 800 करोड़ का नुकसान अभी भी अनसुलझा है।
- राजवीर की मौत… क्या वाकई हादसा थी?
PART 12 में:
राजवीर की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आएगी।
और एक ऐसा नाम उजागर होगा… जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।