PART 10: लॉकर के भीतर का सच
रात के 2:10 बजे।
बाहर तूफ़ान था।
बिजली आसमान को चीर रही थी।
हवेली के तीसरे फ्लोर पर एक कमरा था… जहाँ बहुत कम लोग जाते थे।
राजवीर मल्होत्रा का निजी ऑफिस।
दीवार के पीछे एक छुपा हुआ लॉकर था।
जिसका पासकोड सिर्फ तीन लोगों को पता था—
- राजवीर
- विक्रम
- और… शालिनी
लेकिन राजवीर ने मरने से पहले एक और इंतज़ाम किया था।
डायरी के आखिरी पन्ने पर एक कोड छुपा था।
आरमान और सिया उसी कोड के सामने खड़े थे।
“अगर ये काम कर गया… तो शायद सब साफ हो जाएगा।”
सिया ने फुसफुसाकर कहा।
आरमान ने काँपते हाथों से नंबर डाला।
4… 7… 1… 9…
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर—
क्लिक।
लॉकर खुल गया।
अंदर क्या था?
कोई कैश नहीं।
कोई ज्वेलरी नहीं।
सिर्फ तीन चीज़ें।
- एक पेन ड्राइव
- एक लिफाफा जिस पर लिखा था – “मेरे बेटे के लिए”
- एक पुरानी फोटो
आरमान का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
पहले लिफाफा
उसने लिफाफा खोला।
अंदर राजवीर का हाथ से लिखा खत था।
“अगर तुम ये पढ़ रहे हो… तो शायद मैं इस दुनिया में नहीं हूँ।”
“मुझे शक है कि मेरे सबसे करीब लोग ही मेरे खिलाफ साज़िश कर रहे हैं।”
“लेकिन सच्चाई सीधी नहीं है…”
“जिसे तुम दुश्मन समझोगे… वो शायद मोहरा हो।”
आरमान की साँस अटक गई।
“असली खतरा… उस इंसान से है जिसे मैं सबसे ज्यादा भरोसेमंद मानता था।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
“सबसे ज्यादा भरोसेमंद?” सिया ने दोहराया।
विक्रम?
शालिनी?
संजीव?
अब पेन ड्राइव
आरमान ने लैपटॉप में पेन ड्राइव लगाई।
एक वीडियो फाइल खुली।
स्क्रीन पर राजवीर दिखाई दिए।
थके हुए।
लेकिन आँखों में दृढ़ता।
“अगर ये वीडियो बाहर आए… तो समझना कि खेल बहुत गहरा है।”
“मेरी कंपनी में एक बाहरी निवेशक है…”
“जिसे दुनिया नहीं जानती।”
“और वो सिर्फ पैसा नहीं… बदला चाहता है।”
आरमान का दिल धड़कने लगा।
“बदला?”
वीडियो में राजवीर बोले—
“20 साल पहले मैंने एक परिवार को बर्बाद किया था…”
“और आज वही परिवार मेरे पीछे है।”
वीडियो अचानक रुक गया।
जैसे किसी ने रिकॉर्डिंग बीच में बंद कर दी हो।
“बाकी हिस्सा कहाँ है?” सिया ने घबराकर कहा।
आरमान ने फोल्डर देखा।
एक और फाइल थी।
लेकिन वो पासवर्ड प्रोटेक्टेड थी।
पासवर्ड hint लिखा था—
“उसका नाम… जिसे मैंने खो दिया।”
आरमान की आँखें फैल गईं।
“माँ…”
उसने अपनी माँ का नाम टाइप किया।
एंटर दबाया।
फाइल खुल गई।
वीडियो फिर चला।
राजवीर की आँखों में आँसू थे।
“अगर मेरा बेटा कभी ये देखे…”
“तो उसे बताना कि मैंने उसकी माँ से धोखा नहीं किया।”
“वो सच्चाई जानती थी।”
“और वो इस खेल का हिस्सा नहीं थी।”
“लेकिन असली साइलेंट पार्टनर… परिवार से बाहर है।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
सिया ने धीरे से कहा—
“तो माँ नहीं…?”
आरमान के दिमाग में सब उलझ गया।
तो शालिनी मोहरा है?
या विक्रम?
या कोई ऐसा… जो अब तक सामने ही नहीं आया?
अचानक
दरवाज़ा खुला।
विक्रम खड़ा था।
उसकी नजरें सीधी स्क्रीन पर।
“तो तुम लोग यहाँ तक पहुँच ही गए।”
लेकिन उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था।
थकान थी।
“सच जानना चाहते हो?”
“तो कल सुबह 10 बजे बोर्ड मीटिंग में आना।”
“वहाँ सबके सामने… सब बताएँगे।”
और वो चला गया।
अब खेल खुलकर होगा।
बोर्ड मीटिंग।
शेयरहोल्डर्स।
सबूत।
सत्ता की लड़ाई।
लेकिन…
क्या विक्रम सच में सब बताएगा?
या ये नया जाल है?
PART 11 में:
बोर्डरूम का युद्ध।
और एक ऐसा खुलासा… जो पूरी कहानी को पलट देगा।