अंधेरे राज का दरवाज़ा – एक रोमांचक मिस्ट्री उपन्यास

भाग 7: अंतिम टकराव

अध्याय 31: सामना

हॉल में ठंडी हवा चल रही थी।

आरव, रिया और माया—तीनों आमने-सामने खड़े थे।

रिया की आंखों में डर था…

माया की आंखों में आग।

“तुमने मुझे मरने के लिए छोड़ दिया…” माया की आवाज गूंजी।

आरव ने धीरे से कहा—

“मैंने जानबूझकर नहीं किया…”


अध्याय 32: बदले की आग

माया जोर से हंसी—

“गलती से भी अगर कोई मर जाए… तो क्या वो माफ हो जाता है?”

आरव चुप हो गया।

उसके पास कोई जवाब नहीं था।

रिया ने आगे बढ़कर कहा—

“माया, बस करो… ये रास्ता सही नहीं है…”

माया ने उसे घूरा—

“तुम हमेशा कमजोर रही हो…”


अध्याय 33: टूटता रिश्ता

रिया की आंखों में आंसू आ गए।

“मैं तुम्हारी बहन हूँ…”

माया चिल्लाई—

“और मैं तुम्हारी परछाई!”

अचानक माया ने पास पड़ी लोहे की रॉड उठा ली।

आरव के दिल की धड़कन तेज हो गई।


अध्याय 34: आखिरी मौका

“तुम्हारे पास एक आखिरी मौका है…” माया बोली।

“या तो तुम अपनी गलती मानकर सजा लो… या मैं तुम्हें खत्म कर दूंगी…”

आरव ने आंखें बंद कर लीं।

कुछ पल की खामोशी…

फिर उसने कहा—

“मैं अपनी गलती मानता हूँ…”


अध्याय 35: फैसला

हॉल में सन्नाटा छा गया।

रिया ने उम्मीद भरी नजरों से माया को देखा।

माया कुछ पल के लिए रुकी…

फिर धीरे-धीरे मुस्कुराई।

“बहुत देर कर दी…”


क्लिफहैंगर अंत

माया ने अचानक रॉड उठाई—

और पूरी ताकत से आरव की तरफ वार किया।

रिया चीखी—

“नहीं!!!”

लेकिन उसी पल…

आरव ने रॉड पकड़ ली।

उसकी आंखों में अब डर नहीं था…

बल्कि एक अजीब सा सुकून।

उसने धीरे से कहा—

“अब खेल खत्म होगा…”

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