भाग 6: असली चेहरा, नकली ज़िंदगी
अध्याय 26: आमना-सामना
आरव के सामने वही खड़ा था…
उसका दूसरा रूप।
एकदम वैसा ही चेहरा… वही आंखें… वही आवाज।
“डर गए?” दूसरे आरव ने मुस्कुराते हुए कहा।
असली आरव पीछे हट गया—
“तुम… कौन हो?”
अध्याय 27: आईने का सच
दूसरा आरव धीरे-धीरे उसके चारों तरफ घूमने लगा।
“मैं तुम ही हूँ…” उसने फुसफुसाया।
“तुम्हारा वो हिस्सा… जिसे तुमने छुपा दिया।”
दीवारों पर लगे आईने फिर चमकने लगे।
हर आईने में अब दो आरव दिखाई दे रहे थे।
अध्याय 28: टूटी हुई पहचान
“3 साल पहले… उस रात…”
दूसरे आरव की आवाज गूंज रही थी—
“तुम डर गए थे…”
“तुम्हें लगा तुमने उन्हें मार दिया…”
“लेकिन सच कुछ और था…”
असली आरव चिल्लाया—
“बस! मुझे सच जानना है!”
अध्याय 29: असली घटना
अचानक पूरा हॉल बदलने लगा।
आरव खुद को फिर उसी रात में पाया।
रिया और माया उसके सामने थीं।
लेकिन इस बार…
खून नहीं था।
बल्कि—
रिया जमीन पर बेहोश पड़ी थी।
और माया… गुस्से में आरव पर हमला कर रही थी।
“तुम हमें छोड़ नहीं सकते!”
आरव ने खुद को बचाने के लिए धक्का दिया—
माया पीछे गिरी… और उसके सिर पर चोट लगी।
सन्नाटा।
अध्याय 30: छुपा हुआ अपराध
“तुमने उसे मारा नहीं…” दूसरे आरव ने कहा।
“लेकिन तुमने उसे बचाया भी नहीं…”
असली आरव की आंखों से आंसू निकल पड़े।
“मैं डर गया था…”
“और तुम भाग गए…”
“तुमने सब कुछ छुपा दिया… और खुद से झूठ बोलते रहे…”
क्लिफहैंगर अंत
अचानक माया की आवाज फिर गूंजी—
“अब सच जान चुके हो…”
हॉल में ठंडी हवा चलने लगी।
रिया धीरे-धीरे उठी… उसकी आंखें अब सामान्य थीं।
लेकिन माया…
अंधेरे से बाहर आई—
जिंदा… और पहले से भी ज्यादा खतरनाक।
उसने मुस्कुराकर कहा—