अंधेरे राज का दरवाज़ा – एक रोमांचक मिस्ट्री उपन्यास

भाग 4: यादों का खून

अध्याय 16: वो रात

आरव ज़मीन पर पड़ा था… सांसें तेज… आँखें बंद…

और फिर—

यादें साफ होने लगीं।

3 साल पहले की रात…

तेज बारिश… बिजली की गड़गड़ाहट…

और वही पुरानी हवेली।

आरव दरवाज़ा खोलता है… और अंदर दो लड़कियाँ खड़ी हैं—

रिया… और माया।


अध्याय 17: धोखा

“तुमने कहा था हमें बचाओगे…” रिया रो रही थी।

माया चुप थी… लेकिन उसकी आँखों में गुस्सा था।

आरव धीरे-धीरे उनके करीब आया।

“मैं तुम्हारी मदद करूंगा…” उसने कहा।

लेकिन उसके हाथ में… एक लोहे की रॉड थी।


अध्याय 18: पहला वार

अचानक—

आरव ने वार किया।

रिया चीख उठी।

माया ने उसे रोकने की कोशिश की…

लेकिन देर हो चुकी थी।

खून… हर तरफ खून…

और फिर—सन्नाटा।


अध्याय 19: सच से भागना

“नहीं… नहीं… मैंने ऐसा नहीं किया…”

आरव वर्तमान में वापस आया।

उसका पूरा शरीर कांप रहा था।

“ये झूठ है… ये सब झूठ है…”

तभी आईने में फिर वही चेहरा दिखा—

माया।

इस बार उसकी आँखों में सिर्फ नफरत थी।


अध्याय 20: वापसी

“झूठ से भाग नहीं सकते, आरव…”

माया की आवाज गूंजी।

“तुमने हमें मारा… और फिर सब कुछ छुपा दिया…”

आरव चीखा—

“चुप हो जाओ!”

तभी…

पीछे से एक ठंडी उंगली उसके कंधे पर पड़ी।


क्लिफहैंगर अंत

आरव धीरे-धीरे पीछे मुड़ा…

और उसका दिल रुक गया।

उसके सामने… रिया खड़ी थी। जिंदा।

लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं…

और उसके होंठों पर एक डरावनी मुस्कान—

“अब तुम्हारी बारी है…”

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