अंधेरे राज का दरवाज़ा – एक रोमांचक मिस्ट्री उपन्यास

अध्याय 6: अंधेरे में सच्चाई

पूरा हॉल अंधेरे में डूब चुका था।

आरव की सांसें तेज हो गईं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

“कौन है वहाँ?” उसने कांपती आवाज में पूछा।

कोई जवाब नहीं।

अचानक… पीछे से किसी के कदमों की आहट।

टप… टप… टप…

आरव ने तुरंत मुड़कर देखा—पर वहाँ कोई नहीं था।

तभी उसके कान के पास एक फुसफुसाहट हुई—

“तुम बहुत देर से आए हो…”


अध्याय 7: गायब होती रिया

लाइट वापस आई।

आरव ने तुरंत चारों तरफ देखा।

रिया गायब थी।

इंस्पेक्टर वर्मा अभी भी कुर्सी पर बंधा था।

“वो कहाँ गई?” आरव चिल्लाया।

वर्मा ने डरते हुए कहा—

“वो इंसान नहीं है… वो तुम्हारे दिमाग से खेल रही है…”

आरव गुस्से में आ गया—

“साफ-साफ बताइए!”

वर्मा की आंखों में डर साफ दिख रहा था।

“3 साल पहले… रिया अकेली नहीं थी…”


अध्याय 8: दूसरा नाम

“उसके साथ एक और लड़की थी…” वर्मा ने धीरे से कहा।

“नाम?”

कुछ पल की खामोशी…

फिर वर्मा बोला—

“रिया का जुड़वा… माया।”

आरव चौंक गया।

“जुड़वा? लेकिन किसी को पता क्यों नहीं?”

वर्मा ने आंखें बंद कर लीं—

“क्योंकि… माया मर चुकी थी।”


अध्याय 9: मौत जो हुई ही नहीं

“माया की मौत 10 साल पहले हो गई थी…”

“लेकिन…” वर्मा कांपते हुए बोला—

“उसकी लाश कभी नहीं मिली।”

आरव के दिमाग में सब कुछ घूमने लगा।

“तो क्या… वो माया है?”

वर्मा चिल्लाया—

“नहीं! बात उससे भी ज्यादा खतरनाक है!”

तभी…

हॉल के कोने में लगी स्क्रीन अपने आप चालू हो गई।


अध्याय 10: खेल का पहला नियम

स्क्रीन पर वही लड़की दिखाई दी—रिया… या माया…

वो मुस्कुरा रही थी।

“स्वागत है, आरव…”

उसकी आवाज पूरे हॉल में गूंज गई।

“तुम अब इस खेल का हिस्सा बन चुके हो।”

आरव चिल्लाया— “ये सब बंद करो!”

लड़की हंसी—

“इस खेल का पहला नियम है…”

“सच पर भरोसा मत करो।”


क्लिफहैंगर अंत

अचानक कुर्सी पर बंधे इंस्पेक्टर वर्मा की गर्दन अपने आप झटके से मुड़ गई।

आरव चीख उठा—

“नहीं!!!”

स्क्रीन पर लड़की की मुस्कान और गहरी हो गई—

“अब तुम अकेले हो…”

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