अधूरी मोहब्बत से पूरी जिंदगी तक – एक सच्ची प्रेम कहानी (New Hindi Love Story Novel 2026)

📖 Chapter 9

पहली बार “पापा” — एक शब्द, जिसने पाँच साल का खालीपन भर दिया

कुछ पल…

पूरी जिंदगी बदल देते हैं।

और आज…

आरव की जिंदगी का वही पल था।


काव्या के घर के बाहर खड़ा आरव…

पाँच साल का दर्द अपने सीने में लिए…

दरवाज़े को देख रहा था।

उसका दिल बहुत तेज धड़क रहा था।

उसके हाथ ठंडे थे।

और उसकी आँखों में…

डर था।

उम्मीद थी।

और एक सवाल—

क्या रिया उसे accept करेगी?


काव्या ने दरवाज़ा खोला।

वो चुपचाप उसे अंदर ले गई।

घर छोटा था।

लेकिन…

उसमें warmth थी।

दीवारों पर paintings थीं।

Books थीं।

और…

रिया की photos थीं।

हर photo में…

वो मुस्कुरा रही थी।

आरव उन photos को देखता रहा।

हर photo…

उसके दिल में एक नई feeling पैदा कर रही थी।

ये उसकी बेटी थी।

उसका खून।

उसकी दुनिया।

और वो…

पाँच साल तक उसके बिना जीता रहा।


“रिया अंदर है…”
काव्या ने धीरे से कहा।

आरव की साँस रुक गई।


रिया floor पर बैठी drawing बना रही थी।

वो innocent थी।

छोटी थी।

और खूबसूरत थी।

बिल्कुल…

काव्या जैसी।

और…

थोड़ी सी आरव जैसी।


“रिया…”
काव्या ने प्यार से कहा।

“देखो, कौन आया है।”

रिया ने पीछे मुड़कर देखा।

“Photographer uncle!”

वो खुश हो गई।

और दौड़कर उसके पास आई।

“आप फिर से आए!”

आरव की आँखों में आँसू आ गए।

वो झुका।

और उसके level पर बैठ गया।

“हाँ…”

उसकी आवाज़ काँप रही थी।

“मैं फिर से आया…”


रिया ने पूछा,

“आप रो क्यों रहे हो?”

आरव मुस्कुराया।

“क्योंकि… मैं खुश हूँ।”


रिया ने अपना छोटा सा हाथ उसके गाल पर रखा।

“मम्मा कहती हैं… boys नहीं रोते…”

आरव हल्का सा हँसा।

“कभी-कभी… रोते हैं।”


रिया ने उसे अपनी drawing दिखाई।

“देखो! ये मैं हूँ… और ये मम्मा हैं…”

आरव ने पूछा,

“और ये तीसरा कौन है?”

रिया चुप हो गई।

फिर धीरे से बोली,

“ये… मेरे पापा हैं…”

आरव की साँस रुक गई।

उसने drawing को ध्यान से देखा।

एक stick figure।

जो उसका हाथ पकड़े हुए था।


“क्या तुमने अपने पापा को देखा है?”
आरव ने धीरे से पूछा।

रिया ने सिर हिलाया।

“नहीं…”

“लेकिन मम्मा कहती हैं… वो बहुत अच्छे हैं…”

आरव की आँखों से आँसू बहने लगे।


“क्या तुम उनसे मिलना चाहोगी?”

रिया ने तुरंत कहा,

“हाँ!”

“बहुत!”

“मैं उन्हें didn’t miss करना चाहती…”

उसकी broken Hindi सुनकर…

आरव का दिल भर आया।


उसने धीरे से कहा,

“अगर… वो अभी तुम्हारे सामने हों तो?”

रिया confused हो गई।

“कहाँ?”


आरव ने काँपते हुए हाथ से…

अपने दिल की तरफ इशारा किया।

और धीरे से कहा…

“रिया…”

“मैं…”

उसकी आवाज़ टूट गई।

काव्या पीछे खड़ी रो रही थी।


“मैं तुम्हारा पापा हूँ…”


रिया कुछ seconds तक उसे देखती रही।

जैसे वो समझने की कोशिश कर रही हो।

फिर उसने काव्या की तरफ देखा।

“मम्मा… सच?”

काव्या ने आँसू भरी आँखों से सिर हिलाया।

“हाँ, बेटा…”


रिया ने वापस आरव की तरफ देखा।

और धीरे से पूछा…

“सच में… आप मेरे पापा हो?”

आरव अब रो रहा था।

“हाँ…”


रिया ने बिना कुछ कहे…

उसे गले लगा लिया।

“पापा…”


ये शब्द…

आरव की जिंदगी का सबसे खूबसूरत शब्द था।

उसने उसे कसकर पकड़ लिया।

जैसे वो उसे कभी खोना नहीं चाहता।

पाँच साल का खालीपन…

एक ही पल में भर गया।


काव्या ये सब देख रही थी।

उसकी आँखों में आँसू थे।

लेकिन इस बार…

ये आँसू दर्द के नहीं थे।

ये आँसू…

खुशी के थे।


लेकिन…

अब भी एक फैसला बाकी था।

सबसे बड़ा फैसला।

क्या आरव और काव्या…

फिर से एक हो पाएँगे?

या…

उनकी कहानी यहीं खत्म हो जाएगी?


Chapter 9 समाप्त

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