📖 Chapter 8
The Shocking Truth — कुछ सच दिल तोड़ते नहीं, दिल रोक देते हैं
उस रात…
आरव सो नहीं पाया।
भोपाल के उस hotel room में…
वो छत को देखता रहा।
उसके दिमाग में सिर्फ एक चेहरा था।
काव्या।
और एक सवाल।
रिया कौन है?
उसने खुद को समझाने की कोशिश की।
“ये सोच भी कैसे सकता हूँ मैं…”
“रिया उसकी बेटी है…”
“उसकी शादी हो चुकी थी…”
लेकिन उसका दिल…
उसकी बात मानने को तैयार नहीं था।
क्योंकि जब उसने रिया की आँखों में देखा था…
उसे कुछ जाना-पहचाना महसूस हुआ था।
जैसे…
वो connection…
सिर्फ एक coincidence नहीं था।
अगले दिन…
आरव उसी café में गया।
वही café…
जहाँ उसने पहली बार काव्या से अपने प्यार का इज़हार किया था।
सब कुछ वैसा ही था।
लेकिन वो दोनों…
अब पहले जैसे नहीं थे।
काव्या पहले से वहाँ बैठी थी।
जैसे वो उसका इंतज़ार कर रही थी।
कुछ seconds तक…
दोनों चुप रहे।
फिर आरव ने सीधे पूछा।
“रिया… तुम्हारी बेटी है?”
काव्या ने उसकी आँखों में देखा।
और धीरे से कहा,
“हाँ।”
आरव का दिल भारी हो गया।
लेकिन उसने अगला सवाल पूछा।
वो सवाल…
जिससे वो डर रहा था।
“क्या… वो तुम्हारे husband की बेटी है?”
काव्या की आँखों में आँसू आ गए।
उसने तुरंत जवाब नहीं दिया।
उसकी खामोशी…
सब कुछ कह रही थी।
आरव की धड़कन तेज हो गई।
“काव्या… please… सच बताओ…”
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
काव्या अब रो रही थी।
उसने धीरे से कहा…
“नहीं…”
दुनिया रुक गई।
आरव की साँस रुक गई।
“मतलब?”
काव्या ने आँसू पोंछे।
और वो सच कहा…
जिसने सब कुछ बदल दिया।
“रिया…”
उसकी आवाज़ टूट रही थी।
“रिया तुम्हारी बेटी है, आरव।”
समय रुक गया।
आवाज़ें रुक गईं।
सब कुछ…
खत्म हो गया।
और शुरू भी।
एक साथ।
आरव को लगा…
जैसे उसने गलत सुना हो।
“क्या?”
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
“ये… कैसे possible है?”
काव्या ने रोते हुए कहा,
“याद है… हमारी last meeting से पहले वाली रात?”
आरव की आँखें फैल गईं।
उसे याद था।
वो रात…
जब वो दोनों आखिरी बार hill पर मिले थे।
जब वो दोनों एक-दूसरे के सबसे करीब थे।
Emotionally।
और…
शायद…
उससे भी ज्यादा।
“जब मुझे पता चला कि मैं pregnant हूँ…”
“तब तक मेरी शादी fix हो चुकी थी…”
“मैं डर गई थी, आरव…”
“बहुत डर गई थी…”
आरव की आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे।
“तुमने मुझे बताया क्यों नहीं?”
काव्या ने दर्द से कहा,
“क्योंकि मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहती थी…”
“तुम्हारे dreams…”
“तुम्हारा career…”
“सब कुछ…”
“और तुमने decide कर लिया?”
आरव की आवाज़ टूट गई।
“अकेले?”
काव्या चुप रही।
क्योंकि…
वो सच था।
“मेरे husband को सच पता चल गया था…”
“और इसलिए उन्होंने divorce दे दिया…”
“लेकिन उन्होंने promise किया…”
“कि वो किसी को नहीं बताएँगे…”
आरव अब पूरी तरह टूट चुका था।
पाँच साल…
पाँच साल उसने अपनी बेटी के बिना जी लिए।
बिना ये जाने…
कि वो exist करती है।
“रिया…”
उसने धीरे से कहा।
उसकी आवाज़ में…
प्यार था।
दर्द था।
और regret था।
“क्या वो जानती है… कि मैं उसका father हूँ?”
काव्या ने सिर हिलाया।
“नहीं…”
कुछ seconds तक…
दोनों चुप रहे।
फिर आरव ने वो कहा…
जो उसके दिल में था।
“मैं उससे मिलना चाहता हूँ…”
काव्या ने उसकी आँखों में देखा।
इस बार…
उसकी आँखों में डर नहीं था।
सिर्फ उम्मीद थी।
किस्मत ने…
उन्हें दूसरी chance दिया था।
लेकिन…
क्या वो इस chance को accept करेंगे?
या…
फिर से एक-दूसरे को खो देंगे?