📖 Chapter 7
Unexpected Reunion — कुछ सच, समय से भी ज्यादा देर से सामने आते हैं
पाँच साल बाद…
वो दोनों फिर से आमने-सामने थे।
लेकिन अब…
वो पहले वाले आरव और काव्या नहीं थे।
समय ने दोनों को बदल दिया था।
और शायद…
तोड़ भी दिया था।
Exhibition hall के उस कोने में…
लोगों की भीड़ थी।
लेकिन आरव और काव्या के लिए…
सब कुछ खामोश था।
सिर्फ उनकी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
“मम्मा, मुझे पानी चाहिए…”
छोटी लड़की ने काव्या का हाथ खींचते हुए कहा।
काव्या नीचे झुकी।
“रिया, बेटा… वहाँ बैठो, मैं अभी आती हूँ।”
रिया पास की chair पर जाकर बैठ गई।
आरव ने पहली बार उसका नाम सुना।
रिया।
उसने उसे ध्यान से देखा।
उसकी आँखें…
अजीब तरह से जानी-पहचानी लग रही थीं।
लेकिन उसने उस ख्याल को तुरंत अपने दिमाग से निकाल दिया।
कुछ सेकंड तक…
आरव और काव्या चुप खड़े रहे।
फिर काव्या ने धीरे से कहा,
“कैसे हो?”
एक simple सवाल।
लेकिन जवाब…
बहुत complicated था।
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“जिंदा हूँ।”
काव्या की आँखों में दर्द दिखा।
“तुम बदल गए हो…”
आरव ने धीरे से कहा,
“समय सबको बदल देता है।”
फिर उसने पूछा,
“तुम खुश हो?”
काव्या ने तुरंत जवाब नहीं दिया।
उसने बस रिया की तरफ देखा।
और धीरे से कहा,
“मैं ठीक हूँ।”
आरव समझ गया।
ये “ठीक हूँ”…
असल में “खुश नहीं हूँ” था।
“तुम्हारे… husband नहीं आए?”
आरव ने हिम्मत करके पूछा।
काव्या का चेहरा अचानक serious हो गया।
कुछ सेकंड तक वो चुप रही।
फिर उसने कहा,
“वो… यहाँ नहीं हैं।”
“मतलब?”
काव्या की आँखों में आँसू आ गए।
“हमारी शादी… ज्यादा समय तक नहीं चली।”
आरव shocked था।
“क्या?”
काव्या ने धीरे से कहा,
“शादी के एक साल बाद ही… हमारा divorce हो गया।”
आरव को यकीन नहीं हो रहा था।
जिस शादी के लिए…
उन्होंने अपना प्यार sacrifice किया…
वो शादी ही नहीं बची।
“क्यों?”
आरव ने धीरे से पूछा।
काव्या ने दर्द भरी मुस्कान दी।
“क्योंकि मैंने कभी उनसे प्यार किया ही नहीं…”
ये सुनकर…
आरव का दिल फिर से टूट गया।
और जुड़ भी गया।
एक साथ।
“उन्होंने कभी मुझे समझा ही नहीं…”
“उनके लिए मैं सिर्फ एक responsibility थी…”
“प्यार नहीं…”
काव्या की आँखों से आँसू बह रहे थे।
“और एक दिन… उन्होंने खुद divorce माँग लिया।”
आरव कुछ नहीं बोल पाया।
किस्मत…
कितनी अजीब थी।
जिस प्यार को बचाने के लिए उन्होंने sacrifice किया…
वही sacrifice बेकार चला गया।
“और… रिया?”
आरव ने धीरे से पूछा।
काव्या ने रिया की तरफ देखा।
उसकी आँखों में पहली बार…
सच्ची मुस्कान आई।
“वो मेरी दुनिया है।”
रिया उसी समय दौड़कर आई।
“मम्मा!”
फिर उसने आरव की तरफ देखा।
“आप photographer हो?”
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“हाँ।”
रिया excited हो गई।
“मम्मा भी आपकी photos देख रही थी!”
आरव ने काव्या की तरफ देखा।
काव्या ने नज़रें झुका लीं।
जैसे वो पकड़ी गई हो।
“तुम अब भी मेरी photos देखती हो?”
आरव ने धीरे से पूछा।
काव्या ने सच छुपाने की कोशिश नहीं की।
“हर नई photo…”
“हर exhibition…”
“मैं सब देखती हूँ…”
आरव की आँखों में आँसू आ गए।
“क्यों?”
काव्या ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“क्योंकि…”
“मैं आज भी तुमसे प्यार करती हूँ।”
समय रुक गया।
पाँच साल का दर्द…
एक ही पल में वापस आ गया।
लेकिन इस बार…
उस दर्द में उम्मीद भी थी।
लेकिन…
आरव के मन में एक सवाल अब भी था।
सबसे बड़ा सवाल।
रिया…
उसकी उम्र लगभग 4 साल थी।
मतलब…
वो उसी समय पैदा हुई होगी…
जब काव्या की शादी हुई थी।
या…
उससे पहले?
आरव का दिल तेज धड़कने लगा।
क्या ये possible है?
क्या किस्मत…
इतना बड़ा खेल खेल सकती है?
कहानी अब…
अपने सबसे बड़े सच के करीब पहुँच रही थी।