📖 Chapter 2
दोस्ती — वो रिश्ता, जो प्यार बनने से पहले दिल में घर बना लेता है
उस दिन के बाद…
आरव की जिंदगी पहले जैसी नहीं रही।
पहले उसकी सुबह सिर्फ सूरज की रोशनी से होती थी…
अब एक नाम से होती थी।
काव्या।
तीन दिन बीत गए।
लेकिन काव्या फिर कभी उस बस स्टॉप पर नहीं आई।
आरव रोज वहाँ जाता।
उसी समय।
उसी जगह।
कैमरा हाथ में लेकर।
लेकिन उसकी नज़रें तस्वीरों पर नहीं…
किसी एक चेहरे पर टिकी रहतीं।
विवान, उसका best friend, ये सब देख रहा था।
“भाई, तू photographer से आशिक कब बन गया?” विवान ने हँसते हुए कहा।
आरव ने हल्की मुस्कान दी।
“पता नहीं…”
“नाम क्या है उसका?”
आरव ने धीरे से कहा,
“काव्या…”
विवान ने छेड़ते हुए कहा,
“और madam कहाँ रहती हैं?”
आरव चुप हो गया।
उसे नहीं पता था।
उसे सिर्फ उसका नाम पता था।
और उसकी मुस्कान।
एक हफ्ते बाद…
आरव शहर के एक छोटे से café में बैठा था।
वो वहाँ अक्सर जाता था।
शांत जगह थी।
कम लोग आते थे।
और उसे शांति पसंद थी।
वो अपने laptop में photos edit कर रहा था।
तभी…
एक जानी-पहचानी आवाज आई।
“Excuse me… यहाँ कोई बैठा है?”
आरव का दिल एक पल के लिए रुक गया।
उसने धीरे से ऊपर देखा।
वो काव्या थी।
उसी मुस्कान के साथ।
उसी चमक के साथ।
आरव को यकीन नहीं हो रहा था।
“न… नहीं,” उसने धीरे से कहा।
काव्या उसके सामने बैठ गई।
“तुम मुझे follow तो नहीं कर रहे?” उसने मजाक में कहा।
आरव घबरा गया।
“नहीं! मतलब… मैं तो यहाँ अक्सर आता हूँ…”
काव्या हँस पड़ी।
“Relax, मैं मजाक कर रही हूँ।”
उसकी हँसी…
आरव को अंदर तक सुकून दे रही थी।
“तो photographer साहब,” काव्या ने कहा,
“कितने लोगों की कहानियाँ कैद की हैं आपने?”
आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“आज तक बहुत लोगों की…”
“लेकिन पहली बार… किसी कहानी का हिस्सा बनना चाहता हूँ।”
काव्या कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।
उसका चेहरा गंभीर हो गया।
“हर कहानी खूबसूरत नहीं होती, आरव।”
आरव ने पूछा,
“और हमारी?”
काव्या ने नज़रें झुका लीं।
“पता नहीं…”
उस दिन के बाद…
वो रोज मिलने लगे।
कभी café में।
कभी पार्क में।
कभी बस शहर की सड़कों पर चलते हुए।
वो घंटों बात करते।
Random बातें।
Deep बातें।
सपनों की बातें।
डर की बातें।
आरव ने पहली बार किसी को अपने बारे में सब कुछ बताया।
अपने fears।
अपने dreams।
अपनी loneliness।
और काव्या…
वो बस सुनती रहती।
जैसे वो हमेशा से उसे जानती हो।
एक दिन…
वो दोनों sunset देख रहे थे।
आसमान नारंगी रंग में रंग चुका था।
हवा हल्की ठंडी थी।
काव्या ने अचानक पूछा,
“आरव, तुम अकेले क्यों रहते हो?”
आरव ने कुछ सेकंड सोचा।
फिर कहा,
“क्योंकि मुझे डर लगता है…”
“किससे?”
“किसी को खोने से।”
काव्या चुप हो गई।
उसकी आँखों में हल्की नमी थी।
“अगर कोई खुद ही तुम्हें छोड़ दे तो?”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“तो शायद… मैं फिर कभी किसी से प्यार नहीं कर पाऊँगा।”
काव्या ने धीरे से कहा,
“तो मुझसे मत करना।”
आरव का दिल टूटने जैसा महसूस हुआ।
“क्यों?”
काव्या ने जवाब नहीं दिया।
वो बस आसमान की तरफ देखती रही।
जैसे वो अपने emotions छुपा रही हो।
उस रात…
आरव सो नहीं पाया।
उसके दिमाग में सिर्फ एक सवाल था।
काव्या ने ऐसा क्यों कहा?
लेकिन उसके दिल में…
जवाब पहले से था।
वो काव्या से प्यार करने लगा था।
और शायद…
बहुत गहराई से।