अधूरी मौत का बदला: एक पुनर्जन्म की रहस्यमयी कहानी

अध्याय 9: बंधक

गली में बारिश अब भी तेज़ी से गिर रही थी।

लेकिन उस पल बारिश से भी ज़्यादा ठंडक आरव के दिल में उतर चुकी थी।


उसके फोन की स्क्रीन पर वही फोटो खुली हुई थी।

एक अंधेरा कमरा…

एक कुर्सी…

और उस कुर्सी से बंधा हुआ एक आदमी।


उस आदमी का चेहरा देखकर नैना चीख पड़ी।


“सुरेश अंकल!”


सुरेश का चेहरा सफेद पड़ गया।


“ये… ये कैसे हो सकता है?”


नैना घबराकर बोली —


“लेकिन आप तो हमारे साथ खड़े हैं!”


सुरेश ने फोटो को ध्यान से देखा।


फिर उसकी आवाज़ कांपने लगी।


“यह… मेरा बेटा है।”


आरव ने तुरंत सिर उठाया।


“क्या?”


सुरेश की आँखों में आँसू आ गए।


“उसका नाम रोहित है… वह कॉलेज में पढ़ता है।”


नैना ने धीरे से कहा —


“मतलब विक्रम ने उसे किडनैप कर लिया…”


आरव ने तुरंत फोन में मैसेज खोला।


फोटो के नीचे एक छोटा सा मैसेज लिखा था।


“अगर उसे जिंदा देखना चाहते हो… तो आज रात 11 बजे अकेले आना।”


“लोकेशन अगली मैसेज में।”


सुरेश के हाथ कांप रहे थे।


“नहीं… नहीं… मैं अपने बेटे को कुछ नहीं होने दूँगा…”


नैना ने घबराकर पूछा —


“भैया… क्या यह जाल है?”


आरव ने गहरी सांस ली।


“हाँ।”


“और बहुत खतरनाक जाल है।”


कुछ सेकंड तक तीनों चुप रहे।


फिर सुरेश अचानक आरव के पैरों के पास बैठ गया।


“कृपया… मेरे बेटे को बचा लीजिए…”


“उसकी कोई गलती नहीं है…”


नैना की आँखों में भी आँसू आ गए।


“भैया… हमें कुछ करना होगा।”


आरव चुपचाप खड़ा रहा।


उसके दिमाग में बहुत तेजी से चीज़ें घूम रही थीं।


विक्रम का चेहरा…

बारिश वाली रात…

और चाकू की चमक।


फिर उसने धीरे से कहा —


“मैं जाऊंगा।”


नैना तुरंत बोली —


“नहीं!”


“वह आपको मारने के लिए बुला रहा है!”


आरव ने शांत आवाज़ में कहा —


“मुझे पता है।”


सुरेश ने रोते हुए कहा —


“तो मत जाइए… मैं पुलिस के पास चला जाता हूँ…”


आरव ने सिर हिलाया।


“नहीं।”


“अगर पुलिस आई… तो सबसे पहले रोहित मरेगा।”


नैना ने धीरे से पूछा —


“तो फिर क्या करेंगे?”


आरव की आँखों में एक अजीब चमक आ गई।


“मैं जाल में जाऊंगा…”


“लेकिन इस बार शिकारी कौन होगा… यह विक्रम को नहीं पता।”


उसी समय फोन पर एक और मैसेज आया।


लोकेशन थी —


“पुराना डॉकयार्ड, मुंबई पोर्ट।”


नैना घबरा गई।


“यह जगह बहुत खतरनाक है…”


“रात में वहाँ कोई नहीं जाता।”


आरव ने फोन जेब में रखा।


“इसलिए तो उसने वही जगह चुनी है।”


सुरेश ने धीरे से पूछा —


“आप… सच में जाएंगे?”


आरव ने उसकी आँखों में देखा।


“मैंने पिछले जन्म में बहुत कुछ खोया है।”


“लेकिन इस जन्म में…”


“मैं किसी और को खोने नहीं दूँगा।”


बारिश धीरे-धीरे कम हो रही थी।


लेकिन रात अभी बाकी थी।


और उस रात…


मुंबई के पुराने डॉकयार्ड में…


एक ऐसा सामना होने वाला था…


जो पूरी कहानी बदल देगा।


अगला अध्याय:
अध्याय 10 – “जाल के अंदर”

इस अध्याय में आरव अकेले डॉकयार्ड जाता है… लेकिन वहाँ उसे सिर्फ विक्रम ही नहीं बल्कि कबीर सिंघानिया भी मिलता है।

अध्याय 1 से 9 तक की कहानी में अर्जुन को अपने पिछले जन्म की सच्चाई का एहसास हो चुका है। अब कहानी अपने सबसे खतरनाक मोड़ की तरफ बढ़ रही है — जहाँ बदला, सच्चाई और मौत एक साथ टकराने वाली हैं।

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