
अध्याय 8: विक्रम का पहला संदेश
बारिश अब भी लगातार हो रही थी।
गली के कोने पर खड़े आरव, नैना और सुरेश अभी भी तेज़ सांस ले रहे थे।
लेकिन उस पल सबसे भारी चीज़ थी — सुरेश के हाथ में बजता हुआ फोन।
फोन की स्क्रीन चमक रही थी।
उस पर लिखा था —
“Vikram Malhotra Calling…”
सुरेश के हाथ कांप रहे थे।
“मैं… मैं क्या करूँ?”
आरव ने शांत आवाज़ में कहा —
“उठाओ।”
नैना ने घबराकर कहा —
“भैया, अगर उसे पता चल गया कि हम आपके साथ हैं तो—”
आरव ने उसकी बात बीच में ही रोक दी।
“उसे पहले से पता है।”
सुरेश ने कांपते हाथों से कॉल रिसीव कर लिया।
फोन स्पीकर पर था।
कुछ सेकंड तक सिर्फ बारिश की आवाज़ सुनाई देती रही।
फिर फोन के दूसरी तरफ से एक ठंडी, धीमी आवाज़ आई।
“सुरेश…”
सुरेश के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
“ज… जी सर…”
फोन के दूसरी तरफ हल्की हंसी सुनाई दी।
“तुम बहुत पुराने आदमी हो मेरे… इसलिए मैं तुम्हें एक मौका दे रहा हूँ।”
सुरेश घबराकर बोला —
“कौन-सा मौका?”
विक्रम की आवाज़ अचानक गंभीर हो गई।
“उस लड़के से दूर हो जाओ।”
नैना की नजर तुरंत आरव पर गई।
सुरेश ने डरते हुए पूछा —
“क… कौन-सा लड़का?”
फोन के दूसरी तरफ कुछ सेकंड की चुप्पी छा गई।
फिर विक्रम धीरे से बोला —
“जो खुद को आर्यन समझ रहा है।”
आरव की आँखों में आग जल उठी।
विक्रम आगे बोला —
“मुझे नहीं पता वह पागल है… या किसी ने उसे भेजा है।”
“लेकिन अगर वह मेरे रास्ते में आया…”
“तो उसका अंजाम भी वही होगा जो आर्यन का हुआ था।”
सुरेश के हाथ और ज्यादा कांपने लगे।
लेकिन उसी समय आरव ने फोन उसके हाथ से ले लिया।
“हेलो विक्रम।”
फोन के दूसरी तरफ अचानक सन्नाटा छा गया।
कुछ सेकंड तक कोई आवाज़ नहीं आई।
फिर विक्रम धीरे से बोला —
“तो… आखिरकार तुम बोल ही पड़े।”
आरव की आवाज़ ठंडी थी।
“डर गए?”
फोन के दूसरी तरफ हल्की हंसी आई।
“डर? तुमसे?”
“एक लड़का जो खुद को मरा हुआ आदमी समझ रहा है?”
आरव ने धीरे से कहा —
“तुम्हें याद है… पाँच साल पहले बारिश वाली रात?”
फोन के दूसरी तरफ अचानक चुप्पी छा गई।
आरव ने आगे कहा —
“सुनसान सड़क…”
“तुम…”
“और तुम्हारे हाथ में चाकू।”
नैना और सुरेश की सांस रुक गई।
फोन के दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक कोई आवाज़ नहीं आई।
फिर विक्रम ने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा —
“तुम… हो कौन?”
आरव ने जवाब दिया —
“जिसे तुमने मारा था।”
कुछ सेकंड तक सिर्फ बारिश की आवाज़ गूंजती रही।
फिर विक्रम की आवाज़ आई —
लेकिन इस बार उसमें हल्की घबराहट थी।
“यह नामुमकिन है…”
आरव ने शांत स्वर में कहा —
“शायद तुम्हें भी अब यकीन होने लगा है।”
विक्रम अचानक हंस पड़ा।
लेकिन उसकी हंसी बनावटी थी।
“ठीक है…”
“अगर तुम सच में आर्यन हो…”
“तो खेल शुरू करते हैं।”
आरव की आँखें सिकुड़ गईं।
“कैसा खेल?”
विक्रम की आवाज़ ठंडी हो गई।
“जिसमें या तो तुम मरोगे…”
“या फिर मैं।”
और फिर कॉल कट हो गई।
कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।
नैना ने धीरे से पूछा —
“भैया… अब क्या करेंगे?”
आरव ने बारिश में भीगी सड़क की तरफ देखा।
उसकी आँखों में अब डर नहीं था।
सिर्फ बदले की आग थी।
“अब मैं उसे ढूंढूंगा…”
“और इस बार…”
“उसकी कहानी खत्म करूँगा।”
लेकिन उसी समय…
आरव के फोन पर एक नया मैसेज आया।
उसने स्क्रीन देखी।
और उसका चेहरा अचानक सख्त हो गया।
मैसेज विक्रम का था।
उसमें सिर्फ एक फोटो थी।
उस फोटो को देखकर नैना चीख पड़ी।
⚡ अगला अध्याय:
अध्याय 9 – “बंधक”
इस अध्याय में पता चलता है कि विक्रम ने किसी बहुत करीबी इंसान को किडनैप कर लिया है… और वह आरव को एक खतरनाक जाल में फंसाने वाला है।