अधूरी मौत का बदला: एक पुनर्जन्म की रहस्यमयी कहानी

अध्याय 6: विक्रम का असली साथी

सुरेश की बात सुनकर कुछ सेकंड तक कोई भी कुछ नहीं बोला।

रिसेप्शन एरिया में हल्की-हल्की आवाज़ें गूंज रही थीं, लेकिन आरव के कानों में सिर्फ एक ही वाक्य बार-बार गूंज रहा था —

“वह अकेला नहीं था…”


आरव ने धीरे से पूछा —

“मतलब… विक्रम के साथ और कौन था?”


सुरेश ने तुरंत जवाब नहीं दिया।

उसने चारों तरफ घबराकर देखा, जैसे कोई उन्हें सुन रहा हो।


फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा —

“यह जगह बात करने के लिए सुरक्षित नहीं है।”


नैना ने चिंतित होकर पूछा —

“तो कहाँ?”


सुरेश ने इशारे से उन्हें बाहर आने को कहा।


कुछ मिनट बाद तीनों बिल्डिंग से थोड़ी दूर एक छोटे से कैफे में बैठे थे।


कैफे लगभग खाली था।

बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।


सुरेश ने कॉफी का कप उठाया, लेकिन उसके हाथ थोड़ा कांप रहे थे।


“मैंने पाँच साल तक यह राज़ अपने दिल में छिपाकर रखा है…”


“क्योंकि मुझे डर था कि अगर मैंने किसी को बताया… तो अगला नंबर मेरा होगा।”


आरव ने गहरी आवाज़ में कहा —

“अब डरने की जरूरत नहीं है।”


“क्योंकि इस बार मैं वापस आ चुका हूँ।”


सुरेश ने उसकी आँखों में देखा।

कुछ सेकंड तक वह चुप रहा।


फिर उसने धीरे से कहा —


“आपकी मौत के एक हफ्ते पहले… मैंने विक्रम को किसी से फोन पर बात करते सुना था।”


नैना ध्यान से सुन रही थी।


“वह कह रहा था —”


‘आर्यन को रास्ते से हटाना जरूरी है… नहीं तो सब खत्म हो जाएगा।’


आरव की मुट्ठियाँ कस गईं।


“और फोन के दूसरी तरफ कौन था?”


सुरेश ने धीरे से जवाब दिया —


“एक बहुत ताकतवर आदमी।”


“जिसका नाम सुनकर मुंबई के बड़े-बड़े बिजनेसमैन भी डर जाते हैं।”


नैना ने धीरे से पूछा —


“कौन?”


सुरेश ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा —


“कबीर सिंघानिया।”


आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।


उस नाम के साथ ही उसके दिमाग में अचानक एक और याद चमकी।


एक बड़ी मीटिंग…

एक लंबी टेबल…

और उसके सामने बैठा एक आदमी।


तेज नज़रें…

सफेद सूट…

और चेहरे पर खतरनाक मुस्कान।


“आर्यन… बिजनेस में दोस्ती नहीं होती।”


“सिर्फ ताकत होती है।”


दृश्य अचानक खत्म हो गया।


आरव ने गहरी सांस ली।


“मुझे याद आ गया…”


नैना ने पूछा —


“क्या?”


आरव ने धीरे से कहा —


“कबीर सिंघानिया… हमारी कंपनी खरीदना चाहता था।”


“लेकिन मैंने मना कर दिया था।”


सुरेश ने सिर हिलाया।


“और उसके बाद ही सब कुछ बदल गया।”


“विक्रम अचानक बहुत अमीर हो गया…”

“और कुछ ही महीनों बाद आपकी मौत हो गई।”


कैफे के बाहर बारिश तेज़ हो चुकी थी।


आरव खिड़की के बाहर देख रहा था।


अब तस्वीर साफ हो रही थी।


यह सिर्फ दोस्त का धोखा नहीं था।


यह करोड़ों की साजिश थी।


नैना ने धीरे से पूछा —


“भैया… अगर विक्रम और कबीर दोनों इसके पीछे हैं…”


“तो आप अकेले क्या कर पाएंगे?”


आरव धीरे-धीरे मुस्कुराया।


लेकिन वह मुस्कान डरावनी थी।


“मैं अकेला नहीं हूँ।”


नैना ने हैरानी से पूछा —


“कौन है आपके साथ?”


आरव ने धीरे से जवाब दिया —


“सच।”


फिर उसने मेज पर मुट्ठी रखी।


“और सच को छिपाना हमेशा के लिए मुमकिन नहीं होता।”


लेकिन उसी समय…


कैफे के बाहर एक काली कार आकर रुकी।


उसमें से दो आदमी उतरे।


दोनों ने काले कपड़े पहने हुए थे।


और वे सीधे कैफे के अंदर आ रहे थे।


सुरेश का चेहरा अचानक सफेद पड़ गया।


“ओह नहीं…”


नैना ने पूछा —


“क्या हुआ?”


सुरेश की आवाज़ कांप रही थी।


“विक्रम के आदमी…”


अगला अध्याय:
अध्याय 7 – “पहला हमला”

इस अध्याय में विक्रम के लोग पहली बार आरव को मारने की कोशिश करते हैं… लेकिन आरव की किस्मत और पिछले जन्म की यादें उसे बचा लेती हैं।

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