अधूरी मौत का बदला: एक पुनर्जन्म की रहस्यमयी कहानी

अध्याय 5: पुराना ऑफिस, छिपा हुआ सच

अगली सुबह…

मुंबई की सड़कों पर हमेशा की तरह तेज़ रफ्तार जिंदगी दौड़ रही थी।

ऊँची इमारतों के बीच खड़ा एक बड़ा कांच का टॉवर धूप में चमक रहा था।

इमारत के सामने बड़े अक्षरों में लिखा था —

“Malhotra Infra Group”


आरव कुछ सेकंड तक उस नाम को देखता रहा।

उसकी आँखों में हल्का-सा गुस्सा उभर आया।


“यही मेरी कंपनी थी…”


नैना ने हैरानी से पूछा —

“क्या?”


आरव ने धीरे से कहा —

“पहले इसका नाम ‘शर्मा इंफ्राटेक’ था।”


नैना की नजर इमारत पर गई।

“मतलब विक्रम ने सब कुछ अपने नाम कर लिया?”


आरव की आवाज़ भारी हो गई।


“सिर्फ कंपनी ही नहीं…”

“उसने मेरी जिंदगी भी ले ली।”


दोनों धीरे-धीरे बिल्डिंग के अंदर चले गए।


अंदर का माहौल बहुत शानदार था।

सफेद मार्बल का फर्श…

बड़ी रिसेप्शन डेस्क…

और हर तरफ महंगे सूट पहने लोग।


लेकिन जैसे ही आरव ने उस जगह को देखा…

उसके दिमाग में एक तेज़ झटका-सा लगा।


उसे अचानक एक और याद दिखाई दी।


वही रिसेप्शन…

वही जगह…

और वह खुद वहाँ खड़ा था।


लेकिन उस समय उसका नाम आरव नहीं था।


वह था —

आर्यन शर्मा।


“सर, आपकी मीटिंग शुरू होने वाली है।”

किसी की आवाज़ उसके दिमाग में गूंजी।


आरव अचानक वर्तमान में वापस आया।


“भैया?”

नैना ने उसे हिलाया।


“आप ठीक हो?”


आरव ने धीरे से सिर हिलाया।


“हाँ… बस कुछ याद आ रहा था।”


वे दोनों रिसेप्शन के पास गए।


“हेलो सर, कैसे मदद कर सकती हूँ?”

रिसेप्शनिस्ट ने मुस्कुराकर पूछा।


आरव ने एक सेकंड सोचा…


फिर बोला —


“मैं यहाँ पहले काम करता था… बहुत साल पहले।”


रिसेप्शनिस्ट ने कंप्यूटर स्क्रीन देखी।


“सर, आपका नाम?”


आरव कुछ सेकंड के लिए चुप हो गया।


फिर उसने धीरे से कहा —


“आर्यन शर्मा।”


रिसेप्शनिस्ट की मुस्कान अचानक गायब हो गई।


उसने चौंककर ऊपर देखा।


“सर… आप मजाक कर रहे हैं?”


नैना घबरा गई।


“क्यों?”


रिसेप्शनिस्ट ने धीरे से कहा —


“आर्यन शर्मा… इस कंपनी के फाउंडर थे।”


“और उनकी मौत पाँच साल पहले हो चुकी है।”


कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।


आरव ने शांत आवाज़ में कहा —


“मुझे पता है।”


रिसेप्शनिस्ट थोड़ी असहज हो गई।


“सर, अगर आपको किसी से मिलना है तो मैं अपॉइंटमेंट—”


तभी पीछे से एक बूढ़ी आवाज़ आई।


“रुको।”


तीनों ने पीछे मुड़कर देखा।


सफेद बालों वाला एक बुजुर्ग आदमी धीरे-धीरे उनकी तरफ आ रहा था।


उसने आरव को ध्यान से देखा।


और फिर उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।


“यह… यह कैसे हो सकता है?”


नैना ने धीरे से पूछा —


“आप इन्हें जानते हैं?”


बुजुर्ग आदमी की आवाज़ कांप रही थी।


“मैं इस कंपनी में पिछले बीस साल से काम कर रहा हूँ…”


“और यह चेहरा…”


उसने धीरे से कहा —


“यह बिल्कुल आर्यन शर्मा जैसा है।”


आरव का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।


“आप कौन हैं?”


बुजुर्ग आदमी ने जवाब दिया —


“मेरा नाम सुरेश है।”


“मैं आर्यन सर का पर्सनल मैनेजर था।”


कुछ सेकंड तक वह आरव को घूरता रहा।


फिर धीरे से बोला —


“लेकिन यह असंभव है…”


“क्योंकि मैंने खुद उनकी लाश देखी थी।”


नैना के शरीर में सिहरन दौड़ गई।


आरव ने धीरे से कहा —


“अगर मैं कहूँ… कि मैं वही हूँ?”


सुरेश की आँखों में डर उतर आया।


“नहीं…”


फिर उसने धीरे से फुसफुसाया —


“अगर यह सच है…”


“तो आपको तुरंत यहाँ से जाना चाहिए।”


आरव ने चौंककर पूछा —


“क्यों?”


सुरेश ने घबराकर चारों तरफ देखा।


फिर बहुत धीमी आवाज़ में कहा —


“क्योंकि आपकी मौत… एक्सीडेंट नहीं थी।”


“वह… एक प्लान था।”


आरव की मुट्ठियाँ कस गईं।


“किसका प्लान?”


सुरेश ने एक नाम लिया।


“विक्रम का।”


लेकिन उसके बाद सुरेश ने जो कहा…

उसने आरव के पैरों तले जमीन खिसका दी।


“लेकिन वह अकेला नहीं था।”


अगला अध्याय:
अध्याय 6 – “विक्रम का असली साथी”

इस अध्याय में पता चलता है कि आर्यन की हत्या के पीछे सिर्फ विक्रम नहीं बल्कि एक और खतरनाक इंसान था… जो अब भी आरव के बहुत करीब है।

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