अधूरी मौत का बदला: एक पुनर्जन्म की रहस्यमयी कहानी

अध्याय 3: जिस शहर में मैं मरा था

कमरे में अजीब-सा सन्नाटा था।

नैना अभी भी आरव की बातों को समझने की कोशिश कर रही थी।

“भैया… आप जो बोल रहे हैं वो बहुत अजीब है।”

आरव खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया। बाहर सड़क पर सुबह की हलचल शुरू हो चुकी थी, लेकिन उसके दिमाग में अब भी वही दृश्य घूम रहे थे।

बारिश…
सुनसान सड़क…
और विक्रम का चेहरा।

“यह सपना नहीं था।”
आरव ने धीरे से कहा।

नैना ने पूछा —
“तो फिर क्या था?”

आरव ने खिड़की से बाहर देखते हुए जवाब दिया —

“यादें।”


नैना कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

“किसकी यादें?”

आरव ने धीरे-धीरे कहा —

“मेरे पिछले जन्म की।”


नैना ने गहरी सांस ली।

“ठीक है… मान लिया कि आपको कुछ यादें आ रही हैं। लेकिन इससे क्या साबित होता है कि वो सच हैं?”

आरव ने तुरंत जवाब नहीं दिया।

उसके दिमाग में अचानक एक और झलक आई।

एक बड़ा घर…

सफेद रंग का बंगला…

और गेट पर लगा नेमप्लेट —

“आर्यन शर्मा”


आरव अचानक बोल पड़ा —

“मेरा नाम आरव नहीं था।”

नैना ने चौंककर पूछा —

“क्या मतलब?”


आरव की आवाज़ धीमी लेकिन साफ थी।

“मेरे पिछले जन्म का नाम आर्यन शर्मा था।”


नैना कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

फिर उसने थोड़ा हँसने की कोशिश की।

“भैया… यह सब फिल्मों में होता है।”


आरव अचानक मुड़ा।

उसकी आँखें गुस्से से भरी हुई थीं।

“अगर यह फिल्म है… तो फिर मुझे यह सब कैसे पता है?”


उसने तेजी से बोलना शुरू किया —

“शर्मा इंफ्राटेक…
मुंबई में ऑफिस…
मेरी कंपनी…
और मेरा बिजनेस पार्टनर — विक्रम।”


नैना का चेहरा धीरे-धीरे गंभीर हो गया।

“आपने यह सब कहाँ सुना?”


आरव ने धीरे से कहा —

“कहीं नहीं।”

“मुझे याद आ रहा है।”


उसने तुरंत लैपटॉप खोला।

“अगर मैं सच बोल रहा हूँ… तो इसका सबूत भी होगा।”


उसने गूगल खोला और टाइप किया —

“Aryan Sharma Infratech”


कुछ सेकंड बाद स्क्रीन पर जो खबर खुली… उसे देखकर दोनों की सांस रुक गई।


हेडलाइन थी —

“प्रसिद्ध बिजनेसमैन आर्यन शर्मा की रहस्यमयी मौत”


नैना ने धीरे से स्क्रीन पढ़ी।


“पाँच साल पहले मुंबई के बिजनेसमैन आर्यन शर्मा की कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे हादसा बताया था।”


आरव की उंगलियाँ कांपने लगीं।


“पाँच साल…”


नैना ने धीरे से पूछा —

“भैया… आपकी उम्र अभी 23 है।”


आरव ने स्क्रीन से नज़र नहीं हटाई।

“मतलब… मेरी मौत के दो साल बाद मेरा जन्म हुआ।”


कमरे में अचानक ठंडी हवा का झोंका आया।


नैना के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

“यह… यह कैसे हो सकता है?”


आरव ने धीरे से कहा —

“पुनर्जन्म।”


लेकिन उसी समय आरव की नज़र स्क्रीन पर एक और फोटो पर पड़ी।


उस फोटो में दो लोग खड़े थे।

एक आर्यन शर्मा…

और उसके साथ…


विक्रम।


आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।


“यही है…”


नैना ने स्क्रीन देखी।

“कौन?”


आरव की आवाज़ ठंडी हो गई।


“जिसने मुझे मारा था।”


नैना ने डरते हुए पूछा —

“अगर यह सच है… तो अब क्या करोगे?”


आरव कुछ सेकंड तक चुप रहा।


फिर उसने स्क्रीन बंद कर दी।


“मुंबई जाना पड़ेगा।”


नैना हैरान रह गई।

“क्या?”


आरव ने उसकी तरफ देखा।


“जिस शहर में मेरी मौत हुई थी… वहीं से सच शुरू होगा।”


उसकी आँखों में एक खतरनाक दृढ़ता थी।


“और इस बार…”


“मैं अपनी मौत का राज़ भी ढूँढूंगा…”


“और अपना बदला भी।”

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