अधूरी मौत का बदला: एक पुनर्जन्म की रहस्यमयी कहानी

अध्याय 12 – छिपा हुआ सच

डॉकयार्ड में फैला धुआँ धीरे-धीरे हवा में घुल रहा था।

सायरन की आवाज़ अभी भी दूर-दूर तक गूंज रही थी।

आरव जमीन पर पड़े कबीर की तरफ दौड़ा।

कबीर के कंधे से खून बह रहा था।

वह दर्द से कराह रहा था लेकिन उसकी आँखें अभी भी होश में थीं।

आरव घुटनों के बल बैठ गया।

“कबीर… तुम ठीक हो?”

कबीर हल्का सा हँसा।

“तुम्हें अभी भी मेरी चिंता है?”

आरव की आवाज़ भारी हो गई।

“तुमने धोखा दिया… लेकिन फिर भी तुम मेरे दोस्त हो।”

कुछ सेकंड के लिए कबीर चुप रहा।

उसकी आँखों में पहली बार पछतावा दिखाई दिया।

दूर खड़ा विक्रम अभी भी अपने आदमियों के साथ पुलिस पर गोलियाँ चला रहा था।

लेकिन इस अराजकता के बीच…

आरव और कबीर के बीच एक बहुत बड़ा सच सामने आने वाला था।

कबीर ने धीरे-धीरे कहा —

“आरव… तुम्हें एक सच जानना होगा।”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“कौन सा सच?”

कबीर ने मुश्किल से सांस लेते हुए कहा —

“तुम्हारे पिता की हत्या…
वह सिर्फ पैसे के लिए नहीं हुई थी।”

आरव की आँखें फैल गईं।

“मतलब?”

कबीर ने धीरे से कहा —

“तुम्हारे पिता के पास एक फाइल थी…”

“ऐसी फाइल जिसमें शहर के सबसे बड़े लोगों के काले राज थे।”

आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।

“कौन लोग?”

कबीर ने दर्द से आँखें बंद कर लीं।

फिर धीमी आवाज़ में बोला —

“राजनेता… बिज़नेसमैन… पुलिस अधिकारी…”

“और उन सबका नेता है — कबीर सिंघानिया।”

आरव के दिमाग में जैसे तूफान आ गया।

“तो मेरे पिता सच दुनिया के सामने लाने वाले थे?”

कबीर ने सिर हिलाया।

“हाँ।”

“और इसलिए उन्हें मार दिया गया।”

आरव की मुट्ठियाँ गुस्से से कस गईं।

“वह फाइल अब कहाँ है?”

कबीर ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

उसकी आवाज़ बहुत कमजोर हो चुकी थी।

“वह फाइल… अभी भी मौजूद है।”

आरव तुरंत झुक गया।

“कहाँ?”

कबीर ने कांपते हुए हाथ से आरव की जैकेट पकड़ी।

फिर धीरे-धीरे कहा —

“तुम्हारे पिता ने उसे…
तुम्हारे लिए छुपाया था।”

आरव पूरी तरह हैरान रह गया।

“मेरे लिए?”

कबीर ने मुश्किल से सिर हिलाया।

“हाँ…”

“क्योंकि उन्हें पता था…
एक दिन तुम वापस आओगे।”

उसी समय पीछे से भारी कदमों की आवाज़ आई।

आरव ने मुड़कर देखा।

अंधेरे में से एक साया धीरे-धीरे उनकी तरफ आ रहा था।

जैसे ही वह रोशनी में आया…

आरव का चेहरा सख्त हो गया।

वह था — कबीर सिंघानिया।

उसके हाथ में बंदूक थी।

और इस बार उसकी आँखों में कोई खेल नहीं था।

सिर्फ मौत थी।

कबीर सिंघानिया ठंडी आवाज़ में बोला —

“मुझे लगता है… तुम दोनों ने बहुत बातें कर लीं।”

आरव समझ चुका था —

अब असली सच सामने आने ही वाला है।

लेकिन इसके लिए उसे सबसे खतरनाक इंसान का सामना करना पड़ेगा।

और इस बार…

शायद बचने का कोई रास्ता नहीं था। 📖🔥

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